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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने वापस लिया फैसला

President's Rule Ends in Manipur: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त, राज्य में फिर से सामान्य प्रशासन की वापसी
President's Rule Ends in Manipur: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त, राज्य में फिर से सामान्य प्रशासन की वापसी (Photo: AIR)

President's Rule Ends in Manipur: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर में लगाया गया राष्ट्रपति शासन वापस ले लिया है। पिछले साल 13 फरवरी को संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य में अब सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था बहाल होगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।

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President’s Rule Ends in Manipur: मणिपुर राज्य में एक साल से अधिक समय से चल रहा राष्ट्रपति शासन आखिरकार खत्म हो गया है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज से प्रभावी रूप से राज्य में लगाए गए राष्ट्रपति शासन को वापस ले लिया है। यह फैसला उत्तर पूर्व के इस छोटे से राज्य के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की समाप्ति का ऐलान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत जारी की गई अपनी घोषणा को वापस ले लिया है। यह घोषणा पिछले साल 13 फरवरी को जारी की गई थी। गृह मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना में साफ तौर पर कहा गया है कि राष्ट्रपति ने मणिपुर राज्य के संबंध में पिछले साल जारी की गई अपनी उद्घोषणा को निरस्त कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य में अब सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था की वापसी होगी।

राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया था

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने के पीछे राज्य की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति थी। पिछले साल फरवरी महीने में राज्य की हालत बेहद नाजुक हो गई थी। राज्य में सांप्रदायिक तनाव, हिंसा और कानून व्यवस्था की समस्याएं गंभीर रूप ले चुकी थीं। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच बढ़ते विवाद ने पूरे राज्य को अशांति की आग में झोंक दिया था। इन हालातों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया था।

संवैधानिक प्रावधान और अनुच्छेद 356

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र के विफल होने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत राज्य की विधानसभा को भंग किया जा सकता है या निलंबित रखा जा सकता है। राज्य का प्रशासन सीधे राष्ट्रपति के नियंत्रण में आ जाता है। हालांकि व्यावहारिक रूप से राज्यपाल केंद्र सरकार की सलाह पर राज्य का प्रशासन चलाते हैं। मणिपुर में भी यही व्यवस्था एक साल से अधिक समय तक लागू रही।

एक साल से अधिक समय तक चला राष्ट्रपति शासन

13 फरवरी 2024 को जब मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, तब राज्य की स्थिति बहुत ही चिंताजनक थी। हिंसा की घटनाएं लगातार हो रही थीं और लोगों की जान-माल को खतरा बना हुआ था। राज्य सरकार हालात पर काबू पाने में नाकाम साबित हो रही थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्य का प्रशासन अपने हाथों में लेने का फैसला किया। पिछले एक साल में केंद्र सरकार ने राज्य में शांति बहाली के कई प्रयास किए। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद की कोशिश की गई।

हालात में सुधार के बाद फैसला

अब जब राष्ट्रपति शासन को वापस लिया गया है, तो इसका मतलब है कि राज्य में हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं। केंद्र सरकार को यह भरोसा हो गया है कि अब राज्य में सामान्य प्रशासनिक तंत्र फिर से काम कर सकता है। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार आया है और सांप्रदायिक तनाव में भी कमी आई है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी और प्रभावी निगरानी ने स्थिति को संभालने में मदद की है।

राज्य के लिए राहत की खबर

मणिपुर के लोगों और राजनीतिक दलों के लिए यह फैसला राहत भरा है। राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया रुकी हुई थी। अब राज्य में फिर से चुनी हुई सरकार काम कर सकेगी। स्थानीय मुद्दों पर फैसले लेने का अधिकार फिर से राज्य के नेताओं के पास आ जाएगा। यह फैसला राज्य की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आगे की चुनौतियां

हालांकि राष्ट्रपति शासन हटना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन मणिपुर के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की कमी अभी भी बनी हुई है। पिछले दो सालों में हुई हिंसा के घावों को भरने में समय लगेगा। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी समुदायों के साथ न्याय हो और उनकी सुरक्षा की गारंटी मिले। विकास के काम भी पटरी पर लाने होंगे जो हिंसा के कारण बाधित हुए थे।

केंद्र सरकार की भूमिका

केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के दौरान कई कदम उठाए थे। राज्य में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए, शांति वार्ता के प्रयास किए गए और राहत कार्यों में तेजी लाई गई। अब राष्ट्रपति शासन हटने के बाद भी केंद्र सरकार राज्य की मदद करती रहेगी। वित्तीय सहायता, सुरक्षा में सहयोग और विकास योजनाओं में समर्थन जारी रहेगा। राज्य सरकार को अपने पैरों पर खड़ा करने में केंद्र की भूमिका अहम रहेगी।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

President’s Rule Ends in Manipur: मणिपुर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति शासन हटाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सत्ताधारी दल ने इसे राज्य में शांति और स्थिरता की वापसी का संकेत बताया है। विपक्षी दलों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने राज्य सरकार से सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार की मांग की है। राज्य की जनता की उम्मीदें अब अपनी चुनी हुई सरकार से जुड़ गई हैं।

नई शुरुआत का समय

मणिपुर के लिए यह एक नई शुरुआत का समय है। राष्ट्रपति शासन की समाप्ति के साथ राज्य में लोकतंत्र की वापसी हुई है। अब राज्य के नेताओं और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्य में दोबारा ऐसी स्थिति न आए। सभी समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखना, विकास को गति देना और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना आगे के प्रमुख लक्ष्य होंगे। राज्य की जनता को भी इस नई शुरुआत में अपना सहयोग देना होगा।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की समाप्ति से उत्तर पूर्व के राजनीतिक परिदृश्य में भी एक सकारात्मक संदेश गया है। यह दिखाता है कि संवैधानिक तंत्र काम कर रहा है और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार राज्यों की मदद के लिए तत्पर है। आने वाले समय में मणिपुर कैसे अपने घावों को भरता है और विकास की राह पर आगे बढ़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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Asfi Shadab

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