Ikkis Movie: नए साल का पहला दिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक भावनात्मक और यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ 1 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और आते ही दर्शकों के दिलों पर छा गई। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक युग को विदा करने जैसा अनुभव साबित हुई। बड़े पर्दे पर धर्मेंद्र को आखिरी बार देखने के लिए सिनेमाघरों में उमड़ी भीड़ इस बात का सबूत थी कि उनका असर आज भी उतना ही गहरा है।
फिल्म के साथ अगस्त्य नंदा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और पहले ही दिन उन्होंने यह जता दिया कि वह केवल नाम के सहारे नहीं, बल्कि अभिनय के दम पर आगे बढ़ने आए हैं। दर्शकों ने फिल्म को भावनात्मक रूप से अपनाया और सोशल मीडिया पर इसे नए साल की सबसे खास पेशकश बताया।
बॉक्स ऑफिस पर ‘इक्कीस’ की मजबूत शुरुआत
नए साल पर रिलीज होना किसी भी फिल्म के लिए जोखिम भरा फैसला माना जाता है, लेकिन ‘इक्कीस’ ने इस जोखिम को मौके में बदल दिया। फिल्म ने पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए मजबूत ओपनिंग दर्ज की।
सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ‘इक्कीस’ ने ओपनिंग डे पर करीब 7 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। यह आंकड़ा न केवल नए कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि कंटेंट आधारित फिल्मों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वीकेंड पर फिल्म की कमाई में और इजाफा हो सकता है।
2025 की कई फिल्मों को छोड़ा पीछे
‘इक्कीस’ की ओपनिंग डे कमाई ने साल 2025 में रिलीज हुई कई फिल्मों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। मिराई, ग्राउंड जीरो, द डिप्लोमैट, धड़क 2, देवा, मालिक और मेट्रो इन दिनों जैसी फिल्मों से ज्यादा कमाई कर ‘इक्कीस’ ने खुद को साल की मजबूत शुरुआत करने वाली फिल्मों में शामिल कर लिया।
दर्शकों की भावनाओं से सीधा जुड़ाव
धर्मेंद्र की मौजूदगी ने फिल्म को एक अलग ही भावनात्मक गहराई दी। जैसे ही वे पर्दे पर नजर आए, सिनेमाघरों में तालियों और आंखों में नमी का नजारा देखने को मिला। कई दर्शकों के लिए यह सिर्फ फिल्म देखना नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा अभिनेता को अंतिम विदाई देने जैसा पल था।
कहानी ने बढ़ाया फिल्म का प्रभाव
फिल्म ‘इक्कीस’ परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जिन्हें भारत के सबसे कम उम्र में यह सम्मान मिला था। फिल्म देशभक्ति को शोर और नारेबाजी से नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं और बलिदान के जरिए पेश करती है। यही बात इसे खास बनाती है।
निर्देशन और अभिनय का संतुलन
श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में हर किरदार को सोच-समझकर गढ़ा गया है। अगस्त्य नंदा ने एक संवेदनशील और ईमानदार अभिनय किया है। जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया, सिकंदर खेर और विवान शाह जैसे कलाकारों ने कहानी को मजबूती दी है।
धर्मेंद्र का किरदार और उनकी विदाई
धर्मेंद्र ने फिल्म में अगस्त्य नंदा के पिता की भूमिका निभाई है। उनका अभिनय सादा, लेकिन असरदार है। बिना किसी बनावटी संवाद के, उनकी आंखें ही बहुत कुछ कह जाती हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘इक्कीस’ उनके अभिनय करियर की एक गरिमामयी विदाई बनकर सामने आई है।
फिल्म समीक्षकों और ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो ‘इक्कीस’ आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर और मजबूत स्थिति बना सकती है। वीकेंड कलेक्शन फिल्म के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।