भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का आईपीओ दूसरे दिन भी निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह का केंद्र बना हुआ है। पहले दिन मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा अब तक 22 गुना से अधिक सब्सक्राइब हो चुका है। खास बात यह है कि गैर-संस्थागत निवेशकों ने इसमें असाधारण रुचि दिखाई है और उनका हिस्सा 57 गुना से ज्यादा भर गया है। अनौपचारिक बाजार में इस आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम 43 फीसदी के आसपास चल रहा है, जो लिस्टिंग के समय अच्छे मुनाफे के संकेत दे रहा है।
भारत कोकिंग कोल देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी है और कोल इंडिया की सहायक कंपनी के रूप में काम करती है। यह आईपीओ 9 जनवरी 2026 को खुला और 13 जनवरी 2026 तक निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगा। कंपनी का मूल्य निर्धारण 21 रुपये से 23 रुपये प्रति शेयर के बीच तय किया गया है और न्यूनतम 600 शेयरों की लॉट साइज रखी गई है।
पहले दिन से ही जबरदस्त सब्सक्रिप्शन
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ को पहले दिन से ही शानदार प्रतिक्रिया मिली। विभिन्न श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन की स्थिति देखें तो कुल मिलाकर यह 22.01 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। शेयरधारक आरक्षण हिस्सा 29.58 गुना, कर्मचारी आरक्षित 1.76 गुना, खुदरा निवेशक 19.79 गुना और गैर-संस्थागत निवेशकों का हिस्सा 57.92 गुना भर चुका है। हालांकि योग्य संस्थागत खरीदारों की तरफ से अभी केवल 0.45 गुना सब्सक्रिप्शन आया है, जो आने वाले दिनों में बढ़ने की उम्मीद है।
यह आंकड़े बताते हैं कि खुदरा और छोटे निवेशकों में इस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को लेकर काफी उत्साह है। पिछले कुछ समय में पीएसयू कंपनियों के आईपीओ में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ी है, खासकर जब कंपनी की बुनियादी मजबूती और स्थिर कमाई का रिकॉर्ड हो।
ग्रे मार्केट में शानदार प्रीमियम
अनौपचारिक बाजार में भारत कोकिंग कोल के शेयर जारी मूल्य से करीब 43 फीसदी के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम निवेशकों की धारणा का संकेत देता है और लिस्टिंग के समय संभावित मुनाफे का अंदाजा लगाने में मदद करता है। हालांकि यह आधिकारिक बाजार नहीं है, फिर भी यह निवेशकों के विश्वास और बाजार की मांग को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रीमियम बना रहता है तो निवेशकों को लिस्टिंग के दिन अच्छा मुनाफा मिल सकता है। लेकिन साथ ही यह भी याद रखना जरूरी है कि ग्रे मार्केट के संकेत हमेशा सटीक नहीं होते और बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
आवंटन और लिस्टिंग की तारीखें
शेयरों का आवंटन 14 जनवरी 2026 के आसपास तय होने की उम्मीद है। इसके बाद जिन निवेशकों को शेयर मिलेंगे, उनके डीमैट खातों में शेयर जमा किए जाएंगे और जिन्हें आवंटन नहीं मिलेगा, उनका पैसा वापस कर दिया जाएगा। लिस्टिंग की तारीख की घोषणा जल्द ही होने की संभावना है।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे आवंटन की स्थिति रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जाकर चेक करें। आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और लॉटरी के आधार पर होती है, खासकर जब किसी श्रेणी में ओवरसब्सक्रिप्शन हो।
विशेषज्ञों की राय क्या कहती है
आनंद राठी रिसर्च ने इस आईपीओ पर सब्सक्राइब की सिफारिश की है, खासकर लिस्टिंग लाभ के लिए। ब्रोकरेज ने कंपनी की बाजार में मजबूत स्थिति, बड़े कोयला भंडार और भारत के इस्पात क्षेत्र में रणनीतिक महत्व को उजागर किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऊपरी मूल्य बैंड पर वैल्यूएशन उचित लग रहा है और लंबी अवधि में इसकी री-रेटिंग की संभावना सीमित हो सकती है।
एसबीआई सिक्योरिटीज ने भी निवेशकों को कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, ऊपरी मूल्य बैंड 23 रुपये पर यह मुद्दा ईवी/ईबीआईटीडीए के आधार पर 6.4 गुना पर वैल्यूड है, जो उचित लगता है।
दूसरी तरफ, 129 वेल्थ फंड के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट प्रसेनजीत पॉल ने कहा कि यह आईपीओ उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त है जो लिस्टिंग पर मुनाफा कमाना चाहते हैं या स्थिरता आधारित निवेश की तलाश में हैं, न कि लंबी अवधि के लिए तेज विकास की उम्मीद रखने वालों के लिए।
कंपनी की मजबूत स्थिति
