Bawana Businessman Murder: देश की राजधानी दिल्ली, जहां सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं बवाना की एक सड़क पर सोमवार शाम जो हुआ, उसने आम लोगों की नींद उड़ा दी। एक व्यापारी को बीच सड़क दौड़ा-दौड़ाकर गोलियां मारी गईं। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई। यह कोई अंधेरी गली या सुनसान इलाका नहीं था, बल्कि ऐसा स्थान था जहां लोग मौजूद थे, दुकानें खुली थीं और रोज़मर्रा की जिंदगी चल रही थी।
बवाना हत्याकांड और राजधानी की सुरक्षा
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला है। जिस तरह बदमाशों ने खुलेआम सड़क पर व्यापारी को निशाना बनाया, उससे साफ है कि अपराधियों में कानून का डर लगातार कम होता जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज में जो दृश्य सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। व्यापारी गोली लगने के बाद सड़क पर गिरता है। आसपास खड़े लोग कुछ पल के लिए समझ ही नहीं पाते कि क्या हुआ। जब तक वे संभलते और मदद के लिए आगे बढ़ते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
सीसीटीवी में कैद खौफनाक मंजर
सीसीटीवी फुटेज इस हत्याकांड का सबसे अहम सबूत बनकर सामने आया है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि किस तरह व्यापारी को निशाना बनाया गया और हमलावर बेखौफ होकर मौके से फरार हो गए। यह दृश्य न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए डरावना है जो रोज़ दिल्ली की सड़कों पर निकलता है।
लोगों का सवाल है कि जब अपराधी जानते हैं कि कैमरे लगे हैं, फिर भी वे ऐसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो इसका मतलब साफ है कि उन्हें पकड़े जाने का डर नहीं है।
लारेंस बिश्नोई गैंग ने ली हत्या की जिम्मेदारी
इस हत्याकांड के बाद मामला तब और गंभीर हो गया, जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई। इस पोस्ट में अमेरिका में बैठे लारेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े गैंगस्टर रणदीप मालिक और अनिल पंडित ने हत्या की जिम्मेदारी ली।
पोस्ट में धार्मिक नारों के साथ यह दावा किया गया कि बवाना में व्यापारी वैभव गांधी की हत्या उन्होंने करवाई है। पोस्ट की भाषा धमकी भरी है और उसमें साफ लिखा गया है कि अगर किसी ने उनके काम में दखल दिया, तो उसे बिना चेतावनी के मार दिया जाएगा।
खुलेआम धमकी और सिस्टम की चुनौती
यह पोस्ट सिर्फ एक स्वीकारोक्ति नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है। सवाल यह है कि जब अपराधी सोशल मीडिया पर खुलेआम हत्या की जिम्मेदारी ले रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं, तो उन्हें रोकने में सिस्टम क्यों नाकाम दिख रहा है?
यह पहली बार नहीं है जब बिश्नोई गैंग का नाम इस तरह सामने आया हो। पहले भी इस गैंग का नाम कई हाई-प्रोफाइल मामलों में जुड़ चुका है। लेकिन हर बार जांच और बयानबाजी के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है।
पुलिस जांच और शुरुआती कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि व्यापारी की बीच सड़क गोली मारकर हत्या की गई है और गैंगस्टरों के दावे की भी जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हमलावरों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, लोगों के मन में यह सवाल भी है कि क्या यह जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी या वास्तव में किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी?
व्यापारी वर्ग में बढ़ता डर
इस घटना के बाद बवाना और आसपास के इलाकों में व्यापारी वर्ग में गहरा डर है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक, सभी यह सोचने को मजबूर हैं कि अगर दिनदहाड़े एक व्यापारी को इस तरह मार दिया जा सकता है, तो उनकी सुरक्षा की क्या गारंटी है।
कई व्यापारियों का कहना है कि वे पहले ही रंगदारी और धमकियों से परेशान हैं, लेकिन अब डर और बढ़ गया है।
कानून व्यवस्था पर उठते बड़े सवाल
दिल्ली जैसे शहर में जहां पुलिस बल, तकनीक और खुफिया तंत्र की कोई कमी नहीं है, वहां इस तरह की वारदातें सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती हैं। यह सिर्फ अपराध की कहानी नहीं, बल्कि उस डर की कहानी है जो धीरे-धीरे आम लोगों के मन में घर कर रहा है।