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ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र, अंतरिक्ष में भारत का नाम किया रोशन

Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra: ग्रुप कैप्टन को राष्ट्रपति ने दिया देश का सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार
Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra: ग्रुप कैप्टन को राष्ट्रपति ने दिया देश का सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार (Image Source: AIR)
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। शुभांशु अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने जून 2025 में एक्सियम-4 मिशन के तहत 18 दिन का अंतरिक्ष सफर पूरा किया। लखनऊ के इस वीर सपूत ने अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का नाम रोशन किया।
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26 जनवरी 2026 को देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में दिया गया। शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।

भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय

शुभांशु शुक्ला ने पिछले साल जून महीने में इतिहास रच दिया जब वे एक्सियम-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे। वे अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय। उनका यह 18 दिन का अंतरिक्ष सफर भारत के लिए बेहद गौरवशाली रहा। इससे पहले 41 साल पहले राकेश शर्मा रूसी सोयुज-11 अंतरिक्ष मिशन में गए थे। शुभांशु ने उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का काम किया है।

एक कुशल फाइटर पायलट की कहानी

शुभांशु शुक्ला सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्री ही नहीं बल्कि एक अनुभवी फाइटर पायलट भी हैं। उन्होंने विभिन्न लड़ाकू विमानों में 2000 घंटे से अधिक की उड़ान भरी है। इनमें सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 जैसे विमान शामिल हैं। जून 2006 में उन्हें भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था। तब से लेकर अब तक उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से देश की सेवा की है।

एक्सियम-4 मिशन में उनकी भूमिका

एक्सियम-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला ने पायलट के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। यह मिशन अमेरिका की निजी कंपनी एक्सियम स्पेस द्वारा चलाया गया था। इसमें नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने मिलकर काम किया। अंतरिक्ष स्टेशन पर रहते हुए शुभांशु ने कई जटिल प्रयोग किए जिन्हें दुनिया भर के अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने सराहा। उनके इस योगदान ने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊंचाई दी है।

लखनऊ से अंतरिक्ष तक का सफर

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का जन्म उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ था। एक साधारण शहर से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंचने का उनका सफर हर युवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, समर्पण और दृढ़ संकल्प से यह मुकाम हासिल किया है। आज वे पूरे देश के लिए गर्व की बात हैं। उनकी इस उपलब्धि से लाखों युवाओं को प्रेरणा मिलेगी कि अगर मन में दृढ़ इच्छा हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।

 

Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra: ग्रुप कैप्टन को राष्ट्रपति ने दिया देश का सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार
Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra: ग्रुप कैप्टन को राष्ट्रपति ने दिया देश का सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार (Image Source: Yt/@NarendraModi)

राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र प्रदान करते हुए उनकी अदम्य साहस और उत्कृष्ट वीरता की सराहना की। यह पुरस्कार देश का सबसे बड़ा शांतिकाल वीरता सम्मान है। कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में देश के प्रधानमंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। शुभांशु का यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री योगी ने दी बधाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक्स पोस्ट में शुभांशु शुक्ला को बधाई देते हुए कहा कि उनकी निडरता, प्रतिबद्धता और संयम ने भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई उड़ान दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ का यह बेटा पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनकी इस उपलब्धि से राज्य के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी और वे भी देश सेवा के लिए आगे आएंगे।

विश्व स्तर पर मिली सराहना

अंतरिक्ष मिशन की सफलता के बाद शुभांशु शुक्ला का नाम घर-घर में पहुंच गया। उनके द्वारा अंतरिक्ष स्टेशन पर किए गए प्रयोगों को विश्व भर के अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने सराहा। उन्होंने जटिल वैज्ञानिक प्रयोग किए जिनसे भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान को मदद मिलेगी। उनका यह योगदान केवल भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मिली नई ऊर्जा

शुभांशु शुक्ला की इस उपलब्धि ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई गति दी है। गगनयान मिशन जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों के लिए यह एक मजबूत आधार बन गया है। इसरो अब और अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने मानव अंतरिक्ष मिशनों की योजना बना रहा है। शुभांशु के अनुभव से भारतीय वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों को बहुत कुछ सीखने को मिला है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

शुभांशु शुक्ला की यह कहानी देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वे हर उस युवा के लिए आदर्श हैं जो देश की सेवा करना चाहता है। उनका यह सफर बताता है कि सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करना कितना जरूरी है।

शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र मिलना भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। देश को ऐसे वीर सपूतों पर गर्व है जो अपने साहस और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र का नाम रोशन करते हैं। शुभांशु शुक्ला का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है बल्कि पूरे भारत की सामूहिक उपलब्धि है। उनका यह योगदान भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।