Gold Silver Price Fall: शुक्रवार को भी सोना और चांदी निवेशकों को राहत देने के बजाय चिंता बढ़ाते नजर आए। मल्टी कमोडिटी मार्केट में लगातार दूसरे दिन की गिरावट ने यह साफ कर दिया कि कीमती धातुओं की हालिया तेजी अब ठहराव और दबाव के दौर में पहुंच चुकी है। सुबह के कारोबार में चांदी के दामों में जबरदस्त टूट देखने को मिली, वहीं सोना भी भारी दबाव में रहा।
सुबह करीब 11:30 बजे तक चांदी 5,000 रुपये गिरकर 2.38 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई, जबकि शुरुआती कारोबार में यह गिरावट 12,000 रुपये तक जा चुकी थी। वहीं सोने की कीमत भी 1,000 रुपये फिसल गई थी, जो कुछ समय पहले 1.50 लाख रुपये के पार कारोबार कर रही थी। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम निवेशक की उम्मीदों पर भी असर डाल रही है।
चांदी की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट
29 जनवरी को चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था। उस समय बाजार में यह धारणा बन गई थी कि चांदी नए स्तर बना सकती है। लेकिन अब तस्वीर बिल्कुल उलट है। शुक्रवार को चांदी करीब 2.29 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई, यानी रिकॉर्ड हाई से अब तक लगभग 1.91 लाख रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
सोने की चमक हुई फीकी
सोने की बात करें तो 29 जनवरी को इसका भाव 1.93 लाख रुपये के करीब था। लेकिन शुक्रवार सुबह यह 1.49 लाख रुपये तक आ गया। यानी महज कुछ दिनों में ही सोने ने करीब 44,000 रुपये का गोता लगा लिया। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए झटका है, जिन्होंने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी।
गोल्ड और सिल्वर ETF में भारी गिरावट
शुक्रवार को गोल्ड और सिल्वर ETF में भी 10 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ा है, जिन्होंने फिजिकल गोल्ड-सिल्वर की बजाय ETF में निवेश किया था।
कोटक सिल्वर ETF सबसे ज्यादा नुकसान में रहा और करीब 10 फीसदी टूट गया। HDFC सिल्वर ETF, SBI सिल्वर ETF और एडलवाइस सिल्वर ETF में लगभग 9 फीसदी की गिरावट देखी गई। बंधन सिल्वर ETF में तुलनात्मक रूप से कम, लेकिन फिर भी करीब 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
गोल्ड ETF की बात करें तो एंजेल वन गोल्ड ETF करीब 8 फीसदी गिरा, जबकि जेरोधा गोल्ड ETF में 5 फीसदी की कमजोरी देखी गई।
आखिर क्यों टूट रहे हैं सोना-चांदी?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली का शिकार हुए हैं। जब दाम बहुत तेजी से ऊपर जाते हैं, तो निवेशक मुनाफा बुक करने लगते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियों की उम्मीदों ने भी कीमती धातुओं पर असर डाला है। इसके अलावा, आईटी और टेक सेक्टर में बिकवाली के कारण ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर गोल्ड-सिल्वर पर भी पड़ा।
सीएमई द्वारा मार्जिन बढ़ाए जाने से ट्रेडिंग महंगी हुई है। ऐसे में छोटे निवेशक और ट्रेडर्स फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं, जिससे कीमतों में तेजी को सपोर्ट नहीं मिल पा रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार को सोना करीब 4 फीसदी और चांदी करीब 9 फीसदी तक टूट गई। फिलहाल सोना लगभग 4,887 डॉलर प्रति औंस और चांदी 78 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। वैश्विक बाजार की यह कमजोरी घरेलू बाजार पर भी असर डाल रही है।
क्या फिर लौटेगी सोना-चांदी की चमक?
विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा गिरावट स्थायी नहीं हो सकती। दुनिया भर में जियो-पॉलिटिकल तनाव, महंगाई का दबाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी आगे चलकर सोने-चांदी को फिर सपोर्ट दे सकती है।
Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 तक सोना 4,900 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकता है। वहीं Bank of America का कहना है कि अगर सप्लाई और इंडस्ट्रियल डिमांड बनी रही, तो चांदी 135 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी पार कर सकती है।
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