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धर्म के आचरण से ही मानव जाति का कल्याण संभव – डॉ. मोहन भागवत जी

Mohan Bhagwat at Namokar Panchkalyanak Mahotsav: धर्म के आचरण से ही मानव जाति का कल्याण संभव - पंचकल्याणक महोत्सव में संबोधन
Mohan Bhagwat at Namokar Panchkalyanak Mahotsav: धर्म के आचरण से ही मानव जाति का कल्याण संभव - पंचकल्याणक महोत्सव में संबोधन (File Photo)

Mohan Bhagwat at Namokar Panchkalyanak Mahotsav: नासिक के मलसाणे में णमोकार तीर्थक्षेत्र में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव में RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म के आचरण से ही मानव जाति का कल्याण संभव है। भौतिकवाद ने सुविधाएं दीं लेकिन सुख छीन लिया। आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का समन्वय जरूरी है।

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धर्म और आधुनिकता का संगम जरूरी

Mohan Bhagwat at Namokar Panchkalyanak Mahotsav: नासिक जिले के मलसाणे गांव में स्थित णमोकार तीर्थक्षेत्र में आयोजित दिगंबर जैन पंथ के अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने मानवता के कल्याण के लिए धर्म की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया ने धर्म को छोड़कर केवल भौतिकवाद को अपनाया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि लोगों को सुविधाएं तो मिल गई हैं, लेकिन असली सुख दूर होता जा रहा है। इस कारण आज मानवता के सामने कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

डॉ. भागवत ने कहा कि आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का समन्वय करके ही धर्म के आचरण से मानव जाति का वास्तविक कल्याण संभव है। यह महोत्सव इसी संदेश को देने वाला है कि धर्म और विज्ञान दोनों एक साथ चल सकते हैं।

भारत की विविधता में एकता की शक्ति

सरसंघचालक ने भारत की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि विविधता में एकता ही भारत की असली शक्ति है। हमारे देश में अनेक धर्म, पंथ, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन सभी एक सूत्र में बंधे हुए हैं। यही भारतीयता की पहचान है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म भी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह जैसे मूल्यों को समाज में स्थापित करता है।

डॉ. भागवत ने कहा कि सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानव को बेहतर बनाना और समाज में शांति, प्रेम और भाईचारा स्थापित करना है। इसलिए सभी धर्मों का सम्मान करना और उनके अच्छे संदेशों को अपनाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।

पंचकल्याणक महोत्सव का धार्मिक महत्व

णमोकार तीर्थक्षेत्र में आयोजित यह पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव दिगंबर जैन पंथ का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। पंचकल्याणक का अर्थ है पांच शुभ घटनाएं – गर्भ कल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा कल्याणक, केवल ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक। इन पांच घटनाओं को याद करते हुए भगवान की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की जाती है।

यह महोत्सव कई दिनों तक चलता है और इसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह एक ऐसा अवसर है जब पूरा समुदाय एक साथ आता है और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।

धार्मिक गुरुओं और नेताओं की उपस्थिति

इस विशाल आयोजन में मंच पर गणाचार्य श्री कुंथुसागर जी महाराज, आचार्य श्री देवनंदी जी महाराज, विधायक डॉ. राहुल आहेर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में धर्म और नैतिकता की जरूरत पर बल दिया।

गणाचार्य श्री कुंथुसागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा को सर्वोपरि मानता है। आज के समय में जब हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है, तब जैन धर्म के सिद्धांत पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और धर्म के मार्ग पर चलें।

आचार्य श्री देवनंदी जी महाराज ने कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि सही आचरण, सच्चाई और करुणा से जीवन जीना है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्म के अनुसार जीता है, वही सच्चा धार्मिक है।

समाज में धर्म की भूमिका

डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म केवल व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और उसे दिशा देने का काम करता है। धर्म के बिना समाज बिखर जाता है और अराजकता फैलती है। आज जो समस्याएं हम देख रहे हैं – बढ़ता अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा, असमानता – ये सब धर्म से दूरी का परिणाम हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने विज्ञान और तकनीक में तो बहुत प्रगति की है, लेकिन वहां मानसिक बीमारियां, अकेलापन, डिप्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसका कारण है कि उन्होंने धर्म और आध्यात्मिकता को छोड़ दिया है। भारत को यह गलती नहीं करनी चाहिए। हमें विकास के साथ-साथ अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी संजोकर रखना होगा।

युवाओं के लिए संदेश

सरसंघचालक ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप देश का भविष्य हैं। आपको आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक और नैतिक मूल्यों को भी सीखना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल करें, लेकिन उसके गुलाम न बनें। सोशल मीडिया और इंटरनेट का सही उपयोग करें और अपनी संस्कृति से जुड़े रहें।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने बड़ों का सम्मान करना चाहिए और उनके अनुभव से सीखना चाहिए। परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उन्हें निभाएं। धर्म का पालन करने से जीवन में अनुशासन, संयम और संतोष आता है, जो सफलता की कुंजी है।

णमोकार तीर्थक्षेत्र का महत्व

मलसाणे गांव में स्थित णमोकार तीर्थक्षेत्र जैन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां सुंदर जैन मंदिर हैं और नियमित रूप से धार्मिक गतिविधियां होती रहती हैं। यह स्थान शांति और आध्यात्मिकता का केंद्र है। हर साल यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

इस बार के पंचकल्याणक महोत्सव ने इस स्थान को और भी प्रसिद्ध बना दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया है। यह इस बात का प्रतीक है कि सभी धर्मों में आपसी सम्मान और सद्भाव है।

धार्मिक सद्भाव का संदेश

इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि विभिन्न विचारधाराओं और परंपराओं के लोग एक मंच पर आए। यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि यहां सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है। डॉ. भागवत की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि हम सभी एक हैं और हमारा लक्ष्य मानवता की भलाई है।

विधायक डॉ. राहुल आहेर ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और लोगों को एक साथ लाते हैं। सरकार भी ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहयोग करेगी।

समाज सुधार में धर्म का योगदान

Mohan Bhagwat at Namokar Panchkalyanak Mahotsav: डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म केवल मोक्ष का साधन नहीं है, बल्कि समाज सुधार का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। जैन धर्म ने हमेशा समाज में अच्छे मूल्यों को बढ़ावा दिया है। अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत विकास में सहायक हैं, बल्कि समाज को भी बेहतर बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम धर्म के इन सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में उतारें। छोटी-छोटी बातों से शुरुआत करें – सच बोलें, दूसरों की मदद करें, पर्यावरण का ध्यान रखें, संयम से जीवन जिएं। इन छोटे कदमों से ही बड़ा बदलाव आएगा।

महोत्सव में शामिल हजारों श्रद्धालुओं ने इस संदेश को गंभीरता से लिया और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण वातावरण रहा और सभी ने मिलकर इस पवित्र अवसर का आनंद लिया।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।