नागपुर महानगरपालिका की चुनावी तैयारियों के बीच दिव्यांग मतदाताओं के लिए एक अनूठी और सराहनीय पहल की गई है। गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को होने वाले सार्वत्रिक चुनाव में विकलांग नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महानगरपालिका प्रशासन ने व्हाट्सऐप आधारित वाहन सुविधा शुरू की है। यह पहल न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समावेशिता को बढ़ावा देती है, बल्कि तकनीक के सही इस्तेमाल का भी बेहतरीन उदाहरण है।
व्हाट्सऐप नंबर से मिलेगी सुविधा
महानगरपालिका आयुक्त एवं निर्वाचन अधिकारी डॉ. अभिजीत चौधरी के मार्गदर्शन में यह योजना लागू की गई है। अतिरिक्त आयुक्त श्रीमती वसुमना पंत के नेतृत्व में दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष व्हाट्सऐप नंबर 9175414355 जारी किया गया है। इस नंबर पर अपनी लोकेशन साझा करने मात्र से दिव्यांग मतदाताओं को उनके घर से मतदान केंद्र तक आने-जाने की निशुल्क सुविधा मिलेगी।
यह सुविधा बेहद सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल है। मतदाताओं को केवल अपने मोबाइल से व्हाट्सऐप खोलकर दिए गए नंबर पर अपनी वर्तमान स्थिति साझा करनी होगी। इसके बाद नजदीकी जोन से वाहन उनके घर पहुंचेगा और उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाएगा।
हर जोन में विशेष वाहन की व्यवस्था
नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र को विभिन्न जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में दिव्यांग मतदाताओं के लिए एक समर्पित वाहन की व्यवस्था की गई है। यह वाहन मतदान के दिन सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक सेवा में रहेंगे। जोनल चिकित्सा अधिकारियों की देखरेख में यह सेवा संचालित होगी, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी दिव्यांग मतदाता शारीरिक असुविधा के कारण अपने मताधिकार से वंचित न रहे। यह पहल विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती है या जो व्हीलचेयर का उपयोग करते हैं।
उच्च न्यायालय के आदेश का पालन
यह सुविधा माननीय उच्च न्यायालय, नागपुर खंडपीठ में दायर एक जनहित याचिका के आदेश के अनुपालन में शुरू की गई है। न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया में दिव्यांग नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। महानगरपालिका प्रशासन ने इन आदेशों का पूरी गंभीरता से पालन करते हुए यह व्यवस्था की है।
यह पहल यह दर्शाती है कि न्यायपालिका और प्रशासन मिलकर कैसे समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की भावना के अनुरूप यह कदम सराहनीय है।
केंद्रीय नियंत्रण कक्ष की स्थापना
दिव्यांग मतदाताओं की सहायता के लिए महानगरपालिका के केंद्रीय कार्यालय में एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यहां से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी और किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जाएगा। नियंत्रण कक्ष में विशेष प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात किए गए हैं जो दिव्यांग मतदाताओं की जरूरतों को समझते हैं।
व्हाट्सऐप पर लोकेशन साझा करने के अलावा, मतदाता सीधे कॉल करके भी अपनी आवश्यकता बता सकते हैं। प्रत्येक सूचना को प्राथमिकता के आधार पर संभाला जाएगा और जोन स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
लोकतंत्र में समावेशिता का संदेश
यह पहल केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह समावेशी लोकतंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दिव्यांग नागरिक समाज का अभिन्न अंग हैं और उनके मताधिकार की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। नागपुर महानगरपालिका ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।
पूरे देश में चुनाव आयोग और विभिन्न प्रशासनिक इकाइयां दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए विभिन्न कदम उठा रही हैं। रैंप की व्यवस्था, व्हीलचेयर की उपलब्धता, ब्रेल पर्चियां, और सहायक कर्मचारी जैसी सुविधाएं आम हो रही हैं। लेकिन घर से मतदान केंद्र तक वाहन की सुविधा देना एक अतिरिक्त और स्वागत योग्य कदम है।
तकनीक का सकारात्मक उपयोग
इस योजना में व्हाट्सऐप का इस्तेमाल बेहद व्यावहारिक है। आज लगभग हर स्मार्टफोन उपयोगकर्ता व्हाट्सऐप से परिचित है। लोकेशन साझा करना भी बेहद आसान प्रक्रिया है। यह तकनीक का सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग है जो नागरिक सेवाओं को सुलभ बनाता है।
डिजिटल इंडिया की पहल के तहत सरकारी सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। यह पहल भी उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
मतदाताओं से अपील
महानगरपालिका प्रशासन ने सभी दिव्यांग मतदाताओं से अपील की है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें। मतदान लोकतंत्र का आधार है और हर नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क है और किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। मतदाताओं को केवल अपना पहचान पत्र और मतदाता पर्ची साथ रखनी होगी।
आगे की संभावनाएं
नागपुर की यह पहल अन्य शहरों और महानगरपालिकाओं के लिए एक मॉडल बन सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में सभी चुनावों में इसे लागू किया जा सकता है। न केवल दिव्यांग मतदाताओं, बल्कि बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार मतदाताओं के लिए भी ऐसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
समावेशी विकास और समान अवसर की दिशा में यह पहल एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। जब प्रशासन संवेदनशील होकर काम करता है, तो नागरिकों का विश्वास बढ़ता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होती है।
नागपुर महानगरपालिका की यह पहल निश्चित रूप से प्रशंसनीय है और उम्मीद है कि अधिक से अधिक दिव्यांग मतदाता इसका लाभ उठाकर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।