Ekta Kapoor: टीवी इंडस्ट्री में अगर किसी एक नाम ने दशकों तक दर्शकों की आदतें बदली हैं, तो वह नाम है एकता कपूर। घर-घर में पहुंचने वाले उनके धारावाहिकों ने न सिर्फ टीआरपी का इतिहास रचा, बल्कि महिला केंद्रित कहानियों को भी नई पहचान दी। लेकिन जितनी चर्चा उनके काम की रही, उतनी ही खामोशी उनकी निजी जिंदगी को लेकर बनी रही। खासकर उनकी शादी को लेकर। अब पहली बार, एक पॉडकास्ट के जरिए एकता कपूर ने खुद इस खामोशी को तोड़ा है।
शादी नहीं करने का फैसला और उसके पीछे की सोच
एकता कपूर ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने और उनके भाई तुषार कपूर ने कभी शादी को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया। उनकी जिंदगी में काम सबसे ऊपर रहा। यह फैसला किसी एक दिन में नहीं लिया गया, बल्कि धीरे-धीरे उनकी सोच का हिस्सा बन गया।
उन्होंने बताया कि जब वह सिर्फ 18–19 साल की थीं, तब उनके पिता जितेंद्र ने उनसे कहा था कि या तो कुछ ठोस काम करो या फिर शादी कर दी जाएगी। उस वक्त यह बात एक चेतावनी जैसी थी, लेकिन एकता के लिए यही लाइन उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई।
काम को चुना, इसलिए नहीं चुनी शादी
एकता ने माना कि वह उस उम्र में अपनी जिंदगी को खुलकर जीना चाहती थीं। किसी रिश्ते, जिम्मेदारी या सामाजिक दबाव में बंधना उन्हें मंजूर नहीं था। उन्होंने खुद को पूरी तरह काम में झोंक दिया। दिन-रात मेहनत, लगातार नए शो और जोखिम भरे फैसले, यही उनकी दुनिया बन गई।
उनके अनुसार, शादी से दूर रहने का मतलब रिश्तों से दूर रहना नहीं था, बल्कि खुद को समझने और अपने सपनों को पूरा करने की आज़ादी थी।
तुषार कपूर की सोच भी रही समान
एकता ने यह भी बताया कि यही सोच उनके भाई तुषार कपूर की भी रही। दोनों भाई-बहन ने करियर को सबसे ऊपर रखा। तुषार कपूर का भी झुकाव कभी पारंपरिक पारिवारिक ढांचे की ओर नहीं रहा। दोनों ने एक-दूसरे के फैसले का सम्मान किया और बिना किसी दबाव के अपनी जिंदगी जी।
पिता जितेंद्र और ‘बच्चों’ की चाह
पॉडकास्ट के दौरान एक दिलचस्प किस्सा भी सामने आया। एकता ने हंसते हुए बताया कि उनके पिता जितेंद्र ने एक बार मजाक में कहा था कि तुम दोनों में से कोई एक तो शादी कर लो। जब वजह पूछी गई, तो जवाब था कि उन्हें बस बच्चे चाहिए।
यहां से कहानी ने एक अलग मोड़ लिया। एकता और तुषार ने तय किया कि अगर शादी नहीं करनी, तो भी पेरेंट बनने का रास्ता चुना जा सकता है।
बिना शादी बने माता-पिता
एकता कपूर ने टेस्ट ट्यूब मैथड के जरिए मां बनने का फैसला लिया। उनके बेटे का नाम रवि है, जो उनके पिता जितेंद्र के असली नाम पर रखा गया है। वहीं तुषार कपूर भी इसी प्रक्रिया से अपने बेटे लक्ष्य के पिता बने।
यह फैसला उस समय लिया गया, जब समाज में इस विषय पर खुलकर बात नहीं होती थी। लेकिन एकता और तुषार ने बिना किसी दिखावे या सफाई के, अपने फैसले को अपनाया।
समाज से अलग लेकिन आत्मविश्वास से भरा फैसला
एकता कपूर की यह कहानी सिर्फ एक सेलिब्रिटी इंटरव्यू नहीं है। यह उस सोच को दर्शाती है, जहां शादी को सफलता या पूर्णता का पैमाना नहीं माना गया। उन्होंने यह साबित किया कि परिवार, प्यार और जिम्मेदारी के कई रूप हो सकते हैं।
उनका यह कदम उन महिलाओं के लिए भी एक संदेश है, जो अक्सर यह सवाल सुनती हैं कि “अब तक शादी क्यों नहीं की?” एकता का जवाब साफ है—क्योंकि जिंदगी का हर रास्ता एक जैसा नहीं होता।
आज भी एकता कपूर का फोकस कंटेंट, नए प्रयोग और इंडस्ट्री को आगे ले जाने पर है। मां बनने के बाद भी उनके काम की रफ्तार कम नहीं हुई। उन्होंने दिखाया कि पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ को अपने तरीके से संतुलित किया जा सकता है।