Maharashtra New Policies: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि राज्य में आने वाले समय में विकास की दिशा पूरी तरह से नीति-आधारित होगी। उन्होंने साफ किया कि भविष्य की जरूरतों, बदलाव और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अगले दो से तीन महीनों में राज्य सरकार सात नई नीतियां लागू करेगी। यह घोषणा उन्होंने एडवांटेज विदर्भ-खासदार औद्योगिक महोत्सव 2026 के दूसरे दिन इंटरनेशनल बिजनेस कॉन्क्लेव के उद्घाटन के दौरान की। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित 22 देशों के राजदूत और कई उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद थे।
महाराष्ट्र में विकास की नई दिशा
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र देश में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित करने वाला राज्य है। यहां केवल समझौते नहीं होते, बल्कि वे जमीन पर उतरकर असली बदलाव लाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में एमओयू कागजों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका ठीक से क्रियान्वयन होता है। लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोलर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में महाराष्ट्र पूरे देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
हाल ही में लागू हुई नीतियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में कई नई नीतियां घोषित की हैं। इनमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति, जेम्स एंड ज्वेलरी नीति, बांस नीति और नई औद्योगिक नीति शामिल हैं। इन नीतियों का उद्देश्य राज्य में रोजगार बढ़ाना और निवेश को बढ़ावा देना है। अब इसी क्रम में सात और नई नीतियां जल्द ही लागू होने जा रही हैं।
आने वाली सात नई नीतियां
मुख्यमंत्री ने जिन सात नई नीतियों की घोषणा की है, उनमें टेक्सटाइल, लेदर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस-डिफेंस, एमएसएमई, फार्मा-बायोटेक, सर्कुलर इकॉनमी और बायोप्लास्टिक क्षेत्र शामिल हैं। ये सभी नीतियां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं। टेक्सटाइल और लेदर उद्योग को बढ़ावा देने से राज्य में हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस-डिफेंस क्षेत्र में निवेश से महाराष्ट्र तकनीकी रूप से और मजबूत होगा।
एमएसएमई यानी छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए भी एक अलग नीति बनाई जा रही है। यह नीति छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करेगी। फार्मा और बायोटेक क्षेत्र में भी नई नीति से दवा निर्माण और चिकित्सा शोध को बल मिलेगा। सर्कुलर इकॉनमी और बायोप्लास्टिक नीति पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
विदर्भ का बढ़ता महत्व
मुख्यमंत्री ने विदर्भ क्षेत्र, खासकर नागपुर और गडचिरोली की तरक्की पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र सोलर एनर्जी, कृषि-प्रसंस्करण और स्टील जैसे उद्योगों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गडचिरोली को ग्रीन स्टील हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। ग्रीन स्टील का मतलब है कि इसके उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन कम से कम होगा, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
नागपुर पहले से ही लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट का एक बड़ा केंद्र है। यहां मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी पार्क और इंटरनेशनल कार्गो हब विकसित हो रहे हैं। इससे राज्य के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। विदर्भ में कृषि प्रसंस्करण इकाइयां भी बढ़ रही हैं, जिससे किसानों की आय में इजाफा हो रहा है।
हजारों करोड़ के समझौते
कार्यक्रम के दूसरे दिन कुल 10,831 करोड़ रुपये के तीन बड़े समझौते हुए। ये समझौते विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और विकास के लिए किए गए हैं। इन समझौतों से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये समझौते केवल कागजों पर नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें जमीन पर उतारा जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को सीधा फायदा होगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
विदेशी निवेश में अग्रणी महाराष्ट्र
Maharashtra New Policies: महाराष्ट्र देश में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने वाला राज्य बना हुआ है। इसकी वजह यहां की मजबूत औद्योगिक नीतियां, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार का व्यापार-समर्थक रवैया है। राज्य में कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपनी इकाइयां स्थापित कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है।
केंद्रीय मंत्री और राजदूतों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि नागपुर और विदर्भ क्षेत्र देश के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। 22 देशों के राजदूतों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और महाराष्ट्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की पहचान बढ़ी है।
रोजगार सृजन पर जोर
नई नीतियों का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उद्योग बढ़ेंगे, तो स्वाभाविक रूप से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर उन्हें नौकरी के लिए तैयार किया जा रहा है। स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि वे अपने उद्यम शुरू कर सकें।
राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि विकास की योजनाएं केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में भी उद्योग और निवेश लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे राज्य में संतुलित विकास होगा और सभी को समान अवसर मिलेंगे।