जरूर पढ़ें

बिहार में स्थापित हुआ विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग, हर-हर महादेव से गूंजा मंदिर परिसर

बिहार में स्थापित हुआ विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग
बिहार में स्थापित हुआ विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग (Source- X @_Vinay_pandit_)
बिहार के केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे विशाल 33 फीट ऊंचे शिवलिंग की भव्य प्राण प्रतिष्ठा हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में संपन्न यह आयोजन आस्था, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन के लिए बिहार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बना।
Updated:

World Largest Shivling: पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में वह क्षण साकार हुआ, जिसका इंतजार श्रद्धालु लंबे समय से कर रहे थे। यहां विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिक श्रद्धा का जीवंत उदाहरण बन गया। जैसे ही मंत्रोच्चार गूंजा और शिवलिंग को उसके निर्धारित स्थान पर स्थापित किया गया, पूरा परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया। राज्य के लिए यह क्षण गर्व और पहचान का प्रतीक बन गया।

तमिलनाडु से बिहार तक की कठिन यात्रा

यह शिवलिंग केवल अपनी ऊंचाई या वजन के कारण खास नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपी यात्रा और मेहनत भी इसे ऐतिहासिक बनाती है। 33 फीट ऊंचा और लगभग 210 टन वजनी यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया। वहां के कारीगरों ने महीनों की मेहनत से इसे आकार दिया।

इसके बाद इस विशालकाय शिवलिंग को बिहार तक लाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। विशेष रूप से तैयार किए गए 96 पहियों वाले वाहन से इसे कई राज्यों से होकर लाया गया। हर पड़ाव पर लोगों ने इसे देखने के लिए सड़क किनारे भीड़ लगा दी। यह यात्रा मानो एक चलती-फिरती तीर्थयात्रा बन गई थी।

दो महाक्रेन की मदद से हुई स्थापना

शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 700 टन और 500 टन क्षमता वाली दो विशाल क्रेन मंगवाई गई थीं। सुरक्षा और संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं की निगाहें इस पल पर टिकी थीं कि कब शिवलिंग अपने स्थान पर स्थापित होगा। जैसे ही क्रेन की मदद से शिवलिंग को धीरे-धीरे रखा गया, लोगों की आंखों में श्रद्धा और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।

श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचने लगे थे। भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया। ऐसा लग रहा था मानो समय थम गया हो और हर व्यक्ति इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनना चाहता हो।

स्थानीय प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा। पानी, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा और मार्गदर्शन के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस और स्वयंसेवकों की तैनाती से व्यवस्था सुचारु बनी रही।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर कहा कि यह शिवलिंग केवल पत्थर का आकार नहीं है, बल्कि यह आस्था, विश्वास और भारतीय संस्कृति की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विराट रामायण मंदिर आने वाले समय में न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रतिक्रिया

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वीडियो संदेश जारी कर इस उपलब्धि पर प्रसन्नता और गर्व जताया। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग की स्थापना भारत की आध्यात्मिक परंपरा और सामूहिक संकल्प की शक्ति को दर्शाती है। यह केवल एक धार्मिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने विशेष रूप से बिहार की जनता को बधाई देते हुए कहा कि इससे राज्य की आध्यात्मिक पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी।

बिहार के लिए क्या मायने रखता है यह आयोजन

विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित यह विशाल शिवलिंग बिहार के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दे सकता है। इससे स्थानीय रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश के पर्यटक भी यहां आ सकते हैं।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
).push({});

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।