भारत कोकिंग कोल भारत की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी है। देश के कुल घरेलू उत्पादन का करीब 58.5 फीसदी हिस्सा इसी कंपनी से आता है। कंपनी के पास देश के कुल कोकिंग कोल संसाधनों का लगभग 21.5 फीसदी यानी 7.91 अरब टन का भंडार है। यह भारत में प्राइम कोकिंग कोल का एकमात्र स्रोत है, जो इस्पात उद्योग के लिए बेहद जरूरी है।
कंपनी 288.3 वर्ग किलोमीटर के कुल लीजहोल्ड क्षेत्र में काम करती है और झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों में 34 परिचालन खदानें चलाती है। इनमें 4 भूमिगत, 26 ओपनकास्ट और 4 मिश्रित खदानें शामिल हैं।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 से 2025 के दौरान कंपनी की राजस्व, ईबीआईटीडीए और शुद्ध लाभ में क्रमशः 4.6 फीसदी, 88.1 फीसदी और 36.6 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर रही है। यह आंकड़े कंपनी की बढ़ती लाभप्रदता को दर्शाते हैं।
भविष्य की योजनाएं
भारत कोकिंग कोल अपनी वॉशरी क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। कंपनी वर्तमान 13.65 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता को बढ़ाकर 20.65 मिलियन टन करना चाहती है। इसके लिए नई वॉशरी स्थापित की जाएंगी और मूनीडीह वॉशरी का उन्नयन करके इसकी क्षमता दोगुनी यानी 1.6 मिलियन टन प्रति वर्ष की जाएगी।
यह विस्तार योजना कंपनी की बढ़ती मांग को पूरा करने और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए जरूरी है। वॉशरी कोयले से राख की मात्रा कम करती हैं, जिससे इस्पात निर्माण में इसका उपयोग बेहतर होता है।
जोखिम के कारक
हर निवेश के साथ कुछ जोखिम भी होते हैं। भारत कोकिंग कोल के मामले में भी कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। कंपनी के कोयले में राख की मात्रा अधिक है, जिससे इस्पात उद्योग में इसका उपयोग सीमित हो सकता है। अगर आयातित कोकिंग कोल की कीमतें कम होती हैं तो मांग उधर शिफ्ट हो सकती है।
कंपनी खनन और संचालन के लिए तीसरे पक्ष के ठेकेदारों पर काफी निर्भर करती है। इससे लागत में उतार-चढ़ाव, परिचालन में बाधा, नियामक मुद्दे और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।
कोयला क्षेत्र चक्रीय प्रकृति का है और सरकारी नियमों तथा लागत दबावों के अधीन रहता है। हालांकि ये जोखिम काफी हद तक ज्ञात हैं और कीमतों में शामिल किए गए हैं, फिर भी निवेशकों को इन पर विचार करना चाहिए।
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में निवेश का अवसर
भारत कोकिंग कोल एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है और देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी कंपनियों को सरकारी समर्थन और स्थिर मांग का लाभ मिलता है। निवेशक इन कंपनियों को कम जोखिम वाला और भरोसेमंद मानते हैं।
हाल के समय में निवेशकों का रुझान ऐसे व्यवसायों की ओर बढ़ा है जिनमें स्थिर नकदी प्रवाह और मांग की स्पष्टता हो। भारत कोकिंग कोल इन मानकों पर खरी उतरती है। इस्पात उद्योग के लिए कोकिंग कोल की निरंतर जरूरत रहती है और घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी जाती है।
वैल्यूएशन के मामले में कंपनी का मूल्य निर्धारण कमाई के आधार पर उचित लगता है। यह पारंपरिक रूप से पीएसयू ऑफरिंग में खुदरा भागीदारी बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला लेना चाहिए। अगर आप लिस्टिंग पर त्वरित लाभ की तलाश में हैं तो ग्रे मार्केट का मौजूदा प्रीमियम अच्छे संकेत दे रहा है। लेकिन याद रखें कि लिस्टिंग लाभ की गारंटी नहीं होती और बाजार की स्थिति बदल सकती है।
लंबी अवधि के निवेशकों को कंपनी की बुनियादी मजबूती, कोयला क्षेत्र की संभावनाएं और सरकारी नीतियों को ध्यान में रखना चाहिए। कोल इंडिया के शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्से से आवंटन के अवसर बेहतर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय को गंभीरता से लें लेकिन अपना खुद का शोध भी जरूर करें। आईपीओ दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें और कंपनी के व्यवसाय मॉडल, वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं को समझें।
भारत कोकिंग कोल का यह आईपीओ निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति, बड़े भंडार और इस्पात उद्योग के लिए जरूरी होने से इसकी मांग बनी रहने की संभावना है। हालांकि जोखिम कारकों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अंतिम निर्णय निवेशकों की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है।