Pappu Yadav Arrest: बिहार की राजनीति में शुक्रवार की देर रात उस समय हलचल मच गई, जब पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी किसी हालिया मामले में नहीं, बल्कि 31 साल पुराने एक केस में की गई। लेकिन समय और परिस्थितियों ने इस कार्रवाई को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
पटना के मंदिरी स्थित आवास पर पुलिस जब पहुंची, तो वहां पहले से मौजूद समर्थकों और पुलिस के बीच करीब ढाई घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। नोक-झोंक हुई, नारेबाजी हुई और माहौल धीरे-धीरे सियासी रंग लेता चला गया। आखिरकार देर रात पुलिस पप्पू यादव को हिरासत में लेकर चली गई।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव का तीखा हमला
गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद सांसद पप्पू यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए बिहार पुलिस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि उन्होंने नीट छात्रा के लिए न्याय की आवाज उठाई, और उसी का नतीजा यह गिरफ्तारी है।
उनका कहना था कि पुलिस की यह कार्रवाई उन्हें डराने या चुप कराने की कोशिश है। पप्पू यादव ने साफ शब्दों में कहा कि जेल भेजने या फांसी देने से भी वे पीछे नहीं हटेंगे और बेईमानी के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
नीट छात्रा की मौत और उठते सवाल
पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के बाद मामला शुरू से ही सवालों के घेरे में रहा है। पुलिस जांच अभी जारी है, लेकिन इस बीच पप्पू यादव ने इस मामले को लगातार उठाया। उन्होंने हॉस्टल संचालक, अस्पताल की कार्यप्रणाली और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सांसद ने छात्रा के परिजनों से जहानाबाद जाकर मुलाकात भी की थी और सार्वजनिक तौर पर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। यही वजह है कि अब उनकी गिरफ्तारी को कई लोग इसी मामले से जोड़कर देख रहे हैं।
31 साल पुराना मामला अचानक क्यों चर्चा में
पुलिस के अनुसार, पप्पू यादव की गिरफ्तारी गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 552/95 से जुड़ी है। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि उनका मकान धोखाधड़ी से किराए पर लिया गया और बाद में उसे सांसद के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया।
यह मामला वर्षों से अदालत में लंबित था। हाल ही में एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस केस में सख्त रुख अपनाते हुए संपत्ति कुर्की का आदेश जारी किया था। कोर्ट के समन के बावजूद पेश नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
पुलिस का पक्ष क्या कहता है
पटना के एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 1995 का है और उस समय लागू भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत में ट्रायल चल रहा था और सांसद की उपस्थिति अनिवार्य थी।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और इसे किसी अन्य मामले से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक बदले की भावना या कानूनी मजबूरी
इस गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि क्या यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है या फिर नीट छात्रा के मामले में आवाज उठाने का नतीजा। समर्थकों का कहना है कि जब सांसद ने व्यवस्था पर सवाल उठाए, तभी पुराने मामले को सक्रिय किया गया।
वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष और प्रशासन इसे कानून का सामान्य पालन कह रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस गिरफ्तारी पर चर्चा तेज है। एक वर्ग इसे कानून की जीत मान रहा है, तो दूसरा वर्ग इसे आवाज दबाने की कोशिश बता रहा है। आम लोगों के मन में यह सवाल भी है कि अगर मामला 31 साल पुराना था, तो कार्रवाई ठीक उसी समय क्यों हुई जब सांसद एक संवेदनशील मुद्दे पर सरकार और पुलिस को घेर रहे थे।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी से बिहार की राजनीति में तनाव और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह मामला सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। नीट छात्रा की मौत की जांच, पुलिस की भूमिका और नेताओं की जवाबदेही—ये सभी सवाल फिर से केंद्र में आ गए हैं।