पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शनिवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जब अशोकनगर थाना क्षेत्र के खोसबादेलपुर शेखपाड़ा इलाके में चार मुर्गी पालन केंद्रों में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में करीब 12 हजार मुर्गियां जिंदा जलकर मर गईं और मालिकों को लगभग 20 लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ। आग इतनी तेज थी कि चारों पोल्ट्री फार्म पूरी तरह से राख हो गए। स्थानीय लोगों और दमकल की टीम ने मिलकर करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
आग लगने की घटना
शनिवार दोपहर के समय खोसबादेलपुर शेखपाड़ा इलाके में स्थित मुर्गी पालन केंद्रों में अचानक आग की लपटें उठने लगीं। पोल्ट्री फार्म के मालिक और आसपास के लोगों ने जब धुआं और लपटें देखीं तो वे तुरंत मौके पर पहुंचे। शुरुआत में लोगों ने खुद ही आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उनके प्रयास नाकाम रहे। इसके बाद तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी गई।
दमकल की कार्रवाई
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के लिए तत्काल काम शुरू किया। करीब 40 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल की टीम आग पर काबू पाने में सफल रही। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पोल्ट्री फार्म की छत चूंकि भूसे और घास-फूस की बनी थी, इसलिए आग बेहद तेजी से फैल गई। सूखे घास और भूसे की वजह से आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे फार्म को अपनी चपेट में ले लिया।
भारी नुकसान का आकलन
इस भीषण आग में करीब 10 से 12 हजार मुर्गियां जिंदा जलकर मर गईं। चारों मुर्गी पालन केंद्र पूरी तरह से नष्ट हो गए। पोल्ट्री फार्म के मालिकों को लगभग 20 लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ है। मुर्गियों के अलावा फार्म में रखा चारा, दवाइयां, उपकरण और भवन सब कुछ आग की भेंट चढ़ गया। फार्म मालिकों का कहना है कि यह उनकी आजीविका का एकमात्र साधन था और इस हादसे से वे पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।
स्थानीय लोगों की शिकायत
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग की देरी को लेकर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि अगर दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंच जातीं तो शायद इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। कुछ मुर्गियों और फार्म की संपत्ति को बचाया जा सकता था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दमकल आने में काफी देरी हुई, जिसकी वजह से पूरा फार्म राख हो गया। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले की जांच करे और भविष्य में ऐसी देरी न हो, इसके लिए उचित व्यवस्था की जाए।
दमकल विभाग का पक्ष
दमकल विभाग ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें घटना की सूचना मिलते ही तुरंत गाड़ियां रवाना कर दी गई थीं। लेकिन अशोकनगर रेलवे गेट पर भारी यातायात जाम की वजह से गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हो गई। दमकल अधिकारियों का कहना है कि रेलवे गेट पर लंबा जाम था, जिसे पार करने में काफी समय लग गया। हालांकि, मौके पर पहुंचने के बाद दमकल कर्मियों ने पूरी तत्परता से काम किया और जल्द से जल्द आग पर काबू पा लिया।
इलाके में फैली सनसनी
इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। आसपास के गांवों से लोग घटनास्थल पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। फार्म मालिकों के परिवार वाले सदमे में हैं। मुर्गी पालन उनके लिए रोजगार का मुख्य साधन था और इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया है। स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई है और प्रशासन से मदद की अपील की है।
मुर्गी पालन व्यवसाय पर असर
यह घटना क्षेत्र में मुर्गी पालन व्यवसाय करने वालों के लिए एक बड़ा झटका है। खोसबादेलपुर और आसपास के इलाकों में कई लोग मुर्गी पालन का व्यवसाय करते हैं। इस हादसे के बाद अन्य पोल्ट्री फार्म मालिक भी चिंतित हैं और वे अपने फार्मों में आग से बचाव के उपाय करने की सोच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पोल्ट्री फार्म में उचित सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए और आग बुझाने के उपकरण हमेशा तैयार रहने चाहिए।
आग लगने के संभावित कारण
हालांकि अभी तक आग लगने के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्राथमिक जांच में ऐसा माना जा रहा है कि बिजली के शॉर्ट सर्किट या किसी लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ हो सकता है। पोल्ट्री फार्म में भूसे और घास-फूस की छत होने से आग तेजी से फैली। अधिकारियों ने कहा है कि घटना की विस्तृत जांच की जाएगी और आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जाएगा।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और फार्म मालिकों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि इस हादसे में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई सरकार को करनी चाहिए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए पोल्ट्री फार्मों में सुरक्षा मानकों को लागू किया जाना चाहिए। लोगों ने यह भी मांग की है कि दमकल सेवाओं को और मजबूत बनाया जाए ताकि आपातकालीन स्थितियों में तुरंत मदद मिल सके।
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि किसी भी व्यवसाय में सुरक्षा उपायों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। मुर्गी पालन जैसे व्यवसाय में जहां हजारों जीवों की जिम्मेदारी होती है, वहां आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम होने बेहद जरूरी हैं। इस हादसे से सबक लेते हुए अन्य फार्म मालिकों को भी अपने यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।