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चारधाम यात्रा का इंतजार खत्म! इस दिन खुलेंगे बद्रीनाथ व अन्य मंदिरों के कपाट

बद्रीनाथ धाम
बद्रीनाथ धाम (Source- X @varshaparmar06)
उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। बसंत पंचमी पर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही चारधाम यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं।
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Char Dham Yatra: चारधाम यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे देशभर के श्रद्धालुओं के लिए यह खबर किसी शुभ संकेत से कम नहीं है। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित भगवान बद्री विशाल के धाम, बद्रीनाथ मंदिर के कपाट इस वर्ष 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। छह महीने की लंबी शीतकालीन बंदी के बाद जैसे ही कपाट खुलने की तिथि की घोषणा हुई, तीर्थयात्रियों में उत्साह और आस्था का नया संचार देखने को मिला।

बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर परंपरागत धार्मिक विधि-विधान और पंचांग गणना के बाद यह फैसला लिया गया। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने शुक्रवार को इसकी औपचारिक घोषणा की।

सुबह 6:15 बजे खुलेंगे कपाट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि कपाट खुलने की तिथि और समय का निर्धारण टिहरी के नरेंद्र नगर स्थित राजमहल में आयोजित पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान किया गया। पंचांग के सूक्ष्म अध्ययन और ज्योतिषीय गणना के बाद यह तय हुआ कि 23 अप्रैल की सुबह ठीक 6:15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया, जिससे निर्णय को आध्यात्मिक मान्यता मिली।

राजमहल में हुआ पारंपरिक अनुष्ठान

कपाट खुलने की तिथि घोषित करने के इस ऐतिहासिक धार्मिक समारोह में टिहरी राजपरिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में टिहरी के महाराजा मनुजेंद्र शाह, राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल, बद्रीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदिरी, मंदिर समिति के अधिकारी और बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित मौजूद रहे।

इसके साथ ही टिहरी गढ़वाल से लोकसभा सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह और राजपरिवार की महारानी भी इस शुभ अवसर की साक्षी बनीं। महाराजा की कुंडली और पंचांग के आधार पर शुभ मुहूर्त तय किया गया, जो सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है।

छह महीने की शीतकालीन बंदी के बाद खुलेंगे द्वार

हर वर्ष सर्दियों में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भगवान बद्री विशाल की पूजा शीतकालीन प्रवास स्थल जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में की जाती है। अप्रैल में मौसम अनुकूल होते ही कपाट पुनः खोले जाते हैं, जिससे हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में फिर से धार्मिक गतिविधियां शुरू होती हैं।

चारधाम यात्रा की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियों ने भी गति पकड़ ली है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन यात्रा मार्गों की मरम्मत, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल, बिजली और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुट गए हैं।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की कोशिश कर रहा है। यात्रा मार्गों पर मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और राहत दल तैनात किए जाने की योजना भी तैयार की जा रही है।

अन्य धामों की तिथियां भी लगभग तय

चारधाम यात्रा के अंतर्गत आने वाले अन्य प्रमुख धामों की तिथियां भी धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के दिन, यानी 19 अप्रैल को खोले जाएंगे।

वहीं रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के अवसर पर घोषित की जाएगी। केदारनाथ यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक क्षण

बद्रीनाथ धाम सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। कपाट खुलने की खबर सुनते ही लोग अपनी यात्रा योजनाएं बनाने लगते हैं। कई श्रद्धालु इसे जीवन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक यात्रा मानते हैं।

हर साल की तरह इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुंचेंगे और हिमालय की गोद में स्थित इस दिव्य स्थल की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करेंगे।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।