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आदिवासी और हिन्दू समाज अलग नहीं, एक ही भारत माता की संतान हैं – मोहन भागवत

Mohan Bhagwat Ranchi Visit: आदिवासी और हिन्दू समाज एक हैं, डीबडीह में जनजातीय संवाद कार्यक्रम
Mohan Bhagwat Ranchi Visit: आदिवासी और हिन्दू समाज एक हैं, डीबडीह में जनजातीय संवाद कार्यक्रम (File Photo)
रांची के डीबडीह में आयोजित जनजातीय संवाद कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आदिवासी और हिन्दू समाज अलग नहीं हैं। झारखंड के 32 जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में समाज की एकता, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर दिया गया।
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Mohan Bhagwat Ranchi Visit: रांची के डीबडीह इलाके में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने शिरकत की। यह कार्यक्रम जनजातीय समाज के साथ संवाद के लिए खास तौर पर रखा गया था। झारखंड के अलग-अलग जिलों से आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और सम्मानित लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मोहन भागवत जी ने भारत माता के चित्र पर फूल चढ़ाकर और दीप जलाकर की। इस मौके पर राज्य के 32 जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि और समाज से जुड़े लोग मौजूद रहे। यह संवाद कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम का आयोजन और उद्देश्य

डीबडीह में हुए इस जनजातीय संवाद कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज और बाकी समाज के बीच आपसी समझ को बढ़ाना था। तुका उरांव ने कार्यक्रम का औपचारिक परिचय दिया और उपस्थित लोगों का स्वागत किया। पहले सत्र का संचालन मोहन कच्छप ने किया जिसमें भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का बयान पढ़कर सुनाया गया।

आदिवासी समाज का सम्मान और योगदान

मोहन भागवत जी ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज की महानता और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान की बात की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज हमारे देश की रीढ़ है और हमारी सभ्यता के मूल में आदिवासी परंपराएं हैं। भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान नायकों ने देश की आजादी और समाज सुधार में अहम भूमिका निभाई।

संघ प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज और हिन्दू समाज अलग नहीं हैं। दोनों एक ही भारत माता की संतान हैं। देश की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं में आदिवासी समाज का खास स्थान है। उन्होंने बताया कि वनों की रक्षा, प्रकृति का संरक्षण और सरल जीवन जीने की कला आदिवासी समाज से ही सीखी जा सकती है।

झारखंड के आदिवासी समुदायों की भागीदारी

इस कार्यक्रम में झारखंड के 32 जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें मुंडा, उरांव, संथाल, हो, खड़िया, बिरहोर, असुर और कई अन्य समुदाय के लोग थे। सभी ने अपनी-अपनी परंपराओं, संस्कृति और समस्याओं के बारे में खुलकर बातचीत की। यह संवाद का एक सुंदर मंच बना जहां हर समुदाय को अपनी बात रखने का मौका मिला।

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का महत्व

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर यह कार्यक्रम और भी खास बन गया। बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज को संगठित किया और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने समाज में सुधार की मुहिम चलाई और लोगों को जागरूक किया। आज भी झारखंड में बिरसा मुंडा को भगवान की तरह पूजा जाता है।

दत्तात्रेय होसबाले जी के बयान में बिरसा मुंडा के योगदान को याद किया गया और बताया गया कि कैसे उन्होंने अपने समाज को एकजुट किया। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

समाज को एकजुट करने का संदेश

डॉ. मोहन भागवत जी ने अपने संबोधन में समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज को बांटने की कोशिश करते हैं लेकिन हमें इन प्रयासों को नाकाम करना होगा। आदिवासी समाज भारतीय समाज का अभिन्न अंग है और हमारी विविधता में एकता का सबसे बड़ा उदाहरण है।

उन्होंने झारखंड के लोगों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को संभालकर रखें लेकिन साथ ही विकास के रास्ते पर भी चलें। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में आदिवासी युवाओं को आगे बढ़ना चाहिए।

संवाद के दोनों सत्रों की विशेषताएं

पहले सत्र में बिरसा मुंडा की विरासत और आदिवासी समाज की महानता पर चर्चा हुई। दूसरे सत्र में वर्तमान समय की चुनौतियों और समाधान पर बातचीत की गई। समाज के बुद्धिजीवियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।

कई प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ आदिवासी इलाकों में ठीक से नहीं पहुंच पाता। इस पर चर्चा हुई और सुझाव दिए गए कि कैसे स्थानीय स्तर पर संगठन बनाकर इन समस्याओं को हल किया जा सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका

कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे जमीनी स्तर पर कैसे काम कर रहे हैं। शिक्षा के प्रसार, नशामुक्ति अभियान, महिला सशक्तिकरण और युवा रोजगार जैसे कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी है। डॉ. भागवत जी ने इन कार्यकर्ताओं की सराहना की और उन्हें अपने काम को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

समाज में एकता का महत्व

मोहन भागवत जी ने जोर देकर कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है। अलग-अलग समुदाय, भाषाएं, परंपराएं सब मिलकर भारत को मजबूत बनाती हैं। आदिवासी समाज इस विविधता का सबसे सुंदर रंग है। उन्होंने कहा कि जब तक हम सब मिलकर नहीं चलेंगे, देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी ताकतें कभी-कभी समाज में फूट डालने की कोशिश करती हैं लेकिन हमें सावधान रहना होगा। हमारी पहचान भारतीय है और इस पहचान को मजबूत रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।

युवाओं के लिए संदेश

Mohan Bhagwat Ranchi Visit: कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है। आदिवासी युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है सही मार्गदर्शन और अवसरों की। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा पूरी करें, कौशल विकास करें और समाज की सेवा में लगें।

कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने एक साथ मिलकर समाज की एकता और विकास के लिए संकल्प लिया। सभी ने यह प्रतिज्ञा की कि वे अपने-अपने इलाकों में जाकर इस संदेश को फैलाएंगे और समाज को मजबूत बनाने में योगदान देंगे। डॉ. मोहन भागवत जी ने सभी का धन्यवाद किया और आशीर्वाद दिया।

यह कार्यक्रम झारखंड के आदिवासी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इससे न केवल समाज में एकता की भावना मजबूत हुई बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ भी बढ़ी। आने वाले समय में ऐसे और कार्यक्रमों की जरूरत है जो समाज को जोड़ने का काम करें।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।