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संसद में बजट पर बहस: चिदंबरम ने उठाए अर्थव्यवस्था की विकास दर पर सवाल

Budget Session 2026-27: चिदंबरम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर पर उठाए सवाल
Budget Session 2026-27: चिदंबरम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर पर उठाए सवाल (File Photo)

Budget Session 2026-27: राज्यसभा में केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा में कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने गिरती आर्थिक विकास दर, राजकोषीय घाटे और बेरोजगारी पर सवाल उठाए। भाजपा ने बजट का बचाव किया। विपक्षी दलों ने किसानों के लिए कम प्रावधान और बढ़ते कर्ज पर चिंता जताई। कुछ सदस्यों ने बजट को विकास के लिए सकारात्मक बताया।

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राज्यसभा में आज केंद्रीय बजट 2026-27 पर विस्तृत चर्चा हुई। इस चर्चा में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने अपने विचार रखे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बहस की शुरुआत करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर पर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों और बजट आवंटन को लेकर तीखी आलोचना की। वहीं भाजपा सांसदों ने सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए बजट को देश के विकास के लिए फायदेमंद बताया।

चिदंबरम ने गिरती विकास दर पर जताई चिंता

कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने कहा कि देश की नाममात्र विकास दर लगातार गिर रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2023-24 में नाममात्र विकास दर 12 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर 9.8 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि 2025-26 में यह और कम होकर 8 प्रतिशत पर आ गई है। यह लगातार गिरावट देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

राजकोषीय घाटे पर सवाल

चिदंबरम ने राजकोषीय घाटे के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2025-26 में राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत है, लेकिन अगले साल यह केवल 4.3 प्रतिशत पर आएगा। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष में राजस्व घाटा 1.5 प्रतिशत है और अगले साल भी यह 1.5 प्रतिशत ही रहेगा। चिदंबरम ने जोर देकर कहा कि राजस्व घाटे को खत्म करने की जरूरत है और इसे 1 प्रतिशत पर रखा जाना चाहिए।

बेरोजगारी और विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति

बेरोजगारी के मुद्दे पर बोलते हुए चिदंबरम ने कहा कि 144 करोड़ की आबादी वाले देश में केवल 1 करोड़ 95 लाख लोग ही कारखानों में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र पिछले कई सालों से 16 प्रतिशत पर अटका हुआ है। कांग्रेस नेता ने बजट में आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विज्ञान, सामाजिक कल्याण और शहरी क्षेत्रों के लिए बजट में कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं की घोषणा तो की गई, लेकिन उनके लिए पैसा कम रखा गया या घोषित ही नहीं किया गया।

भाजपा सांसद ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि बजट का आकार तीन गुना बढ़कर 53 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि यूपीए शासन में यह केवल 16 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक था। उन्होंने बताया कि गरीब लोगों को आवास सुनिश्चित करने के लिए बड़ा बजट दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया है कि 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे किसानों को हस्तांतरित किए गए। उन्होंने कहा कि अनाज और बागवानी का उत्पादन बढ़ा है।

विकसित भारत के लिए बढ़ा बजट

अरुण सिंह ने कहा कि पिछले साल मनरेगा आवंटन की तुलना में विकसित भारत ग्राम योजना के लिए बजट आवंटन में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह बजट जीवन में आसानी और व्यापार करने में आसानी सुनिश्चित करेगा।

विपक्षी दलों की आलोचनाएं

तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ने विकास और गरीबी उन्मूलन पर जो आंकड़े दिए हैं, उनमें बड़ी खामियां हैं। उन्होंने जनगणना कराने में सालों की देरी को लेकर सरकार की आलोचना की।

किसान और कर्जदार देश की चिंता

द्रमुक के पी विल्सन ने आरोप लगाया कि बजट में किसानों, मजदूरों और उद्यमियों के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि चिंता की बात है कि भारत का कर्ज बढ़कर 215 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 56 प्रतिशत है।

आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी डिजिटल संपत्तियों के लिए भारी नियमन और अनुपालन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बहुत सारे निवेशक विदेश जा रहे हैं, उन्हें देश में वापस लाया जाना चाहिए।

ओडिशा को निराशा

बीजद के मुजिबुल्ला खान ने कहा कि ओडिशा के लिए बजट निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि चाहे कृषि क्षेत्र हो या रेलवे, राज्य को नजरअंदाज किया गया है।

कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी आईं

अन्नाद्रमुक के एम थम्बीदुरई ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कपड़ा केंद्रों को बजट से फायदा होगा।

देश में बदलाव की तस्वीर

Budget Session 2026-27: मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने कहा कि पिछले 10-12 सालों में भारत में बड़ा बदलाव आया है और इसे दुनिया भर में महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्थिर सरकार, स्थिर वित्त, साहसिक बजट और नेतृत्व ने यह बदलाव लाया है।

सीपीआई (एम) के ए ए रहीम ने देश में बढ़ते जीवन व्यय की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है कि बेरोजगारी दर जनवरी 2026 में 6.85 प्रतिशत थी।

जेडी (यू) के संजय कुमार झा ने कहा कि केंद्रीय बजट दर्शाता है कि सरकार देश की दीर्घकालिक वृद्धि पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक रणनीति के साथ अब क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

चर्चा में आम आदमी पार्टी के डॉ अशोक कुमार मित्तल, समाजवादी पार्टी की जया बच्चन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू, टीएमसी (एम) के जी के वासन और राजद के ए डी सिंह ने भी हिस्सा लिया। चर्चा अधूरी रही और इसे आगे जारी रखा जाएगा। बाद में सदन में विशेष उल्लेख लिए गए जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने तत्काल महत्व के मामले उठाए। कामकाज पूरा होने के बाद, उच्च सदन को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।