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दिल्ली की हवा में फैल रहे खतरनाक दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया, सर्दियों में बढ़ता खतरा

Drug-Resistant Bacteria in Delhi Air: दिल्ली की हवा में फैल रहे खतरनाक बैक्टीरिया, जेएनयू रिसर्च में हुआ खुलासा
Drug-Resistant Bacteria in Delhi Air: दिल्ली की हवा में फैल रहे खतरनाक बैक्टीरिया, जेएनयू रिसर्च में हुआ खुलासा (File Photo)
जेएनयू के शोध में खुलासा हुआ है कि दिल्ली की हवा में खतरनाक दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया फैल रहे हैं जो सर्दियों में अधिक सक्रिय होते हैं। शोध में पाया गया कि 74 प्रतिशत बैक्टीरिया एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी हैं। ये मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोसी बैक्टीरिया सामान्य दवाओं को बेअसर कर सकते हैं। प्रदूषण के साथ यह दोहरी चुनौती दिल्लीवासियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा बन गई है।
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राजधानी दिल्ली के लिए प्रदूषण एक पुरानी समस्या है जो हर साल सर्दियों के मौसम में और भी गंभीर हो जाती है। लेकिन अब एक नया खतरा सामने आया है जो प्रदूषण से भी ज्यादा चिंताजनक साबित हो सकता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की एक ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा में अब खतरनाक दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया भी फैल रहे हैं। यह बैक्टीरिया सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं और लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

जेएनयू के शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंसेज के शोधकर्ताओं ने दिल्ली की हवा पर एक विस्तृत अध्ययन किया है। इस शोध के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली की हवा में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोसी बैक्टीरिया मौजूद हैं। ये बैक्टीरिया घर के अंदर और बाहर दोनों जगह की हवा में पाए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सर्दियों के महीनों में इन बैक्टीरिया की संख्या काफी बढ़ जाती है।

प्रदूषण के साथ दोहरी मुसीबत

दिल्ली के लोग पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। सर्दियों में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हवा में दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया की मौजूदगी ने मुसीबत को और बढ़ा दिया है। अब लोगों को प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के साथ-साथ इन खतरनाक बैक्टीरिया से भी बचना होगा। यह दोहरी चुनौती दिल्ली की जनता के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकती है।

नेचर जर्नल में प्रकाशित हुए नतीजे

यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध के नतीजों से पता चलता है कि दिल्ली की हवा में मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोसी यानी एमआरएस बैक्टीरिया पाए जाते हैं। ये बैक्टीरिया इतने खतरनाक हैं कि आम एंटीबायोटिक दवाएं इन पर असर नहीं करतीं। यानी अगर किसी व्यक्ति को इन बैक्टीरिया से संक्रमण हो जाए तो उसका इलाज करना बेहद मुश्किल हो सकता है। सामान्य दवाएं काम नहीं करेंगी और मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।

कैसे हुआ यह शोध

इस महत्वपूर्ण शोध के लिए जेएनयू के वैज्ञानिकों ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से हवा के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों की प्रयोगशाला में गहन जांच की गई। जब शोधकर्ताओं ने टेस्टिंग के लिए शुद्ध बैक्टीरियल स्ट्रेन को अलग किया तो परिणाम हैरान करने वाले थे। जांच में पता चला कि 74 प्रतिशत बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोधी थे। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि 36 प्रतिशत स्ट्रेन कई तरह की दवाओं के लिए प्रतिरोधी पाए गए। यानी ये बैक्टीरिया एक नहीं बल्कि कई दवाओं को बेअसर कर सकते हैं।

आठ प्रजातियों का विश्लेषण

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया की आठ अलग-अलग प्रजातियों का विस्तृत विश्लेषण किया। इनमें से दो प्रजातियां विशेष रूप से खतरनाक पाई गईं। ये दोनों प्रजातियां जानवरों के साथ-साथ इंसानों को भी आसानी से संक्रमित कर सकती हैं। इसका मतलब है कि ये बैक्टीरिया जानवरों से इंसानों में या इंसानों से इंसानों में फैल सकते हैं। यह स्थिति किसी महामारी को जन्म दे सकती है अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई।

सर्दियों में क्यों बढ़ जाते हैं बैक्टीरिया

इस शोध में मुख्य शोधकर्ता माधुरी सिंह ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि सर्दियों के मौसम में इन बैक्टीरिया की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह खोज इस बात को समझने में मदद करती है कि सर्दियों में फेफड़ों और सांस से जुड़े संक्रमण क्यों अधिक गंभीर और लंबे समय तक बने रहते हैं। ठंड के मौसम में हवा का तापमान कम होता है और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इन परिस्थितियों में बैक्टीरिया को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है।

मॉनसून में कम होती है समस्या

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि मॉनसून के मौसम में दिल्ली की हवा में बैक्टीरिया की संख्या सबसे कम होती है। बारिश के कारण हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व और बैक्टीरिया धुल जाते हैं। इससे हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है और बैक्टीरिया का खतरा कम हो जाता है। लेकिन बारिश के बाद जैसे ही मौसम सूखा होता है और सर्दियां आती हैं, फिर से यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है।

स्वास्थ्य पर क्या होगा असर

दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा हैं। अगर किसी व्यक्ति को इन बैक्टीरिया से संक्रमण हो जाए तो सामान्य एंटीबायोटिक से इलाज नहीं हो सकता। डॉक्टरों को ज्यादा ताकतवर और महंगी दवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है। कुछ मामलों में तो इलाज बेहद मुश्किल हो सकता है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।

क्या है समाधान

इस समस्या से निपटने के लिए कई स्तरों पर प्रयास करने होंगे। सबसे पहले तो दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करना जरूरी है। साथ ही लोगों को व्यक्तिगत सावधानी भी बरतनी होगी। बाहर जाते समय अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग करना चाहिए। घर के अंदर एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए क्योंकि गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से ही बैक्टीरिया प्रतिरोधी बन जाते हैं।

सरकार को उठाने होंगे कदम

यह शोध सरकार के लिए एक चेतावनी है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनानी होंगी। साथ ही जनता को इस खतरे के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाने होंगे। स्वास्थ्य विभाग को इस तरह के संक्रमणों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

यह शोध दिल्ली के लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। प्रदूषण के साथ अब दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया का खतरा भी मंडरा रहा है। समय रहते अगर सही कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।