भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले हैं, जिसे दोनों देशों ने ऐतिहासिक करार दिया है। लेकिन इस समझौते की घोषणा के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए कुछ दावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर रूस से तेल खरीदारी बंद करने और भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर शून्य शुल्क लगाने के मुद्दे पर स्पष्टता नहीं है। इन सवालों के बीच व्हाइट हाउस ने सोमवार को एक फैक्ट शीट जारी की है।
व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच सालाना अरबों डॉलर का व्यापार होता है। लेकिन पिछले कुछ समय में व्यापार को लेकर कुछ मतभेद भी सामने आए थे। अमेरिका चाहता था कि भारत अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों के लिए शुल्क कम करे। वहीं भारत भी अपने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच चाहता था। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने एक नए व्यापार समझौते पर काम शुरू किया।
रूसी तेल खरीदारी का मुद्दा
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर लगे अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने का फैसला किया है। यह फैसला भारत की उस प्रतिबद्धता को देखते हुए लिया गया है जिसमें भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने का वादा किया है। ट्रंप ने इस शुल्क को हटाने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
लेकिन इस दावे को लेकर भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब रूस ने कहा कि उसे भारत से तेल खरीद बंद करने का कोई संदेश नहीं मिला है। रूस के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
भारत का स्पष्ट रुख
जब भारत के विदेश मंत्रालय से इस बारे में सवाल किया गया तो उसने अपना पुराना बयान दोहराया। मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी 140 करोड़ जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए तेल खरीदारी के फैसले लेगा। भारत का यह रुख साफ करता है कि वह किसी दबाव में आकर अपनी ऊर्जा जरूरतों से समझौता नहीं करेगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और उसे अपनी जरूरतों के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदना पड़ता है।
शून्य शुल्क का दावा
व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने अमेरिकी सामानों पर शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को शून्य करने पर सहमति जताई है। लेकिन संयुक्त बयान में इसकी पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है।
संयुक्त बयान के मुताबिक भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क को या तो खत्म करने या कम करने पर सहमति दी है। इनमें सूखे अनाज, लाल ज्वार, सूखे मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में भी यही बात कही गई है। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भारत अमेरिकी सामानों पर कौन से शुल्क बरकरार रखेगा और किन पर छूट देगा।
आगे की बातचीत
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि दोनों देश बची हुई शुल्क बाधाओं, अतिरिक्त गैर-शुल्क बाधाओं, तकनीकी व्यापार बाधाओं, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, नियामक प्रथाओं, व्यापार उपायों, सेवाओं और निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण, सरकारी खरीद और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों की व्यापार विकृत प्रथाओं पर बातचीत जारी रखेंगे।
यह स्पष्ट करता है कि यह समझौता अभी शुरुआती चरण में है और आगे कई मुद्दों पर बातचीत होनी बाकी है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है
भारत के लिए यह व्यापार समझौता कई मायनों में महत्वपूर्ण है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अगर शुल्क कम होते हैं तो भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में सस्ते होंगे और उनकी बिक्री बढ़ेगी। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
साथ ही भारत को अमेरिका से कई उन्नत तकनीकें और मशीनरी भी सस्ती दरों पर मिल सकेगी। इससे भारत के उद्योगों को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।
संतुलन बनाना जरूरी
लेकिन भारत को अपने हितों का भी ध्यान रखना होगा। रूस भारत के लिए सस्ते तेल का एक बड़ा स्रोत है। अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है तो उसे दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। इससे भारत की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
इसलिए भारत को अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। यह एक संतुलन का खेल है जिसमें भारत को सावधानी से कदम उठाने होंगे।
विशेषज्ञों की राय
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश कितनी ईमानदारी और पारदर्शिता से इस पर अमल करते हैं। अभी कई बातें स्पष्ट नहीं हैं और इन्हें आने वाली बातचीत में सुलझाना होगा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है जो दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत कर सकता है। लेकिन रूसी तेल और शून्य शुल्क के सवालों पर अभी पूरी स्पष्टता नहीं है। व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट ने कुछ जवाब दिए हैं, लेकिन कई सवाल अभी भी बने हुए हैं। आने वाले समय में इन मुद्दों पर और स्पष्टता आएगी और तब ही इस समझौते के असली लाभों का पता चल पाएगा।