ओडिशा के खोरधा जिले में पिछले कुछ दिनों से हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जंगली हाथियों के झुंड ने कई गांवों में तबाही मचा रखी है। घरों में घुसकर तोड़फोड़ करना, खेतों में फसलें बर्बाद करना और लोगों की जान को खतरे में डालना अब आम बात हो गई है। इसी बीच एक दिल दहला देने वाली घटना घटी जब एक युवक की जान हाथी के हमले में चली गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा पुलिश और वन विभाग पर फूट पड़ा है।
भुवासुनी पटना गांव के प्रियब्रत पारिदा नामक युवक की मौत हाथी के हमले से हुई। यह घटना सुबह के समय हुई जब वह अपने दैनिक काम में लगा था। हालांकि इलाके में लगातार हाथियों की मौजूदगी को लेकर चेतावनी दी जा रही थी, फिर भी यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घट गई। युवक की मौत के बाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और लोगों का गुस्सा प्रशासन के खिलाफ भड़क उठा।
हाथियों का कहर कई गांवों में
खोरधा रेंज के अंतर्गत आने वाले बेगुनिया, बाघमारी, भुवासुनी पटना, परिचाल, छाई और आत्री जैसे कई गांवों में हाथियों का आतंक जारी है। हाथियों के झुंड रातभर गांवों में घूमते रहते हैं और घरों में घुसकर तोड़फोड़ करते हैं। किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलें रातोंरात बर्बाद हो जाती हैं। ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए रात में सो भी नहीं पाते।
कई गांवों में दरवाजे तोड़कर हाथी घरों में घुस जाते हैं। यह स्थिति लोगों के लिए बेहद डरावनी हो गई है। खासकर रात के समय गांव में सन्नाटा छा जाता है क्योंकि कोई भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर पाता।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो
स्थानीय युवा हाथियों के आतंक के वीडियो अपने मोबाइल फोन से बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं जिनमें हाथियों के झुंड गांवों में घूमते और तबाही मचाते दिख रहे हैं। इन वीडियो से साफ पता चलता है कि स्थिति कितनी गंभीर है और लोगों का जीवन कितने खतरे में है।

प्रशासन के प्रयास नाकाफी
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिन के समय माइक्रोफोन के जरिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है। रात में ड्रोन कैमरे की मदद से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। खोरधा रेंज के कैपाडार, गुडुम, आंदा, बाजपुर, पनबराज और आसपास के इलाकों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
फिलहाल खोरधा इलाके के विभिन्न स्थानों पर करीब 20 हाथी घूम रहे हैं। वन विभाग इन्हें वापस जंगल की ओर भगाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक कामयाबी नहीं मिल सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन के प्रयास नाकाफी हैं और जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

विधायक ने जताया शोक, मिली आर्थिक सहायता
युवक की मौत के बाद बेगुनिया के विधायक प्रदीप कुमार साहू घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने इस दुखद घटना पर गहरा शोक जताया और मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। विधायक ने प्रशासन के साथ बातचीत कर रेड क्रॉस फंड से 60,000 रुपये की तत्काल व्यवस्था करवाई।
इसके अलावा वन विभाग ने मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इस तरह कुल मिलाकर परिवार को 10.60 लाख रुपये की मदद मिली है। हालांकि परिजनों का कहना है कि पैसे से उनके बेटे की जान वापस नहीं आ सकती, लेकिन कम से कम आर्थिक संकट से कुछ राहत मिलेगी।
शव को जिला अस्पताल भेजा गया
स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस और वन विभाग ने मृतक के शव को एंबुलेंस में डालकर जिला मुख्यालय अस्पताल भेजा। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग इस घटना से सदमे में हैं।

ग्रामीणों की मांग
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने हाथियों को भगाने के लिए और ज्यादा कड़े कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल माइक से चेतावनी देने और ड्रोन से निगरानी करने से काम नहीं चलेगा। हाथियों को स्थायी रूप से जंगल में वापस भेजने के लिए ठोस उपाय करने होंगे।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जब तक हाथियों का खतरा रहता है, वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गांवों में मौजूद रहें। साथ ही खेतों और घरों को हाथियों से बचाने के लिए बेहतर इंतजाम किए जाएं।
पुलिस और वन विभाग पर फूटा गुस्सा
मृतक की मौत के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा पुलिस और वन विभाग पर फूट पड़ा। लोगों ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हाथियों के आतंक को रोकने के लिए पहले से ही कारगर उपाय किए जाते तो शायद यह जान बच सकती थी।
ग्रामीणों ने कहा कि अब और देरी नहीं की जानी चाहिए। अगर जल्द ही हाथियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो और भी जानें जा सकती हैं। लोग अपने घरों में सुरक्षित नहीं हैं और खेतों में जाने से भी डर रहे हैं।
ओडिशा के खोरधा जिले में हाथियों का बढ़ता आतंक एक गंभीर समस्या बन गया है। एक युवक की मौत ने इस समस्या की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। हालांकि प्रशासन और वन विभाग कुछ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये नाकाफी साबित हो रहे हैं। जरूरत है कि मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी योजनाएं बनाई जाएं ताकि न तो हाथियों को नुकसान हो और न ही मानव जीवन खतरे में पड़े। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।