हावड़ा जिला परिषद के उप-सभापति अजय भट्टाचार्य को चुनाव आयोग ने सुनवाई के लिए तलब किया था। आज उन्होंने साकराइल बीडीओ कार्यालय में सुनवाई केंद्र में हाजिर होकर अपना पक्ष रखा। इस पूरे मामले को लेकर अजय भट्टाचार्य ने गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि यह सब एक साजिश के तहत किया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने क्यों भेजा तलब
चुनाव आयोग ने अजय भट्टाचार्य को तलब करते हुए कहा था कि उनके 2002 के एसआईआर (मतदाता सूचना रिपोर्ट) में दर्ज जानकारी और वर्तमान जानकारी में मेल नहीं खा रहा है। इसी आधार पर उन्हें साकराइल बीडीओ कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाया गया था। लेकिन अजय भट्टाचार्य ने इस पूरे मामले को गलत बताते हुए कहा कि यह केवल उन्हें परेशान करने की एक कोशिश है।
अजय भट्टाचार्य का पक्ष
सुनवाई में पेश होते हुए अजय भट्टाचार्य ने कहा कि यह गांव उनका जन्मस्थान है। उन्होंने यहीं पर अपनी पढ़ाई पूरी की है और यहीं पर बड़े हुए हैं। फिर भी उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया जो कि एक तरह की परेशानी है। उन्होंने कहा कि वह सत्तर के दशक के मध्य से लेकर अब तक हर चुनाव में वोट डालते आ रहे हैं।
राजनीतिक सफर का जिक्र
अजय भट्टाचार्य ने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 1998, 2008, 2013, 2018 और 2023 में जिला परिषद के चुनाव लड़े हैं। वामपंथी सरकार के समय में वह जिला परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे। इसके बाद लगातार दो बार वह जिला परिषद के उप-सभापति के पद पर चुने गए और वर्तमान में भी इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं।
बीजेपी पर साजिश का आरोप
अजय भट्टाचार्य ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह सब बीजेपी की साजिश है। उनका आरोप है कि बीजेपी इस तरह की चालें चलकर बुजुर्ग और बीमार लोगों को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतों से किसी को कोई फायदा नहीं होने वाला है। लोग समझदार हैं और वे इन सब चीजों को अच्छे से समझते हैं।
सभी दस्तावेज लेकर पहुंचे
अजय भट्टाचार्य आज सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी लेकर साकराइल बीडीओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने अपने सभी रिकॉर्ड पेश किए। उनका कहना है कि उनके पास सभी सही और पूरी जानकारी है जो यह साबित करती है कि वह इसी गांव के मूल निवासी हैं और यहीं के वोटर हैं।
चुनाव आयोग का आधार गलत
भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग ने जिस आधार पर उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया है वह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि उनकी सभी जानकारी पहले से ही सही दर्ज है और उनमें कोई गड़बड़ी नहीं है। यह केवल उन्हें और उनके जैसे कई अन्य लोगों को परेशान करने का एक तरीका है।
बुजुर्गों को परेशान करने का आरोप
अजय भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग इस तरह से कई बुजुर्ग और बीमार लोगों को सुनवाई के लिए बुला रहा है। यह एक तरह की मानसिक प्रताड़ना है। जो लोग कई दशकों से एक ही जगह रह रहे हैं और वोट दे रहे हैं, उन्हें इस तरह परेशान करना सही नहीं है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
हावड़ा जिला पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां पर तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी और वामपंथी दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। हाल के वर्षों में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है लेकिन तृणमूल कांग्रेस अभी भी सत्ता में बनी हुई है।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका
जिला परिषद स्थानीय प्रशासन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां पर विकास कार्यों की योजना बनाई जाती है और उन्हें लागू किया जाता है। उप-सभापति का पद काफी जिम्मेदारी वाला होता है और इस पद पर रहने वाला व्यक्ति कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल होता है।
जनता की राय
स्थानीय लोगों का कहना है कि अजय भट्टाचार्य कई वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और उन्होंने यहां के विकास के लिए काफी काम किया है। लोग उन्हें अच्छी तरह से जानते हैं। ऐसे में उन पर यह आरोप लगाना कि उनकी जानकारी सही नहीं है, समझ से परे है।
आगे की राह
अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या फैसला लेता है। अजय भट्टाचार्य ने सभी दस्तावेज पेश कर दिए हैं और अपना पक्ष रख दिया है। अगर चुनाव आयोग को उनके तर्क सही लगते हैं तो यह मामला यहीं खत्म हो सकता है।
चुनावी माहौल
पश्चिम बंगाल में अगले चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। सभी पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। ऐसे में इस तरह के मामले राजनीतिक माहौल को और भी गरम कर देते हैं। विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
यह पूरा मामला यह दिखाता है कि चुनावी प्रक्रिया में कितनी बारीकियां होती हैं और कैसे छोटी-छोटी चीजें बड़े मुद्दे बन जाती हैं। अजय भट्टाचार्य जैसे अनुभवी राजनेता को भी सुनवाई के लिए बुलाया जाना यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग अपने नियमों को लेकर कितना सख्त है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या यह सख्ती केवल कुछ खास लोगों के खिलाफ है या सभी के लिए समान है।