Petrol-Diesel Price: हर सुबह देश में करोड़ों लोग आंख खोलते हैं तो सिर्फ दिनचर्या की चिंता नहीं होती, बल्कि एक सवाल मन में जरूर आता है—आज पेट्रोल और डीजल के दाम क्या हैं। यह सवाल अब सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहा। खेत में ट्रैक्टर चलाने वाला किसान हो, सब्जी मंडी जाने वाला ठेलेवाला या रोज ऑफिस पहुंचने वाला कर्मचारी, पेट्रोल-डीजल की कीमतें हर किसी की जिंदगी को किसी न किसी रूप में प्रभावित करती हैं।
देश की तेल विपणन कंपनियां रोज सुबह छह बजे नई दरें जारी करती हैं। यह प्रक्रिया देखने में भले ही तकनीकी लगे, लेकिन इसका असर सीधा रसोई के खर्च, किराए और महंगाई पर पड़ता है। यही वजह है कि ईंधन की कीमतें अब केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक चर्चा का विषय बन चुकी हैं।
कीमतें कैसे तय होती हैं
पेट्रोल और डीजल की दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर-रुपया विनिमय दर और घरेलू कर संरचना पर आधारित होती हैं। जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है या डॉलर मजबूत होता है, तो उसका दबाव भारतीय कीमतों पर भी दिखता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां इन उतार-चढ़ाव को संतुलित करने की कोशिश करती हैं।
शहर दर शहर अलग कहानी
देश के बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग हैं। इसकी वजह राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कर हैं। कहीं पेट्रोल सौ रुपये के पार है तो कहीं अभी भी अपेक्षाकृत कम। यह फर्क दिखाता है कि एक ही देश में ईंधन की कीमतें कैसे अलग-अलग अनुभव बन जाती हैं।
- नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72 | डीजल ₹87.62
- मुंबई: पेट्रोल ₹104.21 | डीजल ₹92.15
- कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94 | डीजल ₹90.76
- चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75 | डीजल ₹92.34
अहमदाबाद: पेट्रोल ₹94.49 | डीजल ₹90.17 - बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹89.02
- हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46 | डीजल ₹95.70
- जयपुर: पेट्रोल ₹104.72 | डीजल ₹90.21
- लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69 | डीजल ₹87.80
- पुणे: पेट्रोल ₹104.04 | डीजल ₹90.57
- चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30 | डीजल ₹82.45
- इंदौर: पेट्रोल ₹106.48 | डीजल ₹91.88
- पटना: पेट्रोल ₹105.58 | डीजल ₹93.80
- सूरत: पेट्रोल ₹95.00 | डीजल ₹89.00
- नासिक: पेट्रोल ₹95.50 | डीजल ₹89.50
आम आदमी की जेब पर बोझ
ईंधन महंगा होने का मतलब सिर्फ वाहन चलाना महंगा होना नहीं है। ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ते ही सब्जी, फल, दूध और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें भी महंगी हो जाती हैं। यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें महंगाई की जड़ मानी जाती हैं।
पिछले कुछ वर्षों से स्थिरता क्यों
मई 2022 के बाद केंद्र और कई राज्य सरकारों ने ईंधन पर लगने वाले करों में कटौती की। इसका सीधा असर कीमतों की स्थिरता के रूप में सामने आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भले ही उतार-चढ़ाव रहा हो, लेकिन घरेलू स्तर पर कीमतें लंबे समय से लगभग एक जैसी बनी हुई हैं।
ईंधन की कीमतें सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं होतीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ी होती हैं। सरकारें जानती हैं कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर जनता की नाराजगी में बदल सकता है। यही कारण है कि कीमतों को एक सीमा में रखने की कोशिश की जाती है।
तेल विपणन कंपनियां भी कीमतों को लेकर संतुलन बनाकर चलती हैं। बहुत ज्यादा बदलाव से बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका असर मांग पर पड़ता है। इसलिए धीरे-धीरे और सीमित बदलाव की नीति अपनाई जाती है।
क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम
दुनिया में अगर किसी बड़े स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती होती है, तो कीमतों पर दबाव आ सकता है। ऐसे संकेतों पर भारत की नजर बनी रहती है।
आम उपभोक्ता के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं अचानक कीमतें न बढ़ जाएं। हालांकि मौजूदा हालात में बड़े उछाल की संभावना कम दिखती है, लेकिन पूरी तरह निश्चिंत भी नहीं हुआ जा सकता।