पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है। जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष और भरतपुर के सस्पेंडेड तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर के परिवार के खिलाफ जिला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार शाम को लालगोला थाना पुलिस ने लालगोला के विभिन्न इलाकों में एक साथ छापेमारी करके करीब 10 करोड़ रुपये की कई संपत्तियां जब्त कर लीं। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस छापेमारी में तीन मुख्य संपत्तियां जब्त की गई हैं। इनमें लालगोला बस स्टैंड के पास स्थित एक लॉज, बलरामपुर इलाके का एक निजी शिक्षण संस्थान और नलधरी गांव का एक आवासीय मकान शामिल है। पुलिस ने इन सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है। इन संपत्तियों के दस्तावेज हुमायूं कबीर की बेटी नाजमा सुल्ताना, उनके दामाद रायहान अली, दामाद के माता-पिता, बेटी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं।

NDPS कानून के तहत हुई बड़ी कार्रवाई
पुलिस ने यह कार्रवाई NDPS यानी नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस मामले में की है। इस मामले में हुमायूं कबीर की बेटी नाजमा सुल्ताना समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के मुताबिक की गई है और सभी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन किया गया है।
मुर्शिदाबाद जिले में पिछले कुछ समय से मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर पुलिस सक्रिय रही है। कई बड़े मामलों में कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में हुमायूं कबीर के परिवार से जुड़ी संपत्तियों पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस का मानना है कि ये संपत्तियां अवैध गतिविधियों से अर्जित की गई हैं।

परिवार की तरफ से आया पलटवार
इस कार्रवाई को लेकर हुमायूं कबीर की बेटी नाजमा सुल्ताना ने पलटवार किया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनीतिक साजिश बताया है। नाजमा का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर पुलिस बहुत सक्रिय होकर यह छापेमारी कर रही है। उनका आरोप है कि उनके पिता की राजनीतिक स्थिति के कारण ही परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया जा रहा है।
नाजमा सुल्ताना ने कहा कि उनके ससुराल की सारी संपत्तियां पूरी तरह से कानूनी हैं। उनके ससुर ने मेहनत से यह सब कमाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस सबूत के उनके परिवार को परेशान किया जा रहा है। यह सब सिर्फ राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।

हुमायूं कबीर की राजनीतिक पृष्ठभूमि
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक विवादास्पद चेहरा रहे हैं। वे भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक थे, लेकिन उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में उन्होंने अपनी खुद की पार्टी जनता उन्नयन पार्टी बनाई और उसके अध्यक्ष बने।
हुमायूं कबीर पर पहले भी कई आरोप लगते रहे हैं। उन पर अवैध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं। हालांकि, उन्होंने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना रहा है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
लालगोला इलाके में इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि कानून सभी के लिए एक समान होना चाहिए। अगर किसी ने गलत काम किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए, चाहे वह कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो।
वहीं, हुमायूं कबीर के समर्थकों का कहना है कि यह सब राजनीतिक नाटक है। उनका आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी अपने विरोधियों को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना है कि जब तक हुमायूं कबीर तृणमूल में थे, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन जैसे ही उन्होंने पार्टी छोड़ी, उनके परिवार को परेशान किया जाने लगा।

आगे क्या होगा
अभी यह मामला शुरुआती दौर में है। पुलिस ने जो संपत्तियां जब्त की हैं, उनकी जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में सभी सबूत इकट्ठा कर रही है। अगर यह साबित होता है कि ये संपत्तियां अवैध गतिविधियों से अर्जित की गई हैं, तो इन्हें स्थायी रूप से जब्त किया जा सकता है।
दूसरी तरफ, नाजमा सुल्ताना और उनका परिवार कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है। उनका कहना है कि वे अदालत में जाकर अपना पक्ष रखेंगे। वे साबित करेंगे कि उनकी सारी संपत्तियां कानूनी हैं और यह कार्रवाई सिर्फ राजनीतिक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और भी गर्म हो सकता है। पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आने के साथ ही ऐसी कार्रवाइयां तेज हो सकती हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है।
कानून का पालन या राजनीतिक हथकंडा
यह पूरा मामला एक अहम सवाल खड़ा करता है। क्या यह कार्रवाई कानून के सही पालन के तहत हो रही है या फिर यह राजनीतिक हथकंडा है? इस सवाल का जवाब समय के साथ ही मिलेगा। अभी जो साफ है वह यह कि यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है।
जनता यह देख रही है कि कानून सभी पर एक समान तरीके से लागू होता है या नहीं। अगर किसी ने वाकई में गलत काम किया है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन अगर यह सिर्फ राजनीतिक बदले की कार्रवाई है तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
मुर्शिदाबाद में हुई यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटना बन गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में क्या नए खुलासे होते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल पुलिस अपनी जांच में जुटी है और परिवार अपनी सफाई देने में लगा है। सच्चाई क्या है, यह तो समय ही बताएगा।