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बांग्लादेश उच्चायोग पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, खालिदा जिया को दी श्रद्धांजलि

बांग्लादेश उच्चायोग पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
बांग्लादेश उच्चायोग पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग जाकर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को श्रद्धांजलि दी। यह कदम भारत की मानवीय संवेदना और बांग्लादेश के साथ रिश्तों को संतुलित रखने की कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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Rajnath Singh: नई दिल्ली में गुरुवार का दिन भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से भावनात्मक और कूटनीतिक दोनों ही दृष्टियों से अहम रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बांग्लादेश उच्चायोग जाना केवल एक औपचारिक शोक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह पड़ोसी देश के साथ भारत के रिश्तों में संवेदनशीलता, सम्मान और संवाद की निरंतरता का संकेत भी माना जा रहा है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष रहीं बेगम खालिदा जिया के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित कर भारत ने यह साफ किया कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर मानवीय संवेदना और पड़ोसी धर्म को प्राथमिकता दी जाती है।

राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि और भारत का संदेश

नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग पहुंचकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिवंगत खालिदा जिया के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संदेश पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी संवेदनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा कि भारत इस दुख की घड़ी में खालिदा जिया के परिवार और बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ा है। यह बयान केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसमें एक पड़ोसी देश के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना झलकती है।

खालिदा जिया का राजनीतिक सफर

खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की उन शख्सियतों में थीं, जिनका नाम देश के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। वे दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं और उन्होंने कठिन राजनीतिक हालात में भी अपनी पार्टी का नेतृत्व किया। उनके पति जियाउर रहमान भी बांग्लादेश के राष्ट्रपति रह चुके थे। खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन संघर्ष, सत्ता और विरोध—तीनों से होकर गुजरा, जिसने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का केंद्रीय चेहरा बना दिया।

निधन और अंतिम विदाई

खालिदा जिया का 30 दिसंबर की सुबह ढाका में निधन हुआ। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। 80 वर्ष की आयु में उनका निधन बांग्लादेश के लिए एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ संसद परिसर में दफनाया गया, जहां वे अपने दिवंगत पति जियाउर रहमान के निकट सुपुर्द ए खाक की गईं। इस मौके पर देश-विदेश के कई प्रतिनिधियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

भारत की ओर से पहले भी दिखी संवेदना

भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पहले ही ढाका जाकर खालिदा जिया को श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके थे। उन्होंने खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजा गया शोक पत्र सौंपा। यह कदम यह दिखाता है कि भारत ने इस दुख की घड़ी में औपचारिकता से आगे बढ़कर व्यक्तिगत और मानवीय स्तर पर संवेदना व्यक्त की।

भारत-बांग्लादेश संबंधों की पृष्ठभूमि

हाल के महीनों में भारत और बांग्लादेश के संबंध कुछ जटिल दौर से गुजरते नजर आए हैं। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरों ने भारत की चिंता बढ़ाई है। नई अंतरिम सरकार के दौर में भारत-विरोधी स्वर भी तेज हुए हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी तल्खी महसूस की गई।

कूटनीतिक संतुलन की कोशिश

ऐसे माहौल में खालिदा जिया के निधन पर भारत की सक्रिय भागीदारी को कूटनीतिक संतुलन के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा मंत्री का उच्चायोग जाकर श्रद्धांजलि देना यह संदेश देता है कि भारत राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद बांग्लादेश की जनता और उसके लोकतांत्रिक इतिहास का सम्मान करता है।

क्षेत्रीय राजनीति और भारत की भूमिका

दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश की भूमिका अहम है। भारत यह अच्छी तरह समझता है कि स्थिर और शांत बांग्लादेश पूरे क्षेत्र के लिए जरूरी है। ऐसे में संवेदनशील मौकों पर सकारात्मक संकेत देना भारत की विदेश नीति की परिपक्वता को दर्शाता है। पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिशों के बीच भारत का यह कदम भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

श्रद्धांजलि के मायने

राजनाथ सिंह की यह यात्रा केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भविष्य के संवाद का आधार भी हो सकती है। यह दिखाता है कि भारत कठिन समय में भी पड़ोसी देश से संवाद के दरवाजे बंद नहीं करता। खालिदा जिया के निधन के बहाने भारत ने बांग्लादेश को यह भरोसा दिलाया है कि मानवीय संवेदना और सम्मान उसके रिश्तों की बुनियाद में शामिल हैं।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।