भारत और रूस के रिश्तों में नई गति
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली के दो दिवसीय राजकीय दौरे पर पहुँचे। यह यात्रा भारत और रूस के बीच 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं पहुँचकर उनका स्वागत किया। उनके आने के साथ ही दिल्ली में सुरक्षा और तैयारी को और तेज किया गया है।
यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि भारत और रूस के बीच लंबे समय से बने मजबूत रिश्तों को आगे बढ़ाने की नई दिशा इसी मुलाकात से तय होगी। दोनों देश पिछले 78 वर्षों से स्थिर और भरोसेमंद साथी रहे हैं।
पुतिन का स्वागत और कार्यक्रम
सम्मान समारोह और राजघाट यात्रा
रूस के राष्ट्रपति को अगले दिन सुबह राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत दिया जाएगा। इसके बाद वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। हर बड़ी राजकीय यात्रा में यह परंपरा निभाई जाती है और पुतिन भी उसी परंपरा का पालन करेंगे।
पीएम मोदी के साथ अहम वार्ता
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन हैदराबाद हाउस में बैठक करेंगे। यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि दोनों नेता कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपनी राय साझा करेंगे। भारत और रूस कई अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र, जी-20, ब्रिक्स और एससीओ में एक-दूसरे के करीबी साझेदार हैं।
पिछले साल भारत ने G20 की अध्यक्षता की थी और रूस ने BRICS की। इस दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे को मजबूत समर्थन दिया। यह भरोसा दो देशों के रिश्ते को और मजबूत करता है।
बातचीत में कौन से मुद्दे होंगे?
व्यापार और अर्थव्यवस्था
भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने पर विशेष जोर होगा। दोनों देशों के बीच व्यापार में कई बार बाहरी दबाव आते हैं। इस बैठक में ऐसे दबावों से बचकर व्यापार को और आसान बनाने पर चर्चा होगी। यह भी उम्मीद है कि दोनों देश नई व्यापार प्रणाली पर सहमति बनाएँगे।
स्वास्थ्य और शिक्षा
स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई समझौते होने की संभावना है। भारत और रूस लंबे समय से विज्ञान और तकनीक में एक-दूसरे की मदद करते रहे हैं। इस यात्रा से इन क्षेत्रों को नया बल मिलेगा।
संस्कृति और मीडिया
बैठक के बाद राष्ट्रपति पुतिन भारत में रूस के नए मीडिया चैनल ‘आरटी इंडिया’ का शुभारंभ करेंगे। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक पहचान और जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ेगा।
ऊर्जा और छोटे रिएक्टर
ऊर्जा क्षेत्र में भारत और रूस के बीच पहले से मजबूत सहयोग रहा है। इस बार छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा होगी। यह ऊर्जा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का राजकीय भोज
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में राजकीय भोज आयोजित करेंगी। ऐसे भोज में दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। यह एक ऐसा मौका होता है जब दोनों देशों के नेता एक-दूसरे को और नजदीक से समझते हैं।
साझेदारी के 25 साल पूरे
भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी। वर्ष 2010 में इसे आगे बढ़ाकर ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया। यह संबंध अन्य देशों के मुकाबले हमेशा स्थिर और मजबूत रहे हैं। आज 25 साल पूरे होने पर यह यात्रा प्रतीकात्मक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दोनों देशों की यह साझेदारी सिर्फ रक्षा या अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है। भारत और रूस अब व्यापार, शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, मीडिया और ऊर्जा जैसे कई नए क्षेत्रों में भी मिलकर काम करना चाहते हैं।
क्या है इस दौरे का बड़ा संदेश?
मजबूत साझेदारी
यह दौरा बताता है कि भारत और रूस अपने रिश्तों को समय के साथ और मजबूत कर रहे हैं। दुनिया में बदलते हालात के बीच दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।
बहुध्रुवीय दुनिया की दिशा
भारत और रूस दोनों ही मानते हैं कि दुनिया में किसी एक शक्ति का दबाव नहीं होना चाहिए। दोनों देश बहुध्रुवीय दुनिया के समर्थक हैं, जहाँ हर देश को बराबरी का सम्मान मिले। यह संदेश इस यात्रा में भी स्पष्ट दिख रहा है।
भविष्य की ओर कदम
यह यात्रा दोनों देशों को नई दिशा देगी। व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में नई योजनाएँ बनेंगी। आने वाले सालों में इन योजनाओं का असर आम लोगों के जीवन पर भी पड़ेगा।