Homeguard Uniform Scam: उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे किसी भी स्तर पर हो, उस पर कार्रवाई तय है। होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में सामने आए वर्दी सामग्री खरीद घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान होमगार्ड जवानों के लिए खरीदी गई वर्दी सामग्री से जुड़ा है। शुरुआती जांच में टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, जिनमें नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
वर्दी खरीद प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी
होमगार्ड्स के लिए वर्दी सामग्री की खरीद एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है, जिसमें गुणवत्ता, कीमत और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाता है। लेकिन इस मामले में टेंडर प्रक्रिया को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे चिंता बढ़ाने वाले हैं। महानिदेशक, होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा, देहरादून की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि खरीद प्रक्रिया में न तो पूरी पारदर्शिता बरती गई और न ही तय मानकों का सही तरीके से पालन हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने, कीमतों में असमानता और प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। यही वजह रही कि मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचते ही तुरंत कार्रवाई की गई।
महानिदेशक की रिपोर्ट के बाद हुआ फैसला
महानिदेशक होमगार्ड्स की संतुति पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिना देरी किए डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव को निलंबित करने का आदेश जारी किया। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि सरकार अब केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ठोस कार्रवाई के जरिए सिस्टम में सुधार करना चाहती है।
क्या है इस घोटाले का बैकग्राउंड
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में विभागीय खरीद प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। खासकर वर्दी, उपकरण और निर्माण से जुड़े मामलों में कई बार शिकायतें सामने आईं। होमगार्ड विभाग में भी लंबे समय से यह चर्चा रही है कि बड़ी संख्या में जवानों के लिए की जाने वाली खरीद में निगरानी कमजोर रहती है।
वर्दी जैसी जरूरी सामग्री सीधे जवानों की कार्यक्षमता और सम्मान से जुड़ी होती है। ऐसे में अगर इसमें गुणवत्ता या कीमत के साथ समझौता किया जाए, तो उसका असर केवल कागजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मैदान में काम कर रहे होमगार्ड जवानों पर भी पड़ता है।
संयुक्त जांच समिति से उम्मीदें
सरकार द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह पूरे मामले की परत-दर-परत जांच करेगी। टेंडर प्रक्रिया से लेकर भुगतान और सामग्री आपूर्ति तक हर पहलू की जांच होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितता सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही थी या इसके पीछे सुनियोजित भ्रष्टाचार शामिल था।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई के साथ एक स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर पूरी मजबूती से काम कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को पद या प्रभाव के आधार पर बख्शा नहीं जाएगा।
सीएम धामी का यह रुख उन ईमानदार अधिकारियों के लिए भी भरोसे का संकेत है, जो व्यवस्था में पारदर्शिता चाहते हैं, वहीं गड़बड़ी करने वालों के लिए यह चेतावनी भी है।
फिलहाल जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि इस घोटाले में और कौन-कौन जिम्मेदार हैं और किस स्तर तक कार्रवाई की जाएगी। राज्य की जनता की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।