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गंगासागर में भीषण आग का कहर, मकर संक्रांति से पहले जली कई अस्थायी झोपड़ियां

Gangasagar Fire Incident: मकर संक्रांति से पहले गंगासागर में भीषण आग, झुलसी अस्थायी झोपड़ियां
Gangasagar Fire Incident: मकर संक्रांति से पहले गंगासागर में भीषण आग, झुलसी अस्थायी झोपड़ियां
गंगासागर में मकर संक्रांति से पहले शुक्रवार सुबह भीषण आग लगी। कपिलमुनि आश्रम के पास बनी कई अस्थायी झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। सूखी घास से बनी झोपड़ियों में आग तेजी से फैली। दमकल और प्रशासन ने स्थिति संभाली। किसी के हताहत होने की खबर नहीं। शॉर्ट सर्किट या चूल्हे से आग लगने की आशंका। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।
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गंगासागर में मकर संक्रांति के पावन स्नान से ठीक पहले एक बड़ी दुर्घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित गंगासागर मेला स्थल पर शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे एक भयानक आग लग गई। कपिलमुनि आश्रम के पास बनी अस्थायी झोपड़ियों में अचानक आग की लपटें उठीं और देखते ही देखते कई छप्पर जलकर राख हो गए।

यह घटना उस समय हुई जब पूरा इलाका घने कोहरे में डूबा हुआ था। सूखे घास-फूस और पत्तियों से बनी इन अस्थायी झोपड़ियों में आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। हालांकि राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

आग पर काबू पाने की कोशिश

जैसे ही आग की खबर फैली, स्थानीय लोगों ने तुरंत बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी। साथ ही दमकल विभाग और पुलिश प्रशासन को सूचना दी गई। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और युद्ध स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया। देर शाम तक दमकल कर्मचारी आग से जूझते रहे।

घटनास्थल पर सागर के बीडीओ कनैया कुमार राव समेत जिला प्रशासन के कई अधिकारी पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित लोगों को आश्वासन दिया। प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू करने का आदेश दिया।

कितनी झोपड़ियां जलीं

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर कितनी झोपड़ियां इस आग में जलकर नष्ट हुईं। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कपिलमुनि आश्रम के पास नंबर दो रोड पर बनी दर्जनभर अस्थायी झोपड़ियां आग की चपेट में आईं। इन झोपड़ियों में ज्यादातर छोटे दुकानदार और मजदूर रहते थे जो मेले के दौरान अपनी आजीविका चलाते हैं।

आग से उनका सामान, कपड़े और जरूरी सामान सब कुछ जलकर राख हो गया। हालांकि जान का नुकसान न होने से लोगों ने राहत की सांस ली है।

आग लगने का कारण

आग लगने के सटीक कारण की अभी जांच चल रही है। प्राथमिक तौर पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि या तो बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगी या फिर खाना बनाते समय चूल्हे से आग फैली। क्योंकि झोपड़ियां सूखी घास और पत्तियों से बनी थीं, इसलिए आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया।

कुछ लोगों का कहना है कि सुबह के समय ठंड से बचने के लिए लोग आग जलाकर बैठे थे, शायद वहीं से आग फैली हो। हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

मकर संक्रांति के मौके पर गंगासागर में हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए आते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। ऐसे में मेला शुरू होने से ठीक पहले यह हादसा सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।

अस्थायी झोपड़ियों में अगर आग से बचाव के उचित इंतजाम होते तो शायद यह नुकसान कम हो सकता था। दमकल की गाड़ियों की तैनाती, आग बुझाने के उपकरण और जागरूकता की कमी साफ नजर आती है।

प्रशासन का आश्वासन

जिला प्रशासन ने इस घटना की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि पीड़ितों की मदद की जाएगी और नुकसान का आकलन करके उचित मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही पूरे मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

अब मेले के बाकी हिस्सों में अतिरिक्त दमकल गाड़ियां तैनात की जा रही हैं। आग से बचाव के लिए जगह-जगह पानी की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही लोगों को आग से सावधान रहने की अपील की जा रही है।

श्रद्धालुओं में दहशत

इस घटना से गंगासागर आए श्रद्धालुओं में काफी दहशत फैल गई है। कई लोग अपनी झोपड़ियों से बाहर निकल आए और सुरक्षित जगहों पर जाकर रुके। लोगों का कहना है कि मकर संक्रांति का पवित्र पर्व आने वाला है और ऐसे में यह हादसा चिंताजनक है।

हालांकि प्रशासन और स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया है कि अब सभी सुरक्षा इंतजाम मजबूत कर दिए गए हैं। मेले में आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

सबक और सतर्कता

यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि धार्मिक मेलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता बरतने की जरूरत है। अस्थायी झोपड़ियां बनाते समय आग रोधक सामग्री का इस्तेमाल होना चाहिए। बिजली के तारों की नियमित जांच होनी चाहिए। खाना बनाने के लिए सुरक्षित जगहों का निर्धारण होना चाहिए।

साथ ही लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। लापरवाही से छोटी चिंगारी बड़ी आग का रूप ले सकती है। विशेषकर सर्दियों में जब लोग आग जलाकर बैठते हैं तो दोगुनी सावधानी बरतनी चाहिए।

गंगासागर जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। अगर सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान दिया जाए तो ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। उम्मीद है कि प्रशासन इस घटना से सबक लेगा और आगे ऐसी किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगा।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।