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आज पेश होगा पश्चिम बंगाल का अंतरिम बजट, क्या लक्ष्मी भंडार फिर बढ़ाएंगी ममता बनर्जी?

आज पेश होगा पश्चिम बंगाल का अंतरिम बजट, क्या लक्ष्मी भंडार फिर बढ़ाएंगी ममता बनर्जी
आज पेश होगा पश्चिम बंगाल का अंतरिम बजट, क्या लक्ष्मी भंडार फिर बढ़ाएंगी ममता बनर्जी (File Photo)

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले पेश होने वाले अंतरिम बजट पर सबकी नजरें टिकी हैं। लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ने, सरकारी कर्मचारियों के डीए और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर बड़े ऐलानों की उम्मीद जताई जा रही है।

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West Bengal Interim Budget 2026: विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है। इसी माहौल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार आज गुरुवार को राज्य विधानसभा में अंतरिम बजट पेश करने जा रही है। यह बजट सिर्फ सरकारी आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होगा, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले जनता को साधने का एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देगा। ऐसे में लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ममता सरकार इस बार कौन से ‘लोकप्रिय’ और सीधे जनता से जुड़े फैसले ले सकती है।

पिछले कुछ वर्षों में ममता बनर्जी ने यह साफ कर दिया है कि उनकी राजनीति का केंद्र आम लोग हैं, खासकर महिलाएं, गरीब वर्ग और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी आबादी। इसी कारण इस अंतरिम बजट को लेकर उत्सुकता सामान्य से कहीं ज्यादा है।

लक्ष्मी भंडार योजना पर सबसे ज्यादा नजरें

लक्ष्मी भंडार योजना आज पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित और प्रभावशाली योजनाओं में गिनी जाती है। यह योजना 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी द्वारा किया गया एक बड़ा वादा थी। चुनाव जीतने के बाद सरकार ने न सिर्फ इस योजना को लागू किया, बल्कि समय-समय पर इसमें सुधार और विस्तार भी किया।

आज स्थिति यह है कि सामान्य वर्ग की महिलाओं को इस योजना के तहत हर महीने 1,000 रुपये मिलते हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को 1,200 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, इस योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

चुनाव से पहले राशि बढ़ने की उम्मीद

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी लक्ष्मी भंडार की राशि में एक बार फिर बढ़ोतरी कर सकती हैं। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले भी सरकार ने इस योजना के लिए बजट बढ़ाया था, जिसका सीधा फायदा महिलाओं को मिला और इसका राजनीतिक असर भी साफ दिखाई दिया।

हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है कि राशि कितनी बढ़ेगी, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को उम्मीद है कि इस बार भी महिलाओं के खाते में ज्यादा रकम आ सकती है।

अब तक 74,000 करोड़ रुपये खर्च

पिछले पांच वर्षों में लक्ष्मी भंडार योजना के तहत राज्य सरकार करीब 74,000 करोड़ रुपये महिलाओं को सीधे नकद सहायता के रूप में दे चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के लिए 27,000 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। ऐसे में सवाल यही है कि अंतरिम बजट में इस राशि को कितना और बढ़ाया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी महिलाओं के वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए इस योजना को और आकर्षक बना सकती हैं।

‘हर घर में लक्ष्मी’ का संदेश

गुरुवार का दिन लक्ष्मीबार माना जाता है। ऐसे में यह संयोग भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या मुख्यमंत्री इस दिन “हर घर में लक्ष्मी” का प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश करेंगी। राज्य के कई हिस्सों में यह धारणा है कि बजट के जरिए ममता सरकार महिलाओं को फिर से केंद्र में लाने की रणनीति अपनाएगी।

इसके साथ ही यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या नागरिक स्वयंसेवकों और पुलिस के सहायक बल के लिए कोई नई घोषणा की जाएगी, क्योंकि यह वर्ग भी राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

 महंगाई भत्ता कर्मचारियों के लिए अहम मुद्दा

इस अंतरिम बजट का दूसरा बड़ा मुद्दा सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता है। गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों के डीए से जुड़े मामले पर अपना फैसला सुनाने वाला है। ऐसे में बजट और अदालत के फैसले के बीच तालमेल पर भी सबकी नजर रहेगी।

नबन्ना के सूत्रों का कहना है कि बजट तैयार करते समय सरकार ने राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को ध्यान में रखा है, ताकि संतुलन बना रहे।

बुनियादी ढांचे और रोजगार पर फोकस

सरकार का जोर सिर्फ सामाजिक योजनाओं तक सीमित नहीं है। इस बार के बजट में सड़क निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन पर भी खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कुल बजट आवंटन में 7 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

इसके अलावा, अस्थायी श्रमिकों, आशा कार्यकर्ताओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कर्मियों को अतिरिक्त लाभ देने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर सरकार की पकड़ और मजबूत हो सके।

चुनाव से पहले बजट का राजनीतिक संदेश

गौरतलब है कि 2021 में भी अंतरिम बजट 5 फरवरी को पेश किया गया था। उस समय ममता बनर्जी ने खुद बजट पेश कर एक अलग राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि इस बार ऐसी संभावना कम बताई जा रही है, लेकिन बजट का महत्व कम नहीं है।

कुल मिलाकर, यह अंतरिम बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि यह बताएगा कि ममता बनर्जी 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता से किस तरह का संवाद स्थापित करना चाहती हैं।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।