Shahid Kapoor on Fake Bollywood Marketing: बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर शाहिद कपूर इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ओ रोमियो को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म की रिलीज से कुछ दिन पहले ही शाहिद ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में हो रही नकली मार्केटिंग और फिल्मों की गिरती गुणवत्ता को लेकर अपनी राय साझा की है। एक्टर के इस बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दिया है। शाहिद कपूर ने साफ शब्दों में कहा कि बॉलीवुड में उतनी अच्छी फिल्में नहीं बन रही हैं जितनी बननी चाहिए और दर्शकों का धैर्य भी लगातार कम होता जा रहा है।
नकली पीआर में कभी नहीं रहा विश्वास
प्रखर गुप्ता के साथ हाल ही में हुए एक पॉडकास्ट में शाहिद कपूर ने अपने दिल की बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी भी बनावटी पीआर और नकली मार्केटिंग में विश्वास नहीं रहा है। शाहिद के मुताबिक मार्केटिंग जरूरी तो है लेकिन इसमें सच्चाई और ईमानदारी होनी भी उतनी ही जरूरी है। एक्टर ने कहा कि यह सोचना बेहद आवश्यक है कि किसी फिल्म की मार्केटिंग में कितना सही है और कितना गलत। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म इंडस्ट्री में सच्चाई की अहमियत को समझना होगा।
कला की शुद्धता है जरूरी
शाहिद कपूर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कला और उसकी शुद्धता के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग यह नहीं समझते हैं लेकिन यह जिंदगी का एक खूबसूरत जादू है जब लोगों से भरे कमरे में आपके लिए तालियां बजती हैं और सीटी बजती हैं। जब आपको पहचाना जाता है और आपको सम्मान दिया जाता है तो यह एक बेहद खास एहसास होता है। शाहिद ने कहा कि यही कारण है कि कला इतनी जरूरी है। लेकिन जब इस शुद्धता में बनावटीपन आने लगता है तो वह खूबसूरत एहसास खत्म हो जाता है। एक्टर ने साफ किया कि जब कला में सच्चाई नहीं रहती तो वह अपना असली मकसद खो देती है।
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दर्शकों का घटता धैर्य एक बड़ी समस्या
इंटरव्यू के दौरान शाहिद कपूर ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में दर्शकों का धैर्य लगातार कम होता जा रहा है। उनका दिमाग ठीक से फोकस नहीं कर पाता है। शाहिद ने समझाया कि मोमबत्ती दोनों तरफ से जल रही है। एक तरफ दर्शकों में धैर्य की कमी है और दूसरी तरफ उन्हें लगातार उत्तेजना और ब्रेक की जरूरत महसूस होती है। यह सब डोपामाइन के स्तर को बढ़ाने के लिए होता है। आजकल के दर्शक लंबे समय तक किसी एक चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।
क्रिएटर्स की क्षमता भी हो रही प्रभावित
शाहिद कपूर ने यह भी बताया कि यह समस्या सिर्फ दर्शकों तक सीमित नहीं है बल्कि क्रिएटर्स भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। जब फिल्म बनाने वाले लोग खुद ही अपने साथ ऐसा ही करने लगते हैं तो उनकी क्रिएट करने की क्षमता पर असर पड़ता है। जब वे ध्यान केंद्रित करके काम करने की कोशिश करते हैं तो उनकी रचनात्मकता प्रभावित होती है। शाहिद ने कहा कि यह एक दोतरफा प्रक्रिया है। एक तरफ दर्शक पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाते और दूसरी तरफ फिल्म बनाने वाले भी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।
बॉलीवुड नहीं बना रहा अच्छी फिल्में
शाहिद कपूर ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही कि ऐसा नहीं है कि दर्शक फिल्में देखना नहीं चाहते हैं। सच्चाई यह है कि बॉलीवुड उतनी अच्छी फिल्में नहीं बना रहा है जितनी उसे बनानी चाहिए। एक्टर ने कहा कि इंडस्ट्री को इस बात को स्वीकार करना होगा कि गुणवत्ता में कमी आई है। अच्छी कहानियां, मजबूत पटकथा और दमदार प्रदर्शन की जरूरत है। शाहिद के अनुसार यह सिर्फ दर्शकों की गलती नहीं है बल्कि फिल्म इंडस्ट्री को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
विशाल भारद्वाज की फिल्म में आएंगे नजर
शाहिद कपूर की अपकमिंग फिल्म ओ रोमियो 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को विशाल भारद्वाज ने डायरेक्ट किया है जो अपनी खास शैली के लिए जाने जाते हैं। फिल्म में शाहिद कपूर के साथ तृप्ति डिमरी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर की जोड़ी पहले भी कई शानदार फिल्में दे चुकी है इसलिए दर्शकों को इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं। फिल्म की कहानी और ट्रेलर ने पहले ही दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
इंडस्ट्री को करनी होगी आत्ममंथन
Shahid Kapoor on Fake Bollywood Marketing: शाहिद कपूर के बयान ने बॉलीवुड इंडस्ट्री के सामने एक आईना रख दिया है। उनकी बातों में काफी गहराई है और यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर बॉलीवुड कहां गलत दिशा में जा रहा है। फिल्म इंडस्ट्री को अब आत्ममंथन करने की जरूरत है। नकली मार्केटिंग से ज्यादा जरूरी है अच्छी कंटेंट। अगर फिल्में अच्छी होंगी तो दर्शक खुद ही सिनेमाघरों में पहुंचेंगे।
फिल्म इंडस्ट्री का भविष्य
शाहिद कपूर की बातें बॉलीवुड के भविष्य के लिए एक चेतावनी की तरह हैं। अगर इंडस्ट्री ने समय रहते अपनी गलतियों को नहीं सुधारा तो यह दर्शकों से और दूर हो जाएगी। अच्छी कहानियां, बेहतर निर्देशन और सच्ची मार्केटिंग ही बॉलीवुड को फिर से उसकी पुरानी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। दर्शक अब पहले से ज्यादा समझदार हो गए हैं और वे सिर्फ अच्छी फिल्मों के लिए ही पैसे खर्च करना चाहते हैं। इंडस्ट्री को इस बदलाव को समझना होगा और उसी के अनुसार काम करना होगा।
शाहिद कपूर के इस बयान ने साफ कर दिया है कि बॉलीवुड को अब गंभीरता से सोचने की जरूरत है। नकली चमक-दमक से ज्यादा जरूरी है असली प्रतिभा और अच्छी कहानियां।