राजकोट के सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे वनडे मैच में भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल ने एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी का परिचय देते हुए शानदार शतक लगाया. राहुल के इस धुआंधार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट पर 284 रन बनाकर न्यूज़ीलैंड के सामने 285 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा है. यह शतक ऐसे समय आया जब भारत के शीर्ष क्रम के सभी दिग्गज बल्लेबाज सस्ते में पवेलियन लौट चुके थे और टीम मुश्किल में थी.
राहुल ने संभाली टीम की कमान
केएल राहुल ने अपनी पारी की शुरुआत बेहद सावधानी से की और धीरे-धीरे अपनी लय पकड़ते गए. उन्होंने कुल 92 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 112 रन की पारी खेली, जिसमें 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा. राहुल का यह शतक न सिर्फ उनकी क्लास को दर्शाता है बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में जिम्मेदारी उठाने की उनकी क्षमता को भी साबित करता है. जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी, राहुल ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.
शुरुआती झटकों से उबरना था चुनौती
भारतीय टीम की शुरुआत उतनी अच्छी नहीं रही जितनी उम्मीद थी. ओपनर रोहित शर्मा ने 24 रन बनाकर अपना विकेट गंवा दिया. हालांकि शुभमन गिल ने कप्तानी की जिम्मेदारी के साथ अच्छी बल्लेबाजी करते हुए 56 रन बनाए लेकिन वह भी लंबी पारी नहीं खेल सके. विराट कोहली भी केवल 23 रन बनाकर आउट हो गए, जो टीम के लिए एक बड़ा झटका था. मध्यक्रम के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर भी महज 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गए.
जडेजा का योगदान भी रहा महत्वपूर्ण
रवींद्र जडेजा ने भी राहुल के साथ मिलकर अच्छी साझेदारी की और 27 रन का योगदान दिया. हालांकि वह भी लंबा स्कोर नहीं बना सके, लेकिन उनकी साझेदारी ने भारत को संकट से बाहर निकालने में मदद की. निचले क्रम के बल्लेबाजों ने भी अपना योगदान देने की कोशिश की, लेकिन राहुल ही थे जो अंत तक डटे रहे और टीम को 285 रनों के करीब पहुंचाया.
न्यूज़ीलैंड की गेंदबाजी में चमके क्लार्क
न्यूज़ीलैंड की ओर से गेंदबाजी में क्रिस्टियन क्लार्क सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने तीन विकेट झटके. उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया और महत्वपूर्ण समय पर विकेट लेकर न्यूज़ीलैंड को वापसी का मौका दिया. काइल जेमीसन और अन्य गेंदबाजों ने भी अच्छी लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी की, लेकिन राहुल के सामने वे ज्यादा कारगर साबित नहीं हो सके.
राजकोट की पिच और मैच की स्थिति
राजकोट की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जा रही थी, लेकिन न्यूज़ीलैंड के गेंदबाजों ने शुरुआत में अच्छी गेंदबाजी करके भारतीय बल्लेबाजों को दबाव में रखा. हालांकि राहुल ने धैर्य के साथ खेलकर और सही समय पर शॉट खेलकर यह साबित किया कि अनुभवी बल्लेबाज किस तरह मुश्किल परिस्थितियों में भी अपनी टीम के लिए बड़ा स्कोर बना सकते हैं.
भारत की प्लेइंग इलेवन और रणनीति
भारतीय टीम में शुभमन गिल ने कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली, जबकि श्रेयस अय्यर उपकप्तान रहे. केएल राहुल ने विकेटकीपर की भूमिका निभाई. टीम में नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा जैसे युवा खिलाड़ियों को भी मौका दिया गया. गेंदबाजी में कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा की जिम्मेदारी थी कि वे न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाजों को रोक सकें.
न्यूज़ीलैंड की टीम और उनकी चुनौती
न्यूज़ीलैंड की टीम में डेवोन कॉनवे, हेनरी निकलस, विल यंग और डेरेल मिचेल जैसे अनुभवी बल्लेबाज हैं. माइकल ब्रेसवेल ने कप्तानी की, जबकि मिचेल हे ने विकेटकीपर की भूमिका निभाई. न्यूज़ीलैंड के सामने अब 285 रनों का लक्ष्य है, जो राजकोट की पिच पर संभव तो है लेकिन आसान नहीं होगा.
सीरीज में भारत की बढ़त
यह ध्यान देने योग्य है कि तीन वनडे मैचों की इस सीरीज में भारत पहले ही 1-0 से आगे चल रहा है. पहले वनडे मैच में भारत ने चार विकेट से शानदार जीत हासिल की थी. अब दूसरे मैच में भी भारत अच्छी स्थिति में नजर आ रहा है. अगर भारत यह मैच भी जीत जाता है तो सीरीज पर उसका कब्जा हो जाएगा और तीसरा मैच केवल औपचारिकता भर रह जाएगा.
राहुल का करियर और यह पारी
केएल राहुल ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. कभी टीम में नियमित जगह पाने के लिए संघर्ष करते नजर आए तो कभी चोटों ने उन्हें परेशान किया. लेकिन जब भी उन्हें मौका मिला है, उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. आज की यह पारी भी उनकी क्लास और संयम का बेहतरीन उदाहरण है. उन्होंने साबित किया कि वे टीम इंडिया के लिए कितने महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं.
आगे की चुनौती
अब गेंद भारतीय गेंदबाजों के हाथ में है. सिराज, कुलदीप यादव और अन्य गेंदबाजों को चाहिए कि वे शुरुआती विकेट लेकर न्यूज़ीलैंड पर दबाव बनाएं. 285 रनों का लक्ष्य बचाव योग्य है लेकिन इसके लिए अनुशासित गेंदबाजी और तेज फील्डिंग की जरूरत होगी. भारतीय टीम को चाहिए कि वह पहले मैच की तरह ही आक्रामक रणनीति अपनाए और सीरीज को अपने नाम कर ले.
केएल राहुल की यह पारी न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरी भारतीय टीम के लिए प्रेरणादायक रही. मुश्किल समय में जिम्मेदारी उठाना और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाना, यही तो किसी महान खिलाड़ी की पहचान होती है.