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कांग्रेस सांसद प्रतिभा धनोरकर का नागपुर दौरा, गुट पंजीकरण से चंद्रपुर में बढ़ी राजनीतिक हलचल

Congress Chandrapur: प्रतिभा धनोरकर का नागपुर दौरा, गुट पंजीकरण से बढ़ी खींचतान
Congress Chandrapur: प्रतिभा धनोरकर का नागपुर दौरा, गुट पंजीकरण से बढ़ी खींचतान (FB Photo)
कांग्रेस सांसद प्रतिभा धनोरकर ने नागपुर में गुट पंजीकरण कराया, जिससे चंद्रपुर कांग्रेस में आंतरिक मतभेद सामने आ गए हैं। विजय वडेट्टीवार के महापौर पद पर सहमति वाले बयान के अगले दिन धनोरकर का यह कदम पार्टी में गुटबाजी को दर्शाता है। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल पर सभी पक्षों को साथ लाने की जिम्मेदारी है।
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चंद्रपुर की स्थानीय राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कांग्रेस सांसद प्रतिभा धनोरकर का नागपुर दौरा और गुट पंजीकरण की कार्रवाई ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को सतह पर ला दिया है। यह घटनाक्रम चंद्रपुर महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान का नतीजा माना जा रहा है।

शुक्रवार को कांग्रेस सांसद प्रतिभा धनोरकर अपने समर्थक नगरसेवकों के साथ नागपुर पहुंचीं। उनका यह दौरा चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस गुट के पंजीकरण के लिए था। दोपहर के समय वे नागपुर स्थित संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने आधिकारिक प्रक्रिया शुरू की। यह कार्य शाम तक चलता रहा। इस दौरान सांसद धनोरकर ने संभागीय आयुक्त विजयालक्ष्मी बिदरी से मुलाकात की और जरूरी कागजात व औपचारिकताओं को पूरा किया।

चंद्रपुर कांग्रेस में बढ़ता तनाव

चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत है। पार्टी के पास पर्याप्त संख्या में नगरसेवक हैं, जो महापौर पद पर दावा करने के लिए काफी हैं। लेकिन इसी ताकत के बीच पार्टी के अंदर दो गुटों की खींचतान सामने आ गई है। एक तरफ सांसद प्रतिभा धनोरकर का समूह है, तो दूसरी तरफ अन्य स्थानीय नेताओं का गुट।

इस स्थिति को देखते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक विजय वडेट्टीवार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि चंद्रपुर महानगरपालिका में अगले पांच सालों तक कांग्रेस का ही महापौर रहेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि सभी पक्षों को संतुष्ट करने वाला फैसला प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल लेंगे। यह बयान उन्होंने सपकाल से बातचीत के बाद दिया था, जिससे लगा कि पार्टी के अंदर सहमति बन रही है।

धनोरकर के कदम से बदली तस्वीर

लेकिन विजय वडेट्टीवार के बयान के अगले ही दिन सांसद प्रतिभा धनोरकर ने गुट पंजीकरण के लिए नागपुर जाने का फैसला कर लिया। जिस दिन वे नागपुर में गुट पंजीकरण करा रही थीं, उसी दिन विजय वडेट्टीवार चंद्रपुर में मौजूद थे। यह घटनाक्रम साफ दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर एकता की बात सिर्फ कागजों तक सीमित है।

धनोरकर का यह कदम एक स्पष्ट संदेश देता है कि वे अपने समर्थकों के साथ अलग रास्ता अपनाने के लिए तैयार हैं। गुट पंजीकरण की इस कार्रवाई से पार्टी की आंतरिक राजनीति और जटिल हो गई है। अब यह देखना होगा कि प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल इस स्थिति को कैसे संभालते हैं।

महापौर पद की होड़

चंद्रपुर महानगरपालिका में महापौर पद एक अहम पद है। यह पद न सिर्फ प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी इसका बड़ा महत्व है। कांग्रेस के पास पर्याप्त नगरसेवक हैं, इसलिए पार्टी के लिए यह सुनहरा मौका है कि वह महापौर पद पर अपनी पकड़ बनाए। लेकिन आंतरिक मतभेदों के कारण यह मौका खतरे में दिख रहा है।

अगर कांग्रेस अपने अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने में नाकाम रहती है, तो विपक्षी दल इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह जल्द से जल्द सभी पक्षों को साथ लेकर एक ठोस रणनीति बनाए।

गुटबाजी के संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस में गुटबाजी की यह स्थिति नई नहीं है। महाराष्ट्र में कांग्रेस कई बार आंतरिक विवादों के कारण नुकसान उठा चुकी है। चंद्रपुर में भी यही स्थिति बनती दिख रही है। स्थानीय नेताओं और सांसदों के बीच सत्ता की होड़ पार्टी के लिए चुनौती बन गई है।

प्रतिभा धनोरकर एक प्रभावशाली नेता हैं और उनका जनाधार भी मजबूत है। वे चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और स्थानीय राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ है। इसलिए वे महानगरपालिका में अपने समर्थकों को आगे बढ़ाना चाहती हैं। दूसरी ओर, अन्य स्थानीय नेता भी अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहते हैं।

पार्टी नेतृत्व की भूमिका

इस पूरे मामले में महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना होगा। विजय वडेट्टीवार ने भी यही संकेत दिया था कि सपकाल ही इस विवाद का समाधान निकालेंगे। लेकिन धनोरकर के अलग कदम उठाने से साफ है कि मामला आसान नहीं है।

पार्टी नेतृत्व को अब तुरंत बैठक बुलाकर सभी पक्षों से बातचीत करनी होगी। अगर समय रहते इस मसले का हल नहीं निकाला गया, तो कांग्रेस के लिए चंद्रपुर में अपनी स्थिति मजबूत करना मुश्किल हो सकता है।

आगे की राह

चंद्रपुर की राजनीति अब एक नाजुक मोड़ पर है। कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाते हुए महानगरपालिका में अपनी सरकार बनाए। गुट पंजीकरण की यह कार्रवाई एक संकेत है कि पार्टी के अंदर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।

अगले कुछ दिनों में यह तय होगा कि कांग्रेस किस दिशा में जाती है। क्या पार्टी अपने नेताओं के बीच समझौता करा पाएगी या फिर यह गुटबाजी और गहरी होगी, यह देखना दिलचस्प होगा। चंद्रपुर की जनता भी इस राजनीतिक खेल को ध्यान से देख रही है।

फिलहाल प्रतिभा धनोरकर का नागपुर दौरा और गुट पंजीकरण की कार्रवाई ने चंद्रपुर की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस चुनौती का कैसे सामना करता है और क्या पार्टी अपनी एकता बनाए रखते हुए महापौर पद हासिल कर पाती है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।