आईटीआर में गलती होना असामान्य नहीं, समाधान मौजूद
भारत में बदलते टैक्स नियमों और डिजिटल प्रक्रियाओं के बीच आयकर रिटर्न दाखिल करना आम करदाताओं के लिए एक नियमित वार्षिक कार्य बन चुका है। इसके बावजूद रिटर्न दाखिल करते समय छोटी या बड़ी भूलें होना बेहद सामान्य है। आंकड़ों से यह भी स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में करदाता गलत विवरण भर देने, आय के किसी स्रोत को दर्ज न करने या किसी कटौती को सही ढंग से न जोड़ने के कारण बाद में रिफंड में देरी या नोटिस का सामना करते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए आयकर विभाग ने संशोधित रिटर्न यानी रिवाइज्ड आईटीआर का विकल्प उपलब्ध कराया है।
क्यों आवश्यक होता है संशोधित रिटर्न
कई बार करदाता जल्दबाज़ी में आईटीआर तो दाखिल कर देते हैं, परंतु बाद में उन्हें महसूस होता है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी तथ्यात्मक रूप से अधूरी या गलत है। उदाहरण के तौर पर—ब्याज आय दर्ज करना भूल जाना, किसी निवेश पर मिलने वाली कटौती को शामिल न करना, पहले से जमा कराए गए टैक्स की जानकारी गलत अंकित कर देना या बैंक खाते का विवरण गलत दर्ज हो जाना आदि।
ऐसी स्थिति में गलत रिटर्न को अनदेखा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे विभागीय असंगतियाँ उत्पन्न होती हैं और करदाता को नोटिस भी मिल सकता है। अतः संशोधित रिटर्न इस समस्या का सबसे सुरक्षित और वैधानिक समाधान है।
संशोधित रिटर्न के लिए निर्धारित समय-सीमा
आयकर कानून के अनुसार, किसी भी मूल्यांकन वर्ष के समाप्त होने से पहले करदाता अपना आईटीआर संशोधित करने का अधिकार रखता है। मौजूदा प्रावधानों के तहत, एसेसमेंट ईयर 2025–26 के लिए करदाता दिसंबर 2025 तक अपना संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
यह वही अंतिम तिथि है, जिसके भीतर विलंबित रिटर्न (बिलेटेड रिटर्न) भी दाखिल किया जा सकता है। अतः समय-सीमा के भीतर संशोधन करना न केवल कानूनी दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और भविष्य के विवादों से बचाव के लिए भी अनिवार्य है।
क्या संशोधित रिटर्न पर कोई दंड लगता है
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह रहता है कि क्या करदाता को रिवाइज्ड आईटीआर दाखिल करने पर किसी प्रकार का शुल्क या दंड चुकाना पड़ता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, संशोधित रिटर्न दाखिल करना पूरी तरह निशुल्क है। करदाता आवश्यकतानुसार जितनी बार चाहें, संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
यह व्यवस्था करदाताओं को सुविधा प्रदान करती है कि यदि किसी चरण पर उन्हें नई गलती का पता चलता है, तो वे पुनः उसी वर्ष के लिए रिटर्न संशोधित कर सकते हैं।
रिफंड प्रोसेस हो जाने के बाद भी सुधार संभव
अक्सर ऐसा होता है कि करदाता को रिफंड प्राप्त हो चुका होता है, लेकिन बाद में उन्हें किसी विवरण में भूल का पता चलता है। संशोधित रिटर्न की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रिफंड के प्रसंस्करण के बाद भी करदाता अपना रिटर्न संशोधित कर सकते हैं।
यानी रिफंड प्राप्त होना संशोधन के अधिकार को समाप्त नहीं करता। हालांकि, रिफंड की राशि संशोधन के बाद बढ़ या घट सकती है, जो विभाग की पुनः समीक्षा के बाद निर्धारित होती है।
वेरिफिकेशन अनिवार्य
संशोधित रिटर्न दाखिल करने के बाद करदाता को 30 दिनों के भीतर उसका वेरिफिकेशन पूरा करना आवश्यक होता है। बिना वेरिफिकेशन के रिटर्न मान्य नहीं माना जाता।
वेरिफिकेशन ई-वेरीफिकेशन या भरे हुए फॉर्म का भौतिक प्रेषण—दोनों तरीकों से किया जा सकता है। अधिकांश करदाता डीमैट अकाउंट, आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के माध्यम से ई-वेरीफिकेशन करते हैं।
किन परिस्थितियों में संशोधित रिटर्न अनिवार्य माना जाए
संशोधित रिटर्न केवल सुविधा नहीं, कई बार आवश्यकता भी होता है। निम्न स्थितियों में संशोधन अवश्य करना चाहिए—
आय के किसी स्रोत का छूट जाना
यदि करदाता ने वेतन, ब्याज, किराया, पूंजी लाभ या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त आय को दर्ज नहीं किया है, तो संशोधन आवश्यक है।
कटौती या छूट का गलत उल्लेख
अक्सर लोग धारा 80सी, 80डी, 24बी आदि की कटौतियों को गलत तरीके से जोड़ देते हैं।
गलत बैंक विवरण
गलत बैंक खाते का उल्लेख रिफंड प्रक्रिया को रोक सकता है।
टीडीएस का गलत दावा
फॉर्म 26एएस या एआईएस से मिलान किए बिना टीडीएस दर्ज करने से त्रुटि हो सकती है।
व्यक्तिगत विवरण में गलती
पैन, पता या अन्य विवरण गलत भरने पर संशोधन अनिवार्य है।
क्या संशोधित रिटर्न से जोखिम बढ़ता है
संशोधित रिटर्न पूरी तरह वैधानिक है। जब तक करदाता जानबूझकर गलत जानकारी न दे, संशोधन करने से जोखिम नहीं बढ़ता। बल्कि, गलत रिटर्न को सुधारना भविष्य के विवादों से बचाता है।
हालांकि, बहुत अधिक बार संशोधित रिटर्न दाखिल करना विभाग को संदिग्ध लग सकता है, इसलिए केवल वास्तविक भूलों पर ही संशोधन करना उचित है।
तकनीकी प्रक्रिया कैसे पूरी करें
संशोधित रिटर्न वही प्रक्रिया अपनाकर दाखिल किया जाता है, जो सामान्य आईटीआर filing में होती है। अंतर केवल इतना होता है कि—
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आईटीआर फॉर्म में संशोधित रिटर्न विकल्प का चयन किया जाता है
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मूल रिटर्न का acknowledgment number दर्ज करना होता है
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संशोधित विवरण को सही तरीके से अपडेट करना होता है
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वेरिफिकेशन समय पर पूरा करना होता है
आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर यह सुविधा सरलता से उपलब्ध है, और अधिकांश करदाता स्वयं भी इसे कर लेते हैं।
ध्यान रखने योग्य सावधानियाँ
आईटीआर संशोधित करने से पहले करदाता को निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए—
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अपने AIS, TIS और 26AS का मिलान अवश्य करें
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किसी भी आय या कटौती को दोहराएं नहीं
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बैंक विवरण सटीक दर्ज करें
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यदि रिफंड घटने की संभावना हो, तो अग्रिम योजना बनाएं
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दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां सुरक्षित रखें
संशोधित आईटीआर करदाताओं के लिए एक बेहद लाभदायक व्यवस्था है। यह न केवल वित्तीय शुद्धता सुनिश्चित करती है, बल्कि कर कानूनों के अनुपालन को भी सरल बनाती है। भूल होना स्वाभाविक है, परंतु उनका सुधार समय-सीमा के भीतर करना करदाता की जिम्मेदारी है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, आईटीआर Filing 2025 के लिए दिसंबर 2025 तक संशोधित रिटर्न दाखिल करने का अवसर उपलब्ध है। अतः जिन करदाताओं ने अपने रिटर्न में कोई त्रुटि पाई है, उन्हें बिना देरी इस सुविधा का लाभ उठाना चाहिए।