Thane Municipal Election Result 2026: महाराष्ट्र की राजनीति की धड़कन माने जाने वाले ठाणे में आज सियासी तापमान अपने चरम पर है। ठाणे महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों के लिए मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने ही यह साफ कर दिया है कि यह मुकाबला केवल नगर निकाय का नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व और नेतृत्व की साख का है। 15 जनवरी को हुए मतदान के बाद 16 जनवरी की सुबह 10 बजे से वोटों की गिनती शुरू हुई और शुरुआती आंकड़ों में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी बढ़त बनाती नजर आ रही हैं।
ठाणे को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का ‘होम ग्राउंड’ माना जाता है। ऐसे में यह चुनाव उनके लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। शिवसेना में हुई ऐतिहासिक टूट के बाद यह पहला नगर निकाय चुनाव है, जहां शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) आमने-सामने हैं। यही वजह है कि ठाणे के नतीजों को पूरे महाराष्ट्र की राजनीति का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।
ठाणे चुनाव क्यों है इतना अहम
ठाणे महानगरपालिका केवल एक शहरी निकाय नहीं है, बल्कि यह सत्ता, संगठन और जनाधार की असली तस्वीर दिखाने वाला मंच है। पिछले कई वर्षों तक इस नगर निगम पर शिवसेना का वर्चस्व रहा है। अब सवाल यह है कि शिवसेना की विरासत पर असली हकदार कौन है—शिंदे गुट या उद्धव ठाकरे गुट।
इस चुनाव में भाजपा भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है। पार्टी का लक्ष्य न केवल शिंदे गुट के साथ सत्ता बनाए रखना है, बल्कि अपने दम पर भी बड़ी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराना है। खासकर मुंब्रा-कलवा बेल्ट में भाजपा और एनसीपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
शुरुआती रुझानों ने बढ़ाया सियासी रोमांच
शुरुआती रुझानों के मुताबिक, ठाणे और नवी मुंबई क्षेत्र में शिंदे गुट की शिवसेना और भाजपा कांटे की टक्कर में आगे चल रही हैं। नवी मुंबई में दोनों दल 27-27 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि उद्धव ठाकरे गुट केवल एक सीट पर आगे नजर आ रहा है। यह आंकड़ा यूबीटी खेमे के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
टीवी रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र में शिंदे गुट की शिवसेना लगभग 20 सीटों पर आगे है, जबकि भाजपा 15 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अजित पवार गुट की एनसीपी 4 सीटों पर, शरद पवार गुट 3 सीटों पर और कांग्रेस 2 सीटों पर आगे चल रही है। ये आंकड़े भले ही शुरुआती हों, लेकिन रुझान साफ संकेत दे रहे हैं।
शिंदे बनाम उद्धव: असली मुकाबला
इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच सीधा सियासी संघर्ष है। शिंदे गुट यह साबित करना चाहता है कि असली शिवसेना वही है, जिसके साथ सत्ता और संगठन दोनों खड़े हैं। वहीं उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव अपने बचे हुए जनाधार को बचाने की लड़ाई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ठाणे में शिंदे गुट मजबूत जीत दर्ज करता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका होगा। दूसरी ओर, यदि यूबीटी अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करती है, तो यह संदेश जाएगा कि शिवसेना की पारंपरिक वोट बैंक अभी पूरी तरह टूटी नहीं है।
भाजपा की रणनीति और एनसीपी की भूमिका
भाजपा इस चुनाव में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में नजर आ रही है। पार्टी की कोशिश है कि शिंदे गुट के साथ गठबंधन में रहते हुए भी अपनी स्वतंत्र ताकत दिखाए। वहीं एनसीपी के दोनों गुटों—अजित पवार और शरद पवार—के लिए यह चुनाव अपने-अपने प्रभाव क्षेत्रों को बचाने का मौका है।
मुंब्रा-कलवा जैसे इलाकों में एनसीपी का प्रदर्शन यह तय करेगा कि भविष्य में स्थानीय राजनीति किस दिशा में जाएगी। कांग्रेस भले ही सीटों के लिहाज से पीछे हो, लेकिन उसका प्रदर्शन विपक्षी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।