कठिन बीमारी और समय पर इलाज की अहमियत
नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में हाल ही में एक बेहद जटिल लेकिन सफल शल्यक्रिया की गई। यह मामला एक 22 वर्षीय युवती से जुड़ा है, जिसके पेट में करीब 14 किलो वजन का अंडाशय का ट्यूमर पाया गया था। यह ट्यूमर इतना बड़ा हो चुका था कि पूरे पेट में फैल गया था और आसपास के अंगों पर दबाव बना रहा था। समय पर इलाज और डॉक्टरों की समझदारी से न केवल मरीज की जान बची, बल्कि उसका भविष्य भी सुरक्षित रखा गया।
तीन महीने से लगातार बढ़ रहा था दर्द
मरीज पिछले तीन महीनों से पेट में तेज दर्द और भारीपन की शिकायत कर रही थी। धीरे-धीरे उसका पेट असामान्य रूप से बढ़ने लगा था। रोजमर्रा के काम करना उसके लिए मुश्किल हो गया था। दर्द इतना बढ़ गया कि आखिरकार उसे अस्पताल आना पड़ा। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मामला गंभीर है और तुरंत भर्ती करना जरूरी है।
जांच में सामने आई गंभीर सच्चाई
अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीज की कई तरह की जांच की गई। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और अन्य जरूरी जांचों से पता चला कि पेट की पूरी जगह में एक बहुत बड़ा ओवेरियन ट्यूमर मौजूद है। यह ट्यूमर दाहिने अंडाशय से जुड़ा हुआ था और अन्य अंगों पर दबाव डाल रहा था। डॉक्टरों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति थी।

अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने संभाला मामला
मरीज की हालत को देखते हुए अस्पताल की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम ने इलाज की पूरी योजना बनाई। सभी पहलुओं पर चर्चा के बाद स्टेजिंग लैपरोटॉमी करने का फैसला लिया गया। यह एक बड़ी शल्यक्रिया होती है, जिसमें पूरी सावधानी और अनुभव की जरूरत होती है।
अत्याधुनिक शल्यक्रिया से निकाला गया विशाल ट्यूमर
शल्यक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने करीब 14 किलो वजन का ट्यूमर पूरी तरह बाहर निकाला। ऑपरेशन कई घंटे चला और हर कदम पर विशेष सावधानी बरती गई। यह ट्यूमर इतना बड़ा था कि इसे निकालना आसान नहीं था, लेकिन डॉक्टरों की कुशलता से यह संभव हो सका।
फ्रोजन सेक्शन जांच से मिली राहत
ट्यूमर को निकालने के बाद उसकी तुरंत जांच की गई, जिसे फ्रोजन सेक्शन जांच कहा जाता है। रिपोर्ट में यह ट्यूमर बॉर्डरलाइन ओवेरियन ट्यूमर पाया गया। इसका मतलब यह है कि यह पूरी तरह कैंसर नहीं था, लेकिन इसमें खतरे की संभावना हो सकती थी। इस जानकारी से डॉक्टरों को आगे के इलाज की दिशा तय करने में मदद मिली।
भविष्य की मां बनने की क्षमता को रखा गया सुरक्षित
मरीज की उम्र सिर्फ 22 साल होने के कारण डॉक्टरों ने खास ध्यान रखा कि उसकी प्रजनन क्षमता सुरक्षित रहे। शल्यक्रिया इस तरह की गई कि उसके अन्य जरूरी अंगों को नुकसान न पहुंचे। यह फैसला मरीज के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।
ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार
शल्यक्रिया के बाद मरीज को काफी राहत मिली। पेट का भारीपन और दर्द लगभग खत्म हो गया। कुछ दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखने के बाद उसकी हालत स्थिर पाई गई। सभी जरूरी जांच सामान्य आने के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
समय पर इलाज से टली बड़ी परेशानी
डॉक्टरों का कहना है कि अगर मरीज थोड़ी और देर करती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। इतना बड़ा ट्यूमर जान के लिए खतरा बन सकता था। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि शरीर में लंबे समय तक रहने वाले दर्द और बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूरी
यह घटना महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता का संदेश देती है। पेट दर्द, असामान्य सूजन या लंबे समय तक परेशानी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज संभव है।
लता मंगेशकर अस्पताल की चिकित्सा क्षमता
लता मंगेशकर अस्पताल पहले भी कई जटिल शल्यक्रियाओं के लिए जाना जाता रहा है। यहां आधुनिक मशीनें और अनुभवी डॉक्टरों की टीम मौजूद है। इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर अस्पताल की चिकित्सा क्षमता को साबित किया है।