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सिल्वर ईटीएफ की कीमतों में 20 फीसदी की गिरावट, निवेशकों को लगा बड़ा झटका

Silver ETF Prices Crash: भारतीय सिल्वर ईटीएफ में 20 फीसदी की भारी गिरावट, जानिए क्या है कारण
Silver ETF Prices Crash: भारतीय सिल्वर ईटीएफ में 20 फीसदी की भारी गिरावट, जानिए क्या है कारण (File Photo)
भारतीय सिल्वर ईटीएफ में गुरुवार को 20 फीसदी तक की भारी गिरावट आई। निप्पॉन, आईसीआईसीआई और कोटक के फंड्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता में सुधार, मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव में कमी प्रमुख कारण रहे। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार से कहीं अधिक तीव्र रही, जो भारतीय ईटीएफ में अत्यधिक अस्थिरता दर्शाती है।
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भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए गुरुवार का दिन बेहद चौंकाने वाला रहा। देश के प्रमुख सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ की कीमतों में एक ही दिन में करीब 20 फीसदी तक की भारी गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट इतनी तेज थी कि निवेशकों के होश उड़ गए। जो लोग चांदी में निवेश करके मुनाफा कमाने की सोच रहे थे, उन्हें अचानक बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।

निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ और कोटक सिल्वर ईटीएफ जैसे बड़े फंड्स में यह गिरावट दर्ज की गई। इन फंड्स ने पिछले कुछ समय में बेहतरीन रिटर्न दिया था और रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। लेकिन गुरुवार को अचानक स्थिति पूरी तरह पलट गई।

क्या है सिल्वर ईटीएफ और कैसे काम करता है

सिल्वर ईटीएफ एक ऐसा निवेश माध्यम है जिसमें लोग शेयर बाजार के जरिए चांदी में निवेश कर सकते हैं। इसमें असल में चांदी खरीदने की जरूरत नहीं होती। निवेशक सीधे शेयर बाजार में इन फंड्स की यूनिट खरीद सकते हैं। इन यूनिट्स की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों के हिसाब से बदलती रहती है।

यह तरीका उन लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक है जो चांदी में निवेश तो करना चाहते हैं लेकिन भौतिक रूप से चांदी रखने की परेशानी नहीं उठाना चाहते। इसमें स्टोरेज की चिंता नहीं होती और कभी भी बेचना-खरीदना आसान होता है।

अचानक क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

विशेषज्ञों के मुताबिक इस भारी गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं में निवेश की मांग कम हो जाती है। दुनियाभर के निवेशक डॉलर में निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानने लगते हैं।

दूसरा बड़ा कारण है वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की भूख में सुधार। पिछले कुछ समय से दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से लोग सुरक्षित निवेश की तरफ भाग रहे थे। चांदी और सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन जब स्थिति में सुधार के संकेत मिले तो निवेशकों ने इन सुरक्षित निवेशों से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

मुनाफावसूली का भी रहा असर

तीसरा कारण मुनाफावसूली है। पिछले कुछ महीनों में सिल्वर ईटीएफ ने शानदार रिटर्न दिया था। कई फंड्स ने मल्टीबैगर रिटर्न दिया यानी निवेशकों का पैसा कई गुना बढ़ गया था। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने अपना मुनाफा निकालने का फैसला किया। जब एक साथ बड़ी संख्या में लोग बेचने लगे तो कीमतें तेजी से गिरने लगीं।

भू-राजनीतिक तनाव में कमी भी एक कारण बनी। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है तो लोग जोखिम भरे निवेश में पैसा लगाने से नहीं डरते। ऐसे में सुरक्षित माने जाने वाले सोने-चांदी से पैसा निकलकर शेयर बाजार जैसी जगहों पर चला जाता है।

ग्लोबल मार्केट से ज्यादा गिरावट क्यों

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय सिल्वर ईटीएफ में गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार और एमसीएक्स फ्यूचर्स की तुलना में कहीं ज्यादा रही। वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमतों में गिरावट तो हुई लेकिन 20 फीसदी जैसी तीव्र गिरावट नहीं देखी गई। यह भारतीय ईटीएफ में अत्यधिक अस्थिरता को दिखाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ईटीएफ में प्रीमियम बहुत ज्यादा बढ़ गया था। यानी इनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में काफी ऊंची हो गई थी। गुरुवार की गिरावट ने इस प्रीमियम को खत्म कर दिया और कीमतें फिर से सामान्य स्तर पर आ गईं।

निवेशकों के लिए क्या संदेश

यह घटना निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। किसी भी निवेश में अत्यधिक उछाल के बाद सुधार आना स्वाभाविक है। जो लोग रिकॉर्ड ऊंचाई पर खरीदारी करते हैं, उन्हें ऐसे झटके झेलने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञ हमेशा कहते हैं कि निवेश विविधता के साथ करना चाहिए। सारा पैसा एक ही जगह लगाना जोखिम भरा होता है।

सिल्वर ईटीएफ में निवेश करने वालों को यह समझना जरूरी है कि कीमती धातुओं की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती हैं। डॉलर की मजबूती, वैश्विक आर्थिक स्थिति, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियां इन पर सीधा असर डालती हैं।

आगे क्या हो सकता है

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अभी कुछ समय तक चांदी में अस्थिरता बनी रह सकती है। जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन जो लोग तुरंत मुनाफा चाहते हैं, उनके लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका हो सकती है। जब कीमतें काफी नीचे आ जाती हैं तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एंट्री का अच्छा पॉइंट बन जाता है। लेकिन यह फैसला सावधानी से लेना चाहिए।

निष्कर्ष यह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। निवेशकों को भावनाओं में बहकर फैसले नहीं लेने चाहिए। सही जानकारी, विशेषज्ञ सलाह और धैर्य के साथ निवेश करना ही सफलता की कुंजी है।


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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।