China India Relations: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को एक अहम बयान देते हुए कहा कि चीन और भारत अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझेदार हैं। यह बयान उन्होंने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए दिया। चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इस बात की जानकारी दी।
शी जिनपिंग ने अपने संदेश में कहा कि पिछले एक साल में चीन और भारत के बीच संबंध लगातार सुधर रहे हैं और विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विकास दुनिया में शांति और समृद्धि को बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। चीनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि चीन हमेशा से मानता है कि अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझेदार बनना दोनों देशों के लिए सही विकल्प है।
दोनों देशों के बीच संबंधों का इतिहास
भारत और चीन दोनों ही एशिया की बड़ी शक्तियां हैं और दोनों के पास परमाणु हथियार भी हैं। दोनों देशों के बीच 3,800 किलोमीटर लंबी सीमा है जो ठीक से चिह्नित नहीं है। यह सीमा 1950 के दशक से ही विवादित रही है। दोनों देशों के बीच इस सीमा को लेकर समय-समय पर तनाव बना रहता है।
शी जिनपिंग ने अपने बयान में एक दिलचस्प बात कहते हुए चीन और भारत को ड्रैगन और हाथी का नृत्य बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर काम करें तो यह दुनिया के लिए फायदेमंद होगा। चीनी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि दोनों देश आपसी आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ाएंगे और एक-दूसरे की चिंताओं का समाधान करेंगे ताकि स्वस्थ और स्थिर संबंध बन सकें।
2020 की गलवान घटना का प्रभाव
दोनों देशों के बीच संबंध 2020 में गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। उस साल गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हाथापाई हुई थी। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक और चार चीनी सैनिक शहीद हो गए थे। यह घटना दोनों देशों के बीच तनाव का एक बड़ा कारण बनी।
इस घटना के बाद हिमालयी सीमा पर दोनों देशों ने अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी। सीमा क्षेत्रों में भारी मात्रा में सैनिक तैनात किए गए। दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी हो गई और राजनयिक संबंध भी ठंडे पड़ गए। व्यापार और निवेश पर भी इसका असर पड़ा।
संबंधों में सुधार की कोशिश
पिछले साल से दोनों देशों ने अपने संबंधों को सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं। उच्च स्तर की द्विपक्षीय यात्राएं हुई हैं। दोनों देशों के अधिकारियों ने कई दौर की बातचीत की है। सीमा पर तनाव कम करने के लिए सैन्य स्तर पर भी वार्ता जारी है।
2025 में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुईं। यह एक बड़ा कदम था जो संबंधों में सुधार का संकेत देता है। व्यापार और निवेश के प्रवाह में भी बढ़ोतरी हुई है। दोनों देश आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
अमेरिकी नीतियों का प्रभाव
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति के कारण भी चीन और भारत करीब आ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियां और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उसका रवैया दोनों देशों को एक साथ लाने में मदद कर रहा है। दोनों देश समझते हैं कि आपसी सहयोग उनके हित में है।
आर्थिक सहयोग की संभावनाएं
चीन और भारत दोनों ही दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों के बीच व्यापार की भारी संभावनाएं हैं। चीन भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। हालांकि व्यापार असंतुलन एक समस्या है लेकिन दोनों देश इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। निवेश के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
सीमा विवाद का समाधान
सीमा विवाद दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी समस्या है। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर बातचीत चल रही है। दोनों देश शांतिपूर्ण तरीके से इस समस्या को हल करना चाहते हैं। सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई समझौते भी हुए हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग
China India Relations: दोनों देश ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों पर साथ काम करते हैं। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर उनके हित समान हैं। दोनों विकासशील देश हैं और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करते हैं।
भविष्य की राह
शी जिनपिंग का यह बयान दोनों देशों के बीच संबंधों में नया अध्याय खोल सकता है। हालांकि अभी भी कई चुनौतियां हैं लेकिन सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। दोनों देशों को विश्वास बनाने और आपसी चिंताओं का समाधान करने की जरूरत है। यदि दोनों देश मिलकर काम करें तो यह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे एशिया और दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।
भारत और चीन के बीच संबंध जटिल हैं लेकिन दोनों देशों को समझना होगा कि सहयोग और शांति ही आगे बढ़ने का रास्ता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संबंधों में और सुधार की उम्मीद है।