Petrol-Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत अब सिर्फ सूरज की रोशनी और चाय की चुस्की से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है। सुबह ठीक 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां यानी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) ईंधन के ताजा दाम जारी करती हैं। ये दाम सिर्फ आंकड़े नहीं होते, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से गहराई से जुड़े होते हैं।
ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, स्कूल बस चलाने वाला ड्राइवर हो या फिर फल-सब्जी बेचने वाला छोटा व्यापारी—हर कोई कहीं न कहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों से प्रभावित होता है। यही वजह है कि ईंधन के दामों में जरा सा बदलाव भी लोगों की जेब और सोच दोनों पर असर डालता है।
3 जनवरी 2026 को जारी कीमतों के अनुसार पेट्रोल 103.54 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। इन दामों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है, लेकिन स्थिरता के बावजूद महंगाई का बोझ कम होता नजर नहीं आता।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी होती हैं। जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो उसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित करती है।
सरकार ने ईंधन की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रोजाना समीक्षा की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत तेल कंपनियां हर दिन नई कीमतें जारी करती हैं, ताकि उपभोक्ताओं को सही और ताजा जानकारी मिल सके। इससे पहले कीमतों में लंबे अंतराल पर बदलाव होता था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।
कर और टैक्स का असर
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स का बड़ा योगदान होता है। एक्साइज ड्यूटी और वैट की दरें अलग-अलग राज्यों में भिन्न होती हैं, यही कारण है कि अलग-अलग शहरों में ईंधन के दाम भी अलग नजर आते हैं।
आम आदमी पर सीधा असर
ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं तो उसका असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन महंगा होने से सब्जी, दूध, अनाज और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इसका सीधा असर आम परिवार के मासिक बजट पर पड़ता है।
व्यापार और उद्योग पर प्रभाव
छोटे व्यापारियों और उद्योगों के लिए भी ईंधन की कीमतें अहम होती हैं। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से उत्पाद महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग पर असर पड़ता है। यही कारण है कि कारोबारी वर्ग पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए रखता है।
क्या आगे राहत मिलेगी
बाजार जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होता है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए तुरंत बड़ी कटौती की उम्मीद कम ही जताई जा रही है।