Indore Polluted Water: देश के सबसे स्वच्छ शहर का ख़िताब पाने वाला इंदौर शहर आज एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। जिस शहर को लगातार आठ वर्षों तक स्वच्छता का सिरमौर कहा गया, उसी शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। भागीरथपुरा इलाके में फैले डायरिया ने न केवल चार लोगों की जान ले ली, बल्कि 1400 से अधिक लोगों को बीमार कर दिया। यह घटना इंदौर की चमकती छवि पर एक गहरा दाग छोड़ गई है।
दूषित पानी बना बीमारी की जड़
लैब जांच में यह साफ हो गया है कि भागीरथपुरा इलाके में डायरिया फैलने का मुख्य कारण दूषित पेयजल था। इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर डॉ. माधव प्रसाद हसानी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में पानी की सप्लाई लाइन में लीकेज की पुष्टि हुई है। इसी लीकेज के जरिए गंदगी और संक्रमण पानी में मिला और लोगों के घरों तक पहुंच गया।
शौचालय के पास मिली पानी की पाइपलाइन
जांच के दौरान एक बेहद चिंताजनक तथ्य सामने आया। भागीरथपुरा में पुलिस चौकी के पास मुख्य पानी की पाइपलाइन ऐसी जगह से गुजर रही थी, जहां शौचालय बना हुआ है। पाइपलाइन में हुए लीकेज के कारण मलजल सीधे पीने के पानी में मिल गया। यह लापरवाही किसी एक अधिकारी या विभाग की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता को उजागर करती है।
प्रशासन हरकत में, लेकिन सवाल कायम
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पूरे इलाके की पाइपलाइन की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी लीकेज तो नहीं है। गुरुवार को घरों में दोबारा साफ पानी की सप्लाई शुरू की गई, लेकिन एहतियातन लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।
हालांकि सवाल यह उठता है कि जब इंदौर जैसे शहर में यह स्थिति है, तो छोटे शहरों और कस्बों की हालत क्या होगी?
हजारों घरों में सर्वे, सैकड़ों मरीज भर्ती
स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सर्वे में 1714 घरों के 8571 लोगों की जांच की गई। इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। बीते आठ दिनों में 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जिनमें से 201 अभी भी इलाजरत हैं। इनमें 32 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मौके पर पहुंचे अधिकारी
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों ने भागीरथपुरा का दौरा कर हालात का जायजा लिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पूरे मध्य प्रदेश के लिए बनेगी नई एसओपी
इस घटना से सबक लेते हुए राज्य सरकार अब पूरे मध्य प्रदेश के लिए पेयजल आपूर्ति को लेकर एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कहीं भी ऐसी घटना दोबारा न हो। पाइपलाइन की नियमित जांच, लीकेज की तत्काल मरम्मत और जल गुणवत्ता की समय-समय पर जांच को अनिवार्य किया जाएगा।