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पश्चिम बंगाल के बिराटी रेलवे स्टेशन पर फिर लगी आग, कई दुकानें जलकर खाक

पश्चिम बंगाल के बिराटी रेलवे स्टेशन पर फिर लगी आग, कई दुकानें जलकर खाक
पश्चिम बंगाल के बिराटी रेलवे स्टेशन पर फिर लगी आग, कई दुकानें जलकर खाक

बिराटी स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक के पास दुकानों में भीषण आग लग गई, जिसमें तीन किताबों की दुकानें जल गईं। दमकल की दो गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। घटना से रेल सेवा प्रभावित हुई और स्थानीय व्यापारियों में दहशत फैल गई।

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Birati Railway Station Fire: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित बिराटी स्टेशन एक बार फिर आग की भयावह घटना का गवाह बना। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से सटे दुकानों में अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते स्टेशन परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दुकानदार, यात्री और स्थानीय लोग दहशत में आ गए।

इस घटना ने न सिर्फ व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी, बल्कि रेल यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बन गए कि शियालदह–बनगांव शाखा की डाउन लाइन पर ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं।

बिराटी स्टेशन पर आग की पूरी घटना

 बिराटी रेलवे स्टेशन पर लगी आग
बिराटी रेलवे स्टेशन पर लगी आग

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग सबसे पहले प्लेटफॉर्म नंबर एक से सटे एक दुकान में लगी। कुछ ही पलों में आग ने आसपास की तीन किताबों की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। लकड़ी और कागज से भरी दुकानों में आग तेजी से फैलती चली गई।

आग लगते ही स्टेशन क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को तुरंत बंद कर दिया गया, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। धुएं का गुबार इतना घना था कि स्टेशन परिसर में कुछ देर तक कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

दमकल की दो गाड़ियों ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक दुकानों में रखा ज्यादातर सामान जलकर राख हो चुका था।

दमकल अधिकारियों का कहना है कि आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, नहीं तो यह स्टेशन की अन्य दुकानों और प्लेटफॉर्म तक फैल सकती थी।

 बिराटी रेलवे स्टेशन पर लगी आग पर काबू पाते कर्मी
बिराटी रेलवे स्टेशन पर लगी आग पर काबू पाते कर्मी

रेल सेवा पर पड़ा सीधा असर

आग की वजह से सुरक्षा के मद्देनजर शियालदह–बनगांव शाखा की डाउन लाइन पर ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया। कई ट्रेनें बीच रास्ते में ही रोक दी गईं, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी।

रेल प्रशासन ने हालात सामान्य होने के बाद धीरे-धीरे ट्रेन सेवाएं बहाल कीं, लेकिन कुछ समय तक स्टेशन पर अव्यवस्था बनी रही।

व्यापारियों और स्थानीय लोगों में दहशत

दुकानदारों के लिए यह घटना किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। कई व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने आग जैसी किसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी। वर्षों की मेहनत से जमा किया गया सामान कुछ ही मिनटों में जलकर खत्म हो गया।

स्थानीय लोग भी सहमे हुए नजर आए। स्टेशन से सटे इलाके में रहने वाले लोगों ने बताया कि धुएं और आग की लपटों को देखकर उन्हें अपने घरों की चिंता सताने लगी थी।

 बिराटी रेलवे स्टेशन पर लगी आग
बिराटी रेलवे स्टेशन पर लगी आग

पुरानी घटना ने फिर बढ़ाई चिंता

इस घटना ने 30 दिसंबर की उस भयावह आग की याद ताजा कर दी, जब बिराटी स्टेशन के पास स्थित यदुबाबू बाजार में भीषण आग लगी थी। उस हादसे में करीब 200 दुकानें जलकर खाक हो गई थीं।

अब उसी स्टेशन क्षेत्र में दोबारा आग लगने से सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हो रही है। बार-बार आग की घटनाएं प्रशासन और रेलवे की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही हैं।

आग लगने के कारणों की जांच शुरू

फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट की जताई जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह हादसा तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या किसी लापरवाही का नतीजा है।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

बार-बार आग की घटनाओं ने स्टेशन और आसपास के बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों की मांग है कि स्टेशन से सटे दुकानों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि प्रशासन को सिर्फ हादसे के बाद सक्रिय होने के बजाय पहले से ही ठोस कदम उठाने चाहिए।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है।

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