अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। व्हाइट हाउस ने इस आदेश को लेकर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम ईरान की बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षाओं और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन को रोकने के लिए उठाया गया है।
ट्रंप के नए आदेश की खास बातें
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित इस कार्यकारी आदेश में अमेरिकी प्रशासन को यह अधिकार मिल गया है कि वह उन सभी देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगा सके जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान से सामान या सेवाएं खरीदते हैं। इस आदेश की खासियत यह है कि यह किसी निश्चित टैरिफ दर को तय नहीं करता बल्कि अधिकारियों को परिस्थितियों के अनुसार शुल्क दरों को बदलने का अधिकार देता है।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आदेश लचीला है और बदलती परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव किए जा सकते हैं। अगर कोई देश अमेरिका के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या आर्थिक मामलों में सहयोग करता है तो उस देश के लिए टैरिफ में छूट या समायोजन किया जा सकता है।
किन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
इस नए आदेश के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री, वाणिज्य मंत्री और व्यापार प्रतिनिधि को टैरिफ प्रणाली लागू करने का पूरा अधिकार दिया गया है। इन अधिकारियों को नियम और दिशा-निर्देश जारी करने के साथ-साथ इस नीति को प्रभावी बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत फैसले लिए जा सकें।
ईरान के खिलाफ अमेरिका की चिंताएं
अमेरिकी प्रशासन ने इस आदेश के पीछे की वजहें गिनाते हुए कहा कि ईरान की कई गतिविधियां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए सीधा खतरा हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ईरान का परमाणु हथियार बनाने का प्रयास। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान लगातार अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ाने में लगा हुआ है।
इसके अलावा ईरान पर आरोप है कि वह पूरे मध्य पूर्व में आतंकवादी संगठनों और मिलिशिया समूहों को हथियार, पैसा और प्रशिक्षण देकर समर्थन करता है। व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया कि ये संगठन अमेरिकी सैनिकों और उनके सहयोगियों पर हमले करते रहते हैं।
बैलिस्टिक मिसाइल और क्षेत्रीय अस्थिरता
ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल विकास कार्यक्रम भी अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। ईरान ने हाल के वर्षों में लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का विकास किया है जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान इन मिसाइलों को अपने प्रॉक्सी समूहों को भी उपलब्ध कराता है।
क्षेत्रीय अस्थिरता में ईरान की भूमिका को लेकर अमेरिका ने कई बार चिंता जताई है। यमन, सीरिया, इराक और लेबनान में ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियां इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए खतरा बनी हुई हैं।
ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन
व्हाइट हाउस के बयान में ईरान पर अपने ही नागरिकों के साथ क्रूरता का आरोप भी लगाया गया है। बयान में कहा गया कि ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाती है और हजारों लोगों को मौत के घाट उतार चुकी है। महिलाओं, अल्पसंख्यकों और राजनीतिक विरोधियों के बुनियादी मानवाधिकारों का भी वहां लगातार हनन हो रहा है।
संसाधनों का कुप्रबंधन
अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया कि ईरानी सरकार अपने संसाधनों को अपनी जनता की भलाई पर खर्च करने की बजाय परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में लगा रही है। ईरान की आम जनता गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है लेकिन सरकार अपनी सैन्य महत्वाकांक्षाओं को प्राथमिकता दे रही है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहे ईरानी नागरिकों को जरूरी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं जबकि सरकार अरबों डॉलर हथियारों और आतंकवादी समूहों पर खर्च कर रही है।
अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा
अमेरिका का मानना है कि ईरान की ये सभी गतिविधियां अमेरिकी नागरिकों, उनके सहयोगी देशों और अमेरिकी हितों के लिए गंभीर और निरंतर खतरा बनी हुई हैं। इसलिए इन खतरों से निपटने के लिए मजबूत और तुरंत कार्रवाई जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की संभावना
इस नए टैरिफ आदेश से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की उम्मीद है। कई देश जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखते हैं उन्हें अब अमेरिकी बाजार और ईरानी बाजार के बीच चुनाव करना होगा। यूरोपीय संघ, चीन, रूस और भारत जैसे देश जो ईरान से तेल और अन्य सामान खरीदते हैं उन पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो देश अमेरिका के साथ सहयोग करेंगे उनके लिए टैरिफ में छूट या समायोजन संभव है। यह एक तरह से दूसरे देशों को ईरान से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करने की रणनीति है।
आर्थिक दबाव की रणनीति
यह टैरिफ आदेश अमेरिका की उस पुरानी नीति का हिस्सा है जिसमें आर्थिक दबाव के जरिए ईरान को अपनी नीतियां बदलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जाती है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका ने ईरान पर कई दौर के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।
इस नए आदेश से ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा क्योंकि अन्य देश भी अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए ईरान के साथ व्यापार कम कर सकते हैं। इससे ईरान की सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
यह आदेश अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है और आने वाले समय में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।