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ई-गवर्नेंस सुधार कार्यक्रम में पुणे, सांगली, ठाणे, नागपुर और नाशिक जिला परिषदों का उत्कृष्ट प्रदर्शन

E-Governance Reform Program: पुणे, सांगली, ठाणे, नागपुर और नाशिक जिला परिषदों को मिला सम्मान
E-Governance Reform Program: पुणे, सांगली, ठाणे, नागपुर और नाशिक जिला परिषदों को मिला सम्मान (File Photo)

E-Governance Reform Program: महाराष्ट्र में 150 दिनों के ई-गवर्नेंस सुधार कार्यक्रम में पुणे, सांगली, ठाणे, नागपुर और नाशिक जिला परिषदों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सात मापदंडों पर मूल्यांकन में इन जिलों ने तकनीक का सही उपयोग कर प्रशासन को पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी बधाई।

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महाराष्ट्र में डिजिटल शासन की नई पहल

देश में डिजिटल शासन की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में चलाए गए 150 दिनों के ई-गवर्नेंस सुधार कार्यक्रम के परिणाम 26 जनवरी 2026 को घोषित किए गए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों को तकनीक से जोड़कर आम नागरिकों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना था। पूरे राज्य में विभिन्न जिला परिषदों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और अपने काम से सरकार को प्रभावित किया।

इस पहल में पांच जिला परिषदों ने विशेष रूप से उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। पुणे, सांगली, ठाणे, नागपुर और नाशिक की जिला परिषदों ने तकनीकी उपकरणों का सही इस्तेमाल करके अपने काम में पारदर्शिता और गति लाई। इन जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उनकी टीमों को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बधाई दी है।

कार्यक्रम के प्रमुख मापदंड

इस सुधार कार्यक्रम में सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जिला परिषदों का मूल्यांकन किया गया। सबसे पहले कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट की गुणवत्ता और उपयोगिता देखी गई। एक अच्छी वेबसाइट नागरिकों को जरूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराती है। दूसरे बिंदु में आपले सरकार प्रणाली का समुचित उपयोग जांचा गया। यह प्रणाली नागरिकों की शिकायतों को सुनने और उन्हें हल करने का एक प्रभावी माध्यम है।

तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु था ई-ऑफिस का प्रभावी उपयोग। ई-ऑफिस से कागजी कार्रवाई कम होती है और फाइलें तेजी से आगे बढ़ती हैं। चौथे बिंदु में कार्यालयीन डैशबोर्ड की उपयोगिता परखी गई। डैशबोर्ड से अधिकारी हर काम की स्थिति एक नजर में देख सकते हैं। पांचवां मापदंड था व्हाट्सऐप चैटबॉट का इस्तेमाल। इस तकनीक से नागरिक अपने सवालों के जवाब तुरंत पा सकते हैं।

छठे बिंदु में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग को देखा गया। ये आधुनिक तकनीकें सरकारी कामकाज में सुरक्षा और गति दोनों बढ़ाती हैं। सातवां और आखिरी बिंदु था जीआईएस तकनीक का समावेश। इस तकनीक से भौगोलिक डेटा का विश्लेषण आसान हो जाता है और योजनाएं बेहतर बनती हैं।

चुनाव आचार संहिता का प्रभाव

इस कार्यक्रम के परिणाम पहले घोषित होने वाले थे, लेकिन चुनाव आचार संहिता के कारण जिला परिषद संवर्ग के परिणाम कुछ समय के लिए रोक दिए गए थे। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, चुनाव के दौरान किसी भी तरह की सरकारी घोषणा या सम्मान समारोह पर रोक होती है। इसलिए राज्य सरकार ने उचित समय का इंतजार किया और 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर इन परिणामों की घोषणा की।

यह समय चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद का था, इसलिए सभी नियमों का पालन करते हुए सरकार ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली जिला परिषदों की सूची सार्वजनिक की। इस देरी से कोई नुकसान नहीं हुआ, बल्कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर यह घोषणा और भी महत्वपूर्ण बन गई।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विजेता जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उनकी टीमों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इन जिला परिषदों ने तकनीक का सही उपयोग करके प्रशासन को पारदर्शी बनाया है। उनका मानना है कि जब सरकारी काम पारदर्शी होते हैं तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो जाती है। साथ ही नागरिकों का सरकार पर विश्वास बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये जिला परिषदें अन्य जिलों के लिए प्रेरणा हैं। इन्होंने साबित कर दिया है कि तकनीक के सही इस्तेमाल से सरकारी सेवाएं तेज और बेहतर हो सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन को नागरिक-केंद्रित बनाना ही इस सरकार का लक्ष्य है। इन जिलों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

