US ISIS Airstrike: शनिवार की रात पश्चिम एशिया में एक बार फिर गोलियों और लड़ाकू विमानों की गूंज सुनाई दी। अमेरिका ने ईरान और सीरिया के सीमावर्ती इलाकों में इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर ऐसा प्रहार किया, जिसे केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक और रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि उस दर्द और आक्रोश का नतीजा था, जो पिछले महीने अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद वाशिंगटन में गहराता जा रहा था।
अमेरिकी विदेश विभाग और सेंट्रल कमांड द्वारा जारी किए गए वीडियो में लड़ाकू विमानों को अंधेरे आसमान में उड़ान भरते और सटीक हमले करते देखा जा सकता है। इन दृश्यों ने साफ कर दिया कि अमेरिका इस बार केवल चेतावनी देने के मूड में नहीं था। यह कार्रवाई “ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक” के तहत की गई, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर अंजाम दिया गया।
ऑपरेशन हॉकआई और बदले की पृष्ठभूमि
इस सैन्य अभियान की जड़ें 13 दिसंबर 2025 की उस घटना में हैं, जिसने अमेरिका को झकझोर दिया था। सीरिया के ऐतिहासिक शहर पलमायरा में एक ISIS आतंकवादी ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में आयोवा नेशनल गार्ड के दो जवान—एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार और विलियम नथानिएल हॉवर्ड—शहीद हो गए थे। इसके अलावा एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया की भी जान गई थी। यह घटना दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद पहली बार थी, जब सीरिया में अमेरिकी बलों को जानलेवा नुकसान उठाना पड़ा।
वीडियो फुटेज और सैन्य संदेश
सेंट्रल कमांड द्वारा साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को बेस से उड़ान भरते, लक्ष्य की पहचान करते और आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करते हुए देखा जा सकता है। यह फुटेज केवल सूचना देने के लिए नहीं, बल्कि आतंकियों और उनके समर्थकों को मनोवैज्ञानिक संदेश देने के लिए भी जारी किया गया। संदेश साफ है—अब कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं।
आतंकियों को खुली चेतावनी
सेंट्रल कमांड के बयान के शब्द बेहद कड़े थे। सेना ने साफ कहा कि अगर कोई अमेरिकी सैनिकों या नागरिकों को नुकसान पहुंचाएगा, तो उसे दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर खत्म किया जाएगा। यह बयान केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीति का संकेत है। अमेरिका यह जताना चाहता है कि वह रक्षात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका में है।
ऑपरेशन हॉकआई की शुरुआत और विस्तार
ऑपरेशन हॉकआई की औपचारिक शुरुआत 19 दिसंबर 2025 को हुई थी। पहले चरण में मध्य सीरिया के करीब 70 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस अभियान में अमेरिका अकेला नहीं है। जॉर्डन की सेना भी इसमें सक्रिय रूप से सहयोग कर रही है, जो यह दिखाता है कि क्षेत्रीय सहयोग अब आतंकवाद के खिलाफ पहले से ज्यादा मजबूत हो रहा है।
शनिवार के हवाई हमलों से ठीक एक दिन पहले सीरियाई सुरक्षा बलों ने ‘लेवेंट’ क्षेत्र में ISIS के एक प्रमुख सैन्य कमांडर की गिरफ्तारी का दावा किया था। इसे भी इस व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
सीरिया में अमेरिकी मौजूदगी का इतिहास
2010 के दशक के मध्य में जब ISIS ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, तब से ही अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में मौजूद है। उस दौर में आतंकवाद ने जिस तरह पूरी दुनिया को डराया था, उसने अमेरिका को यहां लंबे समय तक टिके रहने के लिए मजबूर किया। आज भी सैकड़ों अमेरिकी सैनिक सीरिया में तैनात हैं, जिनका उद्देश्य केवल मौजूदा खतरों से निपटना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी नए आतंकी संगठन को पनपने से रोकना है।