उपमुख्यमंत्री की संवेदनशीलता से बदली दिव्यांग कार्यकर्ता की जिंदगी
जन्म से ही शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद जीवन में आगे बढ़ने का हौसला रखने वाली वनांचल गांव धामिनडीह की आदिवासी युवती सुनीता धुर्वे के लिए एक नई सुबह आई है। पिछले नौ वर्षों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में गांव की सेवा कर रही सुनीता को उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा के स्थानीय विधायक विजय शर्मा ने स्कूटी प्रदान कर उनके जीवन में नई उम्मीद की किरण जगाई है। यह घटना केवल एक सरकारी सहायता की कहानी नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे एक संवेदनशील प्रशासन आम जनता की समस्याओं को तुरंत हल कर सकता है।
10 दिन में पूरी हुई मांग
सुनीता धुर्वे ने 16 नवंबर को रेंगाखार पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति और दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताते हुए एक आवेदन सौंपा था जिसमें स्कूटी की मांग की गई थी। विजय शर्मा ने उनकी बात को गंभीरता से सुना और तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए। मात्र 10 दिन बाद 26 नवंबर को कवर्धा विधायक कार्यालय में सुनीता को नई स्कूटी सौंपी गई। यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक बेहतरीन उदाहरण है।
नौ साल से कर रही हैं गांव की सेवा
सुनीता धुर्वे जन्म से ही पैरों से अक्षम हैं और स्वतंत्र रूप से चलने में असमर्थ हैं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पिछले नौ वर्षों से विकासखंड बोड़ला के ग्राम धामिनडीह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। अपने कार्य के प्रति समर्पित सुनीता गांव के बच्चों और महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं। लेकिन आने-जाने की समस्या उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। चाहे किसी योजना की रिपोर्टिंग हो या कोई मीटिंग, उन्हें गांव से 40 किलोमीटर दूर स्थित चिल्फी परियोजना कार्यालय तक जाना पड़ता था।
ट्रायसायकल से होता था हाथों में दर्द
सुनीता को पहले ट्रायसायकल दी गई थी, लेकिन वह उनके लिए पर्याप्त नहीं था। ट्रायसायकल के पैडल चलाने में उनके हाथों में असहनीय दर्द होता था। लंबी दूरी तय करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था। एक महिला होने के नाते दूसरों की सहायता पर निर्भर रहना उनके लिए और भी चुनौतीपूर्ण था। कई बार समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पाने से उनका काम भी प्रभावित होता था। इन सभी परेशानियों ने सुनीता को एक बेहतर साधन की मांग करने के लिए प्रेरित किया।
भावुक सुनीता ने जताया आभार
स्कूटी प्राप्त करने के बाद सुनीता भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि जब 16 नवंबर को विजय भैया रेंगाखार जंगल में आए थे, तब मैंने उन्हें अपनी व्यथा बताई थी। उन्होंने मेरी बातों को गंभीरता से सुना और तुरंत अधिकारियों से चर्चा की। मैं कुछ मांगती उससे पहले ही उन्होंने सहायक उपकरणों सहित स्कूटी उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिए। सुनीता ने कहा कि अब उन्हें नया हौसला मिला है। वे कहीं भी बिना किसी समस्या के आ-जा सकती हैं और अपना काम और भी बेहतर तरीके से कर सकती हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर नया कदम
सुनीता के लिए यह स्कूटी केवल एक वाहन नहीं है, बल्कि यह उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का प्रतीक है। अब वे किसी पर निर्भर हुए बिना अपने दैनिक कार्यों को पूरा कर सकेंगी। आंगनबाड़ी से संबंधित सभी कार्य, चाहे वह गांव में बच्चों का पोषाहार वितरण हो या प्रोजेक्ट ऑफिस में मीटिंग, अब सुनीता सबकुछ स्वतंत्र रूप से कर पाएंगी। यह स्कूटी उनके जीवन में एक नया अध्याय खोलने जा रही है।
दो साल में 100 से अधिक दिव्यांगों को मिली स्कूटी
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की संवेदनशील पहल केवल सुनीता तक सीमित नहीं है। पिछले दो वर्षों में कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के 100 से अधिक दिव्यांगजनों को पेट्रोल चलित स्कूटी का वितरण किया जा चुका है। यह पहल दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। स्कूटी पाने वाले दिव्यांगजन अब अपने दैनिक कार्यों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में अधिक सहजता और आत्मविश्वास के साथ भागीदारी कर पा रहे हैं।
समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह पहल समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में लाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। विजय शर्मा की यह पहल दर्शाती है कि कैसे एक संवेदनशील नेता जनता की वास्तविक समस्याओं को समझकर त्वरित समाधान प्रदान कर सकता है। दिव्यांगजनों को मिल रही इन सुविधाओं से न केवल उनका जीवन आसान हो रहा है, बल्कि वे समाज में अपनी भूमिका को और मजबूती से निभा पा रहे हैं।
आदिवासी महिला सशक्तिकरण का उदाहरण
सुनीता धुर्वे की कहानी आदिवासी महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है। एक आदिवासी परिवार से आने वाली दिव्यांग युवती का आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनना और फिर अपनी मेहनत से गांव की सेवा करना अपने आप में प्रेरणादायक है। उनकी यह यात्रा समाज के अन्य दिव्यांग युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। यह साबित करती है कि शारीरिक अक्षमता किसी भी व्यक्ति को अपने सपने पूरे करने से नहीं रोक सकती।
सरकारी योजनाओं का सही उपयोग
यह घटना यह भी दर्शाती है कि कैसे सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है। दिव्यांगजनों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन कई बार इनका लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच पाता। विजय शर्मा ने सुनीता की समस्या को सुनकर तुरंत कार्रवाई की और योजना का लाभ उन तक पहुंचाया। यह प्रशासनिक दक्षता का एक उदाहरण है।
वनांचल क्षेत्र में विकास की किरण
कवर्धा जिले के वनांचल क्षेत्र में विकास की गति धीमी रही है। यहां की आदिवासी जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना एक चुनौती रही है। ऐसे में दिव्यांगजनों को स्कूटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना एक सराहनीय कदम है। इससे न केवल दिव्यांगजनों का जीवन आसान हो रहा है, बल्कि वे विकास की मुख्यधारा से भी जुड़ पा रहे हैं। यह पहल वनांचल क्षेत्र में सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
समाज को मिला संदेश
सुनीता धुर्वे की कहानी समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। दिव्यांगजनों को दया की नहीं, बल्कि अवसर और सुविधाओं की जरूरत होती है। जब उन्हें सही साधन और सहयोग मिलता है, तो वे भी समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सुनीता की मेहनत और विजय शर्मा की संवेदनशीलता का यह संगम एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है। यह कहानी अन्य प्रशासकों और जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।