चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय 11वें इंडिया इंटरनेशनल डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल-2026 का शानदार आगाज हो गया है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का सांस्कृतिक आयोजन इंडियन काउंसल फॉर कल्चरल रिलेशंस के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस फेस्टिवल का मुख्य विषय “एक दुनिया, अनेक संस्कृतियां” रखा गया है, जो अलग-अलग देशों की कला, संगीत और नृत्य के माध्यम से एकता का संदेश देता है।
इस भव्य आयोजन में दुनिया के 33 देशों से आए 350 से अधिक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। ये कलाकार अपने-अपने देश की लोक कला, पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक विविधता को जीवंत बना रहे हैं। यह आयोजन न केवल कला का उत्सव है, बल्कि यह अलग-अलग देशों के बीच आपसी समझ और दोस्ती को भी मजबूत करता है।
कला और संस्कृति से जुड़ती है दुनिया
फेस्टिवल के उद्घाटन अवसर पर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर और राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कला और संस्कृति किसी भी देश को पूरी दुनिया से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम होती है। हर देश की पहचान उसकी संस्कृति से होती है और जब कलाकार एक मंच पर आकर प्रस्तुति देते हैं, तो यह आपसी रिश्तों को और गहरा बनाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से भारत आज वैश्विक स्तर पर एक बड़ा सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र बनकर उभरा है। वर्ष 2014 के बाद भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही अब भारत को शिक्षा के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
शिक्षा और संस्कृति का संगम बनती चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
सतनाम सिंह संधू ने बताया कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में वर्तमान समय में 65 देशों से करीब 3000 विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत और खासकर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को अब शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी हमेशा इस सोच के साथ आगे बढ़ती है कि भारत एक विश्व शक्ति बने और इसमें कला व संस्कृति की भूमिका सबसे अहम है।
उनका कहना था कि कला ऐसी भाषा है जिसे बिना बोले भी समझा जा सकता है। यही वजह है कि कला और संस्कृति के जरिए भारत आज कई देशों के साथ मजबूत रिश्ते बना पा रहा है।
पहले दिन की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
फेस्टिवल के पहले दिन की शुरुआत लक्ष्मीनारायण ग्लोबल म्यूजिक फेस्टिवल ग्रुप की भव्य प्रस्तुति से हुई। इस ग्रुप में करीब 80 कलाकार शामिल थे, जिनका नेतृत्व डॉ. एल. सुब्रमण्यम और कविता कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने किया। इस प्रस्तुति में कजाकिस्तान के अस्ताना फिलहारमोनिक सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा, अक्टोबे रीजनल फिलहारमोनिक के चैंबर क्वायर और डांस ग्रुप गक्कूश ने साथ मिलकर मंच साझा किया।
गक्कूश डांस ग्रुप ने अपनी तेज और सशक्त प्रस्तुति के जरिए कजाकिस्तान के इतिहास, घुड़सवारों की बहादुरी और खुले मैदानों की झलक दिखाई। दर्शकों ने इस प्रस्तुति को खूब सराहा।
इसके बाद किर्गिस्तान से आए लोक-कथा दल आलम और नृत्य समूह अदेमी ने अपनी पारंपरिक नृत्य शैली से वहां की संस्कृति को जीवंत किया। उनकी प्रस्तुति में ऊर्जा और लोक रंग साफ दिखाई दिया।
भक्ति, लोक और परंपरा का अनोखा मेल
मलेशिया की सूत्र फाउंडेशन की 17 सदस्यीय टीम ने “राधे-राधे द स्वीट सरेंडर” पर आधारित प्रस्तुति दी। यह नृत्य भारतीय भक्ति परंपरा से प्रेरित था, जिसमें राधा और कृष्ण के प्रेम और भक्ति को दर्शाया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
इसके अलावा पंजाब के पारंपरिक लोक नृत्य लूडी की प्रस्तुति चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दी, जिसने माहौल को और रंगीन बना दिया। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, सूडान, तंजानिया, केन्या, घाना, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार सहित कई अन्य देशों के कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश
यह अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल साफ तौर पर यह दिखाता है कि चाहे देश अलग हों, भाषाएं अलग हों, लेकिन कला और संस्कृति सभी को एक सूत्र में बांधने का काम करती है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का यह आयोजन आने वाले समय में भारत की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा।