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Kalyan Jewellers की मजबूत तिमाही: MOFSL ने दिया 600 रुपये का टारगेट

Kalyan Jewellers Q3 Results Beat Expectations: कल्याण ज्वेलर्स के शेयर में तेजी, MOFSL ने बनाए रखा 'बाय' रेटिंग
Kalyan Jewellers Q3 Results Beat Expectations: कल्याण ज्वेलर्स के शेयर में तेजी, MOFSL ने बनाए रखा 'बाय' रेटिंग (File Photo)

Kalyan Jewellers Q3 Results Beat Expectations: मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कल्याण ज्वेलर्स के शेयर पर 'बाय' रेटिंग बनाए रखी है और 600 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। कंपनी ने तीसरी तिमाही में 42% की आय वृद्धि दर्ज की। दक्षिण भारत के बाहर विस्तार और फ्रेंचाइजी मॉडल से कंपनी को मजबूती मिली है।

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Kalyan Jewellers Q3 Results Beat Expectations: भारतीय ज्वेलरी बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाली कल्याण ज्वेलर्स ने एक बार फिर निवेशकों को खुश करने का काम किया है। देश की प्रमुख ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजों को देखते हुए अपनी ‘बाय’ रेटिंग को बरकरार रखा है। साथ ही, 600 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस भी दोहराया है। यह खबर उन निवेशकों के लिए अहम है जो शेयर बाजार में अच्छे मुनाफे की तलाश में रहते हैं।

तीसरी तिमाही में जबरदस्त प्रदर्शन

कल्याण ज्वेलर्स ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की कुल आय में साल-दर-साल आधार पर 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि ब्रोकरेज फर्म के अनुमान से भी ज्यादा रही। MOFSL ने इस प्रदर्शन को हर मायने में बेहतरीन बताया है। कंपनी ने न केवल अपनी बिक्री बढ़ाई, बल्कि मुनाफे में भी अच्छी तेजी देखी गई।

भारतीय कारोबार में 42 फीसदी की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में नए स्टोर खोलने और पुराने स्टोर की बिक्री में 27 फीसदी की बढ़ोतरी का बड़ा योगदान रहा। यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का विस्तार मॉडल कितना सफल रहा है।

त्योहारी सीजन में धूम

दिवाली के आसपास के 30 दिनों में कल्याण ज्वेलर्स ने 30 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की। यह आंकड़ा उम्मीद से कहीं ज्यादा रहा। त्योहारी मौसम में लोगों ने जमकर सोने-चांदी की खरीदारी की। कंपनी के गोल्ड सेविंग स्कीम को भी खूब पसंद किया गया। इस योजना से नए ग्राहक जुड़े और पुराने ग्राहक भी अधिक खरीदारी करने आए।

गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम में भी इस तिमाही में अच्छी भागीदारी देखी गई। आमतौर पर कुल बिक्री का 30 फीसदी हिस्सा इस प्रोग्राम से आता है, लेकिन तीसरी तिमाही में यह थोड़ा ज्यादा रहा। इसका मतलब है कि लोग पुराने सोने के बदले नए डिजाइन खरीदना पसंद कर रहे हैं।

दक्षिण भारत से बाहर सफलता की कहानी

कल्याण ज्वेलर्स मूल रूप से दक्षिण भारत की कंपनी रही है, लेकिन अब इसने देश के अन्य हिस्सों में भी अपनी पहचान मजबूत कर ली है। MOFSL ने कहा कि दक्षिण भारत के बाहर विस्तार से कंपनी की पहचान एक अग्रणी ब्रांड के रूप में हुई है। इस विस्तार का एक और फायदा यह हुआ है कि स्टडेड ज्वेलरी यानी हीरे-जवाहरात वाले आभूषणों की बिक्री का हिस्सा बढ़ा है।

उत्तर और पश्चिम भारत के बाजारों में कंपनी की स्वीकार्यता बढ़ी है। यहां के ग्राहक भी अब कल्याण की डिजाइन और गुणवत्ता को पसंद कर रहे हैं। फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए विस्तार करने से कंपनी को कम निवेश में ज्यादा फैलाव मिला है। यह एसेट-लाइट मॉडल कहलाता है, जिसमें कंपनी को बड़े पूंजी निवेश की जरूरत नहीं होती।

कर्ज मुक्ति की दिशा में तेज कदम

कल्याण ज्वेलर्स अपने कर्ज को कम करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। सितंबर 2025 तक कंपनी ने 130 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया था। इससे गैर-GML कर्ज घटकर 550 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि तीसरी तिमाही में कोई कर्ज नहीं चुकाया गया, लेकिन प्रबंधन ने बताया कि चौथी तिमाही में 150 करोड़ रुपये और चुकाए जाएंगे।

कंपनी का लक्ष्य मार्च 2026 तक कर्ज को 400 करोड़ रुपये तक लाना है। और सबसे बड़ी बात यह है कि वित्त वर्ष 2027 तक कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त होने की योजना बना रही है। कर्ज कम होने से ब्याज खर्च घटेगा और मुनाफा बढ़ेगा। यह निवेशकों के लिए बहुत अच्छी खबर है।

भविष्य की विस्तार योजनाएं

कल्याण ज्वेलर्स का विस्तार अभी रुकने वाला नहीं है। कंपनी मध्यम अवधि में भारत में 80 से 90 नए स्टोर खोलने की योजना बना रही है। साथ ही, विदेशों में भी हर साल 6 से 7 नए स्टोर खोले जाएंगे। मध्य पूर्व और अमेरिका के बाजारों में कंपनी की पकड़ मजबूत हो रही है।

विदेशी बाजारों में भारतीय डिजाइन की ज्वेलरी की अच्छी मांग है। खासकर मध्य पूर्व में रहने वाले भारतीय और एशियाई समुदाय कल्याण के उत्पाद पसंद कर रहे हैं। अमेरिका में भी भारतीय डायस्पोरा के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है

MOFSL ने दिसंबर 2027 के प्राइस-टू-अर्निंग्स अनुपात के 35 गुना के आधार पर 600 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। यह मौजूदा बाजार भाव से काफी ऊपर है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के मजबूत बिजनेस मॉडल, विस्तार योजनाओं और कर्ज घटाने की रणनीति से शेयर में और तेजी आ सकती है।

कंपनी का एसेट-लाइट मॉडल नकदी प्रवाह को बेहतर बनाता है। फ्रेंचाइजी के जरिए विस्तार से कम पूंजी में ज्यादा स्टोर खोले जा सकते हैं। साथ ही, ब्रांड की पहचान भी मजबूत होती है। यह सब मिलकर कंपनी की मुनाफे की क्षमता को बढ़ाता है।

बाजार में प्रतिस्पर्धा और कल्याण की स्थिति

भारतीय ज्वेलरी बाजार में कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन कल्याण ज्वेलर्स ने अपनी अलग पहचान बनाई है। कंपनी की डिजाइन, गुणवत्ता और ग्राहक सेवा इसे दूसरों से अलग बनाती है। पारदर्शिता और भरोसेमंद ब्रांड इमेज ने ग्राहकों का विश्वास जीता है।

असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र की ओर बदलाव भी कल्याण जैसी कंपनियों के पक्ष में जा रहा है। लोग अब छोटे-मोटे दुकानों की बजाय बड़े ब्रांड से खरीदारी करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इससे कल्याण को लगातार फायदा मिल रहा है।

तकनीकी नवाचार और ग्राहक अनुभव

कल्याण ज्वेलर्स ने डिजिटल माध्यमों का भी अच्छा इस्तेमाल किया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहक डिजाइन देख सकते हैं और बुकिंग कर सकते हैं। गोल्ड सेविंग स्कीम को डिजिटल तरीके से मैनेज करना भी आसान हो गया है। यह युवा ग्राहकों को आकर्षित करता है।

स्टोर का अनुभव भी कंपनी की ताकत है। अच्छी तरह से सजे शोरूम, विशेषज्ञ स्टाफ और विस्तृत रेंज ग्राहकों को लुभाती है। कंपनी लगातार अपने कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बना रही है।

आर्थिक माहौल और ज्वेलरी सेक्टर

Kalyan Jewellers Q3 Results Beat Expectations: भारत में सोने की मांग हमेशा मजबूत रही है। त्योहारों, शादियों और निवेश के लिए सोना खरीदने की परंपरा गहरी है। आर्थिक विकास के साथ मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ रही है। यह ज्वेलरी सेक्टर के लिए अच्छा संकेत है।

सरकार की नीतियां भी संगठित क्षेत्र को बढ़ावा दे रही हैं। GST और हॉलमार्किंग जैसे नियमों से पारदर्शिता बढ़ी है। इससे बड़े ब्रांडों को फायदा हुआ है। कल्याण जैसी कंपनियां इस बदलाव का पूरा लाभ उठा रही हैं।

कल्याण ज्वेलर्स का प्रदर्शन दिखाता है कि सही रणनीति और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण से कंपनी लगातार आगे बढ़ सकती है। निवेशकों के लिए यह स्टॉक दीर्घकालिक निवेश का अच्छा विकल्प हो सकता है। MOFSL की ‘बाय’ रेटिंग इस विश्वास को और मजबूत करती है। आने वाले समय में कंपनी की कर्ज मुक्ति और विस्तार योजनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।


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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।