Union Budget 2026: रविवार को संसद में पेश हुए आम बजट 2026 ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उद्योग, मेक इन इंडिया और आम उपभोक्ता की रोजमर्रा की जरूरतों पर केंद्रित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के अपने कार्यकाल का लगातार 9वां बजट पेश करते हुए कई ऐसे ऐलान किए, जिनका सीधा असर बाजार, उद्योग और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।
इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सरकार ने उन वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला लिया, जो भारत में बनती हैं या जिनका इस्तेमाल घरेलू विनिर्माण को मजबूत करता है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में कई जरूरी और रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं।
आम बजट 2026 में सस्ताई की दिशा में बड़ा कदम
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि कस्टम ड्यूटी में कटौती का उद्देश्य सिर्फ कीमतें घटाना नहीं, बल्कि देश में उत्पादन को बढ़ावा देना भी है। खासतौर पर टेक्सटाइल, लेदर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर को राहत देने की कोशिश की गई है।
सरकार का मानना है कि जब कच्चा माल और जरूरी कंपोनेंट सस्ते होंगे, तो इसका फायदा सीधे उद्योगों को मिलेगा और अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। यही वजह है कि बजट में कई ऐसे उत्पाद शामिल किए गए हैं, जिनकी मांग आम लोगों के बीच लगातार बनी रहती है।
कपड़े और लेदर उत्पाद होंगे जेब के अनुकूल
बजट 2026 में कपड़े, लेदर आइटम, सिंथेटिक फुटवियर और चमड़े से बने उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाने की घोषणा की गई है। इसका असर यह होगा कि रेडीमेड गारमेंट्स से लेकर जूते-चप्पल तक की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
इसके अलावा लेदर और टेक्सटाइल के निर्यात को ड्यूटी फ्री करने का फैसला घरेलू उद्योग के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और छोटे कारोबारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
दवाइयों से लेकर मोबाइल बैटरी तक राहत
स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी बजट ने राहत दी है। कैंसर और शुगर की 17 जरूरी दवाओं को पूरी तरह ड्यूटी फ्री कर दिया गया है। इससे इन गंभीर बीमारियों का इलाज कुछ हद तक सस्ता हो सकता है, जो मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लिए बड़ी राहत है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में लिथियम आयन सेल और मोबाइल बैटरियों पर ड्यूटी घटाने से स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की लागत कम हो सकती है। इसका फायदा खासतौर पर युवाओं और स्टार्टअप सेक्टर को मिलेगा।
ईवी और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा
बजट 2026 में इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर ग्लास और मिक्स्ड गैस सीएनजी को सस्ता करने का ऐलान सरकार की हरित ऊर्जा नीति को मजबूत करता है। ईवी की कीमत कम होने से पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण को भी फायदा होगा।
इसके साथ ही विमानों के ईंधन और विदेश यात्रा से जुड़ी लागत में कमी का असर ट्रैवल और एविएशन सेक्टर पर पड़ सकता है। इससे हवाई यात्रा पहले के मुकाबले कुछ सस्ती हो सकती है।
किन सेक्टरों में बढ़ेगी महंगाई
जहां एक ओर बजट ने कई मोर्चों पर राहत दी है, वहीं कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं, जहां महंगाई का असर दिख सकता है। कस्टम ड्यूटी बढ़ने से शराब, स्क्रैप और खनिज से जुड़े उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
शराब और स्क्रैप पर बढ़ेगा बोझ
शराब पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ सकता है। सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने और उपभोग को नियंत्रित करने की दिशा में देखा जा रहा है।
स्क्रैप और खनिजों पर ड्यूटी बढ़ने से निर्माण और कुछ औद्योगिक गतिविधियों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि सरकार का तर्क है कि इससे घरेलू संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
आम आदमी की जेब पर क्या असर
अगर कुल मिलाकर देखा जाए, तो आम बजट 2026 का झुकाव सस्ताई की ओर ज्यादा नजर आता है। रोजमर्रा की जरूरतों, स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी से जुड़े उत्पादों का सस्ता होना आम आदमी के लिए राहत की खबर है।
हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टरों में महंगाई का असर जरूर पड़ेगा, लेकिन उसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ता पर सीमित रहने की संभावना है। बजट का असली असर आने वाले महीनों में बाजार और कीमतों में दिखेगा।