बिहार कैबिनेट की पहली बैठक में विकास के दस बड़े फैसले
बैठक में रोजगार और उद्योग पर विशेष जोर
पटना में नई बनी राज्य सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में दस बड़े फैसले लिए गए। इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण फैसला युवाओं के लिए रोजगार और उद्योगों के विस्तार का है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकार ने यह साफ कर दिया कि वह आने वाले समय में रोजगार, तकनीक, उद्योग और शहर विकास पर तेज काम करेगी।
सरकार का मुख्य लक्ष्य युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देना है। इसके लिए उद्योग लगाने की योजना बनाई गई है और नई कंपनियों को राज्य में लाने की तैयारी की जा रही है।
एआई मिशन से नई तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन की मंजूरी दी गई। इस मिशन का उद्देश्य राज्य में नई तकनीक के विकास को प्रोत्साहन देना है। सरकार का मानना है कि नई तकनीक से उद्योग बढ़ेंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य आधुनिक बदलावों के साथ आगे बढ़ेगा।
नई तकनीक से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ी समिति बनाई जाएगी। यह समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में काम करेगी और इसमें देश और विदेश के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति छह महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।बिहार कैबिनेट के फैसले से ग्रामीण इलाकों में छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। चीनी मिलों का दोबारा शुरू होना केवल उद्योग का विस्तार नहीं होगा, बल्कि गन्ना उगाने वाले किसानों को भी मजबूत बाजार मिलेगा। ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, जिससे बड़े शहरों के पलायन में भी कमी आ सकती है। सरकार का मानना है कि यदि रोजगार गांवों तक पहुंचे तो पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव होगा।
चीनी मिलों को शुरू करने का फैसला
बैठक में राज्य में नई और पुरानी चीनी मिलों को शुरू करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सरकार ने कहा कि बिहार में 25 नई चीनी मिलें लगाई जाएंगी। इसके साथ ही 9 पुरानी बंद चीनी मिलों को फिर से चालू किया जाएगा।
चीनी मिलों के शुरू होने से ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ेगा। किसानों को गन्ना उत्पादन का बेहतर दाम मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
नए टाउनशिप से शहरों का विकास होगा
बिहार सरकार ने राज्य में 11 नए टाउनशिप बनाने की योजनाओं को मंजूरी दी है। इन टाउनशिप में सीतामढ़ी, सोनपुर और अन्य प्रमंडलीय मुख्यालय शामिल होंगे। नए टाउनशिप बनने से शहरों की संरचना बेहतर होगी, लोगों को सुविधाएं मिलेंगी और नए व्यवसाय के अवसर पैदा होंगे।
बिहार को तकनीकी हब बनाने की तैयारी
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि बिहार को पूर्वी भारत का नया तकनीकी केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए राज्य में डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी बनाने की योजनाएं मंजूर की गई हैं।
ये तकनीकी ढांचे राज्य को उद्योगों के नए दौर में आगे ले जाएंगे और बड़े निवेश लाने में मदद करेंगे।
एक करोड़ रोजगार देने का लक्ष्य दोहराया
बैठक से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर यह दोहराया कि सरकार अगले पांच साल में एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और उद्योगों के विस्तार से रोजगार बढ़ाया जाएगा।
इसके साथ, राज्य में सरकारी नौकरी और निजी क्षेत्र दोनों में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
अग्रणी उद्यमियों से सुझाव लेकर नीति बनेगी
राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब उद्यमियों और अर्थशास्त्रियों के सुझावों को भी ध्यान में रखेगी। बैठक में यह भी तय हुआ कि संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों की राय लेकर योजनाएं बनाई जाएंगी। इससे योजनाएं मजबूत बनेंगी और निवेश बढ़ेगा।
नई तकनीक और शिक्षा पर भी ध्यान
उद्योग और तकनीकी विकास के साथ-साथ सरकार अब शिक्षा को भी तकनीक से जोड़ने की योजना बना रही है। नई तकनीक के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और युवा अधिक दक्ष बनेंगे।
राज्य में तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों को बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है।
उद्योगों के लिए बेहतर सुविधा की तैयारी
उद्योग लगाने के लिए सरकार आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर काम करेगी। इसमें सड़क, बिजली, पानी और मानव संसाधन का विकास शामिल है। सरकार का कहना है कि अब बिहार में इन सुविधाओं में सुधार हुआ है और उद्योग को आगे बढ़ाना आसान होगा।
योजनाओं पर तेजी से काम होगा
कैबिनेट बैठक में एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी गई जो इन योजनाओं के क्रियान्वयन की देखरेख करेगी। यह समिति इस बात पर नजर रखेगी कि रोजगार, तकनीक और उद्योग से जुड़े कार्य सही ढंग से पूरे हों।