NEET Student Death Case: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में अब पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लापरवाही के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाना यह साफ संकेत देता है कि शुरुआती स्तर पर जांच में भारी चूक हुई, जिसका खामियाजा अब पूरे सिस्टम को भुगतना पड़ रहा है।
यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जिस पर आम नागरिक भरोसा करता है।
लापरवाही पर कार्रवाई, दो पुलिसकर्मी निलंबित
पटना एसएसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के दारोगा हेमंत झा को निलंबित कर दिया गया है। दोनों पर आरोप है कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद उन्होंने समय रहते जरूरी कार्रवाई नहीं की।
पुलिस अधिकारियों ने खुद माना कि शुरुआती स्तर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे साक्ष्य सुरक्षित नहीं रह पाए। यह एक गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जा रही है।
शुरुआत में ही क्यों नहीं हुई सख्त कार्रवाई
घटना वाले दिन के बाद पूरे तीन दिन तक न तो हॉस्टल को सील किया गया, न छात्रा के कमरे को सुरक्षित किया गया और न ही बिस्तर व कपड़ों को जब्त किया गया। यह वही समय होता है जब सबूत सबसे ज्यादा अहम होते हैं।
तीन दिन बाद जब कार्रवाई शुरू हुई, तब तक कई अहम सबूत प्रभावित हो चुके थे। इससे न सिर्फ जांच की दिशा भटकी, बल्कि वरीय अधिकारियों को भी अधूरी और भ्रमित जानकारी दी गई।
जांच में देरी से बढ़ी परेशानी
शुरुआती जांच में सही जानकारी नहीं मिलने के कारण एसआईटी को कई स्तरों पर दोबारा काम करना पड़ा। यह स्थिति बताती है कि अगर स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी से काम किया जाता, तो जांच अब तक कहीं आगे बढ़ चुकी होती।
इस देरी ने पीड़ित परिवार के दर्द को और गहरा कर दिया है, जो न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
शनिवार को सामने आए दो बड़े खुलासे
शनिवार का दिन इस मामले में बेहद अहम रहा, जब जांच से जुड़े दो बड़े तथ्य सार्वजनिक हुए।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
फॉरेंसिक टीम ने एसआईटी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के कपड़ों से स्पर्म पाए गए हैं। यह खुलासा मामले की गंभीरता को कई गुना बढ़ा देता है।
अब गिरफ्तार आरोपियों के साथ-साथ एसआईटी द्वारा चिह्नित अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के डीएनए सैंपल से इनका मिलान किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है।
अधूरे दस्तावेजों से जांच प्रभावित
पटना एम्स के फॉरेंसिक साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. विनय कुमार ने भी जांच को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छात्रा की मौत की जांच के लिए एक विशेष मेडिकल टीम बनाई गई थी, लेकिन एसआईटी की ओर से उन्हें अधूरे दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
डॉ. विनय कुमार के अनुसार, जरूरी कागजात समय पर न मिलने से जांच में देरी हो रही है। हालांकि टीम लगातार काम कर रही है और हर पहलू को गंभीरता से परखा जा रहा है।
सिस्टम पर उठते सवाल
यह पूरा मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगर समय रहते सही कदम उठाए जाते, तो शायद सच्चाई अब तक सामने आ चुकी होती। पुलिस की लापरवाही ने न केवल जांच को कमजोर किया, बल्कि आम लोगों के भरोसे को भी चोट पहुंचाई है।
नीट जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत, और फिर उसमें हुई प्रशासनिक चूक, यह दर्शाती है कि सुधार की कितनी जरूरत है।
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है। डीएनए रिपोर्ट और मेडिकल जांच के नतीजे आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पीड़ित परिवार और समाज की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि न्याय कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता के साथ मिलता है।