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तंबाकू और पान मसाले पर सरकार का सख्त फैसला, 1 फरवरी से बढ़ेगा टैक्स का बोझ

तंबाकू और पान मसाले पर सरकार का सख्त फैसला
तंबाकू और पान मसाले पर सरकार का सख्त फैसला
केंद्र सरकार ने 1 फरवरी से तंबाकू और पान मसाले पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और नया सेस लगाने का ऐलान किया है। जीएसटी के अलावा लगने वाले इस टैक्स का मकसद खपत कम करना, स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत करना और नुकसानदायक उत्पादों पर सख्ती बढ़ाना है।
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Tax on Tobacco: साल 2025 के आखिरी दिन केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सीधे तौर पर देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और तंबाकू उद्योग से जुड़ा हुआ है। 31 दिसंबर को जारी सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, 1 फरवरी 2026 से सिगरेट, तंबाकू और पान मसाले जैसे उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और नया सेस लगाया जाएगा।

भारत में तंबाकू और पान मसाले का सेवन लंबे समय से एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। गली-मोहल्लों से लेकर हाईवे ढाबों तक, हर जगह इन उत्पादों की आसान उपलब्धता ने इन्हें आम जीवन का हिस्सा बना दिया है। ऐसे में सरकार का यह कदम केवल टैक्स बढ़ाने का नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है कि नुकसानदायक आदतों की कीमत अब और चुकानी पड़ेगी।

तंबाकू और पान मसाला टैक्स: सरकार का नया ढांचा

सरकार ने साफ किया है कि 1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों पर लगाया जाने वाला नया टैक्स मौजूदा जीएसटी व्यवस्था से अलग होगा। इसका मतलब यह है कि अब उपभोक्ताओं को जीएसटी के अलावा अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और सेस भी देना होगा। यह नया टैक्स उस कंपनसेशन सेस की जगह लेगा, जो अब तक इन उत्पादों पर लगाया जा रहा था।

जीएसटी के साथ लगेगा अतिरिक्त टैक्स

सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार, पान मसाला, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लागू रहेगा, जबकि बीड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। इसके अलावा सिगरेट और तंबाकू पर एक्साइज ड्यूटी और पान मसाले पर नया सेस भी जोड़ा जाएगा। यानी कुल मिलाकर इन उत्पादों की कीमत में साफ बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

संसद की मंजूरी के बाद लागू हुआ फैसला

दिसंबर महीने में संसद ने दो अहम विधेयकों को मंजूरी दी थी। इनमें एक पान मसाला पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाने से जुड़ा था, जबकि दूसरा तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी को लेकर था। अब सरकार ने इन दोनों लेवी को लागू करने की तारीख 1 फरवरी तय कर दी है। इसके साथ ही मौजूदा जीएसटी कंपनसेशन सेस को खत्म करने का फैसला भी लिया गया है।

क्यों जरूरी था यह बदलाव

सरकार का मानना है कि मौजूदा टैक्स ढांचा तंबाकू जैसे नुकसानदायक उत्पादों की खपत को नियंत्रित करने में पूरी तरह प्रभावी नहीं था। नए ढांचे के जरिए एक तरफ जहां टैक्स व्यवस्था को सरल बनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर इन उत्पादों की कीमत बढ़ाकर उपभोक्ताओं को हतोत्साहित करने की कोशिश की जाएगी।

भारत में सिगरेट पर कितना टैक्स लगता है

फिलहाल भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स रिटेल कीमत का करीब 53 प्रतिशत है। इसमें 28 प्रतिशत जीएसटी और सिगरेट के आकार के आधार पर अतिरिक्त वैल्यू बेस्ड लेवी शामिल होती है। हालांकि यह आंकड़ा वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के 75 प्रतिशत बेंचमार्क से काफी कम है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि तंबाकू की खपत को कम करने के लिए टैक्स का स्तर ज्यादा होना चाहिए।

सेहत बनाम आदत की लड़ाई

एक आम उपभोक्ता के तौर पर देखें तो यह फैसला जेब पर सीधा असर डालने वाला है। जो लोग रोजाना सिगरेट या पान मसाले का सेवन करते हैं, उन्हें अब इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। लेकिन लंबे समय में यही बढ़ी हुई कीमतें कई लोगों को इस आदत से दूर जाने के लिए मजबूर भी कर सकती हैं।

डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से तंबाकू पर सख्त टैक्स लगाने की मांग कर रहे थे। कैंसर, हृदय रोग और सांस से जुड़ी बीमारियों का एक बड़ा कारण तंबाकू सेवन है। ऐसे में सरकार का यह कदम स्वास्थ्य के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।

उद्योग और बाजार पर क्या होगा असर

तंबाकू उद्योग के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा। लागत बढ़ने से कंपनियों को या तो कीमतें बढ़ानी होंगी या मुनाफा कम करना पड़ेगा। छोटे दुकानदारों और गुमटी चलाने वालों पर भी इसका असर दिख सकता है। हालांकि सरकार का तर्क साफ है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की कीमत पर कारोबार को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।