नए साल के पहले दिन पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध बेलुड़ मठ में कल्पतरु दिवस मनाया गया। इस खास मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और भक्त बेलुड़ मठ पहुंचे। हर साल की तरह इस बार भी यह पर्व पूरी धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। श्रीरामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है।
कल्पतरु दिवस का महत्व
कल्पतरु दिवस श्रीरामकृष्ण परमहंस से जुड़ा एक विशेष आध्यात्मिक पर्व है। इस दिन को कल्पतरु उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन श्रीरामकृष्ण ने अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने का वरदान दिया था। इसलिए इस दिन को कल्पतरु के नाम से पुकारा जाता है, जिसका अर्थ होता है इच्छा पूर्ण करने वाला वृक्ष। हर साल अंग्रेजी कैलेंडर के पहले दिन यानी एक जनवरी को यह पर्व मनाया जाता है।
बेलुड़ मठ में भक्तों का जमावड़ा
सुबह से ही बेलुड़ मठ में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। दूर-दूर से आए भक्तों ने मठ में दर्शन किए और विशेष पूजा में शामिल हुए। बेलुड़ मठ के अलावा दक्षिणेश्वर काली मंदिर और काशीपुर उद्यानबाटी में भी इस दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। यह स्थान रामकृष्ण मिशन से जुड़े पवित्र तीर्थ स्थल हैं, जहां हर साल कल्पतरु दिवस पर विशेष आयोजन किए जाते हैं।
भक्त सुबह-सुबह ही अपने घरों से निकलकर बेलुड़ मठ पहुंचे। उनके हाथों में फूल, प्रसाद और पूजा की सामग्री थी। सभी के चेहरे पर आस्था और भक्ति का भाव साफ झलक रहा था। लोगों ने कहा कि यह दिन उनके लिए बेहद मंगलकारी होता है और वे हर साल इस खास मौके पर बेलुड़ मठ आते हैं।
सुबह की मंगल आरती से शुरुआत
कल्पतरु दिवस पर बेलुड़ मठ में विशेष पूजा का आयोजन किया गया। सुबह साढ़े चार बजे मंगल आरती से इस पूजा की शुरुआत हुई। मुख्य मंदिर में भगवान की आरती की गई और भक्तों ने भी इसमें शामिल होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। आरती के समय मंदिर परिसर में घंटियों की आवाज और भजन-कीर्तन से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
मठ के पुजारियों ने बताया कि इस दिन विशेष तौर पर शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। सभी धार्मिक विधियां पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ पूरी की जाती हैं। मंगल आरती के बाद पूरे दिन भर भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था रहती है।
तीन मंदिरों में विशेष पूजा
बेलुड़ मठ में मुख्य मंदिर के साथ-साथ श्रीरामकृष्ण देव, माँ सारदा और स्वामी विवेकानंद के मंदिरों में भी विशेष पूजा की व्यवस्था की गई। तीनों मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया था। पुजारियों ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने इन तीनों महान आत्माओं के सामने अपनी मनोकामनाएं रखीं और आशीर्वाद लिया।
माँ सारदा देवी के मंदिर में महिला भक्तों की विशेष भीड़ देखी गई। उन्होंने माँ के चरणों में फूल चढ़ाए और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। वहीं, स्वामी विवेकानंद के मंदिर में युवाओं की संख्या अधिक थी, जो उनसे प्रेरणा और मार्गदर्शन की कामना कर रहे थे।
रामकृष्ण मिशन की परंपरा
रामकृष्ण मिशन दुनियाभर में आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है। स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित यह संस्था श्रीरामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं को आगे बढ़ाती है। बेलुड़ मठ इस मिशन का मुख्यालय है और यहां हर साल कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कल्पतरु दिवस इन कार्यक्रमों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन मठ के संचालक और पदाधिकारी विशेष प्रवचन भी देते हैं, जिसमें श्रीरामकृष्ण की शिक्षाओं और जीवन दर्शन को समझाया जाता है। भक्त इन प्रवचनों को बड़े ध्यान से सुनते हैं और अपने जीवन में उतारने की कोशिश करते हैं।
प्रसाद वितरण और सेवा कार्य
कल्पतरु दिवस पर बेलुड़ मठ में प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई। हजारों भक्तों को प्रसाद बांटा गया। मठ के स्वयंसेवकों ने पूरे दिन निस्वार्थ भाव से सेवा की। उन्होंने भक्तों को दर्शन कराने और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मठ प्रशासन ने बताया कि इस दिन के लिए कई दिन पहले से तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। सफाई, सजावट और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की जाती है ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो।
भक्तों की आस्था और विश्वास
बेलुड़ मठ आए भक्तों ने बताया कि कल्पतरु दिवस पर यहां आना उनके लिए बहुत शुभ होता है। उनका मानना है कि इस दिन की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है। कई भक्तों ने कहा कि पिछले वर्षों में उन्होंने यहां आकर जो मन्नत मांगी थी, वह पूरी हुई। इसलिए वे हर साल यहां आते हैं और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
एक वृद्ध भक्त ने बताया कि वह पिछले तीस सालों से कल्पतरु दिवस पर बेलुड़ मठ आ रहे हैं। उनके लिए यह एक आध्यात्मिक यात्रा है जो उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा देती है।
पर्व का संदेश
कल्पतरु दिवस केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह मानवता, सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश देता है। श्रीरामकृष्ण परमहंस ने अपने जीवन में सभी धर्मों का सम्मान किया और प्रेम, करुणा और सेवा का पाठ पढ़ाया। यह दिन हमें उनकी शिक्षाओं को याद दिलाता है और जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।
बेलुड़ मठ में मनाया गया कल्पतरु दिवस इस बार भी बेहद भव्य और आस्थापूर्ण रहा। भक्तों की भारी भीड़ और उनकी श्रद्धा ने इस पर्व को और भी खास बना दिया।