विजेता जिला परिषदों की विशेषताएं

पुणे जिला परिषद ने अपनी वेबसाइट को बेहद उपयोगी बनाया है। नागरिक यहां से सभी सेवाओं की जानकारी आसानी से पा सकते हैं। सांगली जिला परिषद ने आपले सरकार प्रणाली का उत्कृष्ट उपयोग किया है। यहां नागरिकों की शिकायतों का समाधान तेजी से होता है। ठाणे जिला परिषद ने ई-ऑफिस सिस्टम को पूरी तरह अपना लिया है। इससे फाइलों की गति कई गुना बढ़ गई है।

नागपुर जिला परिषद ने डैशबोर्ड और चैटबॉट तकनीक में विशेष दक्षता दिखाई है। यहां के अधिकारी किसी भी काम की स्थिति तुरंत जान सकते हैं। नाशिक जिला परिषद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जीआईएस तकनीक का शानदार उपयोग किया है। इससे योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर हुआ है।

तकनीक से बदलता प्रशासन

इस कार्यक्रम ने साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक प्रशासन को कैसे बदल सकती है। पहले सरकारी कार्यालयों में एक काम के लिए कई बार जाना पड़ता था। अब डिजिटल प्रणाली से घर बैठे कई काम हो जाते हैं। ई-गवर्नेंस से समय की बचत होती है और नागरिकों को परेशानी नहीं होती।

व्हाट्सऐप चैटबॉट जैसी सुविधाओं से सवालों के जवाब मिनटों में मिल जाते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बड़े डेटा का विश्लेषण आसान हो गया है। ब्लॉकचेन तकनीक से रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं और छेड़छाड़ नहीं हो सकती। जीआईएस तकनीक से भूमि और भौगोलिक जानकारी का सही उपयोग हो रहा है।

राज्य स्तर पर सम्मान की तैयारी

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि विजेता जिला परिषदों और उनके अधिकारियों का जल्द ही औपचारिक सम्मान किया जाएगा। यह सम्मान समारोह राज्य स्तर पर आयोजित होगा। इसमें मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सम्मानित किए जाने वाले अधिकारियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार दिए जाएंगे।

इस सम्मान से अन्य जिला परिषदों को भी प्रेरणा मिलेगी। वे भी तकनीक का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सभी जिलों में ई-गवर्नेंस को मजबूत किया जाए। इससे पूरे राज्य में प्रशासनिक सेवाएं एक समान और उच्च गुणवत्ता की हो जाएंगी।

आम नागरिकों को लाभ

इस पूरे कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। जब सरकारी कार्यालय डिजिटल होते हैं तो लोगों को कम दौड़भाग करनी पड़ती है। सेवाएं तेज मिलती हैं और भ्रष्टाचार की संभावना कम हो जाती है। आपले सरकार जैसी प्रणालियों से शिकायतें सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचती हैं।

डिजिटल प्रशासन से गांव और शहर के बीच की खाई भी कम होती है। अब गांव में रहने वाला व्यक्ति भी अपने मोबाइल से सरकारी योजनाओं की जानकारी पा सकता है। वह अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है और उसका समाधान ट्रैक कर सकता है। यह बदलाव समाज में समानता लाने में मदद करता है।

भविष्य की योजनाएं

महाराष्ट्र सरकार ने संकेत दिया है कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले समय में और भी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। सभी जिला परिषदों को डिजिटल बनाने की योजना है। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सरकार चाहती है कि हर नागरिक को सरकारी सेवाएं डिजिटल माध्यम से मिलें। इसके लिए इंटरनेट की पहुंच बढ़ाई जाएगी और डिजिटल साक्षरता के कार्यक्रम चलाए जाएंगे। महाराष्ट्र को देश का सबसे डिजिटल राज्य बनाने का लक्ष्य है। इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।