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लोन लेने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: रेपो रेट स्थिर, नहीं बढ़ेगा आपका EMI

लोन लेने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: रेपो रेट स्थिर, नहीं बढ़ेगा आपका EMI
लोन लेने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: रेपो रेट स्थिर, नहीं बढ़ेगा आपका EMI (Pic Credit- X @prakasam_onx)

आरबीआई ने 6 फरवरी 2026 को रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इससे होम और कार लोन की ईएमआई में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। यह फैसला आम लोगों के बजट को स्थिर रखने में मदद करेगा।

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Repo Rate 2026: अगर आप होम लोन, कार लोन या किसी भी तरह के बैंक लोन की ईएमआई भरते हैं, तो 6 फरवरी 2026 की यह खबर आपके लिए सुकून देने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए साफ किया कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बना रहेगा।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू खपत को लेकर बाजार में कई तरह की आशंकाएं बनी हुई थीं। ऐसे में आम लोगों को यह डर था कि कहीं लोन की किस्तें फिर से न बढ़ जाएं। लेकिन आरबीआई के इस फैसले ने फिलहाल उस चिंता पर ब्रेक लगा दिया है।

लोन लेने वालों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला

रेपो रेट में कोई बदलाव न होने का सबसे सीधा फायदा उन लोगों को मिलता है, जो पहले से लोन चुका रहे हैं। इसका मतलब यह है कि बैंकों के लिए कर्ज की लागत नहीं बढ़ेगी और वे ग्राहकों पर अतिरिक्त ब्याज का बोझ नहीं डालेंगे। नतीजतन, आपकी मौजूदा ईएमआई जैसी चल रही है, वैसी ही बनी रहेगी।

यह राहत खासतौर पर मध्यम वर्ग के लिए अहम है, जहां हर महीने का बजट पहले से ही स्कूल फीस, किराया, राशन और ईंधन जैसी जरूरतों में बंटा होता है। ऐसे में ईएमआई का स्थिर रहना घर की आर्थिक योजना को संतुलित बनाए रखता है।

क्या नए लोन लेने वालों को भी फायदा होगा

जो लोग नया होम लोन या कार लोन लेने की सोच रहे हैं, उनके लिए भी यह संकेत सकारात्मक है। चूंकि रेपो रेट स्थिर है, इसलिए बैंकों द्वारा ब्याज दरों में अचानक बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि, किसी बड़ी कटौती की उम्मीद फिलहाल नहीं दिख रही, लेकिन स्थिरता अपने आप में एक राहत है।

नया लोन लेने वाले ग्राहक अपने फैसले को थोड़ी स्पष्टता के साथ ले सकते हैं, क्योंकि ब्याज दरों में अचानक बदलाव का डर कम हुआ है।

2025 में क्यों बदला था ब्याज दरों का रुख

पिछला साल यानी 2025 ब्याज दरों के लिहाज से काफी अहम रहा। एक समय तक महंगाई पर काबू पाने के लिए सख्त नीति अपनाने वाला आरबीआई 2025 में नरम रुख पर आया। पूरे साल में चार बार रेपो रेट में कटौती की गई, जिससे कुल मिलाकर 1.25 प्रतिशत की राहत मिली।

फरवरी 2025 में पांच साल बाद पहली बार दरों में कटौती हुई। इसके बाद अप्रैल, जून और दिसंबर में लगातार कटौती करके रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत तक लाया गया। इसका मकसद था आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देना और कर्ज को सस्ता बनाकर बाजार में मांग बढ़ाना।

आखिर क्या होता है रेपो रेट, आसान भाषा में समझें

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर देश के बड़े बैंक रिजर्व बैंक से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। इसे आप बैंकों के लिए पैसे की कीमत कह सकते हैं। जब यह दर कम होती है, तो बैंकों को सस्ता पैसा मिलता है और वे आम ग्राहकों को सस्ते लोन दे पाते हैं।

इसके उलट, अगर रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों की लागत बढ़ जाती है और इसका सीधा असर लोन की ब्याज दरों और ईएमआई पर पड़ता है। इसलिए रेपो रेट का हर फैसला आम लोगों की जेब से जुड़ा होता है।

ब्याज दरों पर फैसला कैसे लेता है आरबीआई

रेपो रेट और अन्य नीतिगत दरों पर फैसला आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी करती है। इस समिति में कुल छह सदस्य होते हैं, जिनमें तीन आरबीआई से और तीन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।

यह समिति हर दो महीने में बैठक करती है और महंगाई, आर्थिक वृद्धि, वैश्विक हालात और घरेलू मांग जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेती है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ऐसी कुल छह बैठकें हुईं, जिनमें अर्थव्यवस्था को संतुलन में रखने की कोशिश की गई।

फिलहाल आरबीआई का रुख संतुलित नजर आ रहा है। न तो बहुत ज्यादा सख्ती, न ही जल्दबाजी में राहत। संकेत यही हैं कि जब तक महंगाई नियंत्रण में रहती है और वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं, तब तक ब्याज दरों में बड़ा बदलाव नहीं होगा।